दिल्ली वेस्ट जिले में AATS ने एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर वाली दो Toyota Fortuner बरामद कीं। तकनीकी जांच में दोनों चोरी की निकलीं। एक वाहन पुराने cheating case से भी जुड़ा मिला।
दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस-2026 से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने चोरी के वाहनों और संदिग्ध गाड़ियों के खिलाफ जांच अभियान तेज कर दिया है। इसी अभियान के दौरान वेस्ट जिले की AATS टीम के सामने ऐसा मामला आया, जिसने वाहन चोरी और उनकी पहचान बदलकर इस्तेमाल किए जाने की आशंका को एक बार फिर सामने ला दिया।
पुलिस को सूचना मिली थी कि दिल्ली-NCR में अलग-अलग स्थानों पर दो Toyota Fortuner SUVs एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ इस्तेमाल की जा रही हैं। सूचना मिलते ही AATS टीम ने मामले की पड़ताल शुरू की। शुरुआत CCTV फुटेज से हुई और इसके बाद वाहन स्वामित्व से जुड़ी जानकारी तथा फील्ड वेरिफिकेशन कराया गया।
लगातार जांच और निगरानी के बाद पुलिस टीम ने दोनों Fortuner को अलग-अलग स्थानों से ट्रेस कर लिया और उन्हें AATS कार्यालय लाकर आगे की जांच शुरू की।
लेकिन असली खुलासा इसके बाद हुआ।
एक नंबर ही नहीं, चेसिस नंबर भी समान मिला
दोनों वाहनों की फिजिकल चेकिंग के दौरान पुलिस ने पाया कि दोनों Toyota Fortuner SUVs पर एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर प्रदर्शित हो रहा था। इससे संदेह और गहरा गया। जांच में दोनों वाहनों पर एक ही चेसिस नंबर भी पाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वाहनों की तकनीकी जांच कराने का फैसला किया। दोनों Fortuner को अधिकृत Toyota सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां विशेषज्ञों ने वाहनों की तकनीकी जांच की।
तकनीकी परीक्षण के बाद पुष्टि हुई कि दोनों वाहन चोरी के हैं।
यानी पुलिस के सामने अब सिर्फ एक संदिग्ध नंबर प्लेट का मामला नहीं था, बल्कि दो चोरी की SUV का ऐसा कनेक्शन सामने आया था, जिन्हें दिल्ली-NCR में एक ही पहचान के साथ इस्तेमाल किया जा रहा था।
स्वतंत्रता दिवस से पहले क्यों बढ़ाई गई थी जांच?
पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में चोरी के वाहनों की पहचान, संदिग्ध वाहनों की जांच और सेकेंड हैंड वाहन डीलरों के सत्यापन पर विशेष जोर दिया गया।
इसी अभियान के तहत AATS/West District की टीम को लगातार वाहन जांच और संदिग्ध वाहनों के सत्यापन में लगाया गया था।
इस विशेष अभियान के दौरान SI गजेंद्र, HC देवेंद्र, HC नंद किशोर, HC बनवारी और Ct. रमेश्वर की टीम ने कार्रवाई की। टीम ने Insp. मुकेश मीणा, I/C AATS और ACP/Ops वेस्ट डिस्ट्रिक्ट श्री राजेश कुमार के पर्यवेक्षण में काम किया।
CCTV और फील्ड वेरिफिकेशन से मिली सफलता
दोनों Fortuner के बारे में सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जल्दबाजी में केवल दस्तावेजों पर भरोसा नहीं किया। टीम ने अलग-अलग स्थानों के CCTV फुटेज खंगाले, वाहनों की आवाजाही की जानकारी जुटाई और उनके स्वामित्व से जुड़े विवरणों का सत्यापन किया।
लगातार तकनीकी और जमीनी जांच के बाद दोनों SUVs को अलग-अलग स्थानों से खोज निकाला गया।
दोनों वाहनों को AATS कार्यालय लाकर जब उनकी एक साथ जांच की गई तो समान नंबर का मामला सामने आया। इसके बाद तकनीकी सत्यापन ने पुलिस की शुरुआती आशंका को सही साबित कर दिया।
एक Fortuner पुराने cheating case में भी इस्तेमाल हुई
मामले की जांच यहीं नहीं रुकी। बरामद वाहनों के रिकॉर्ड और उनकी पूर्व गतिविधियों की पड़ताल के दौरान पुलिस को पता चला कि बरामद की गई एक Toyota Fortuner गांधी नगर थाने में दर्ज एक cheating case में भी शामिल रही है।
इसकी जानकारी संबंधित जांच अधिकारी को दे दी गई है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि उक्त वाहन का मामले में किस तरह इस्तेमाल किया गया था और इस वाहन को इस्तेमाल करने वाले लोगों की भूमिका क्या थी।
तीन पुराने मामलों से जुड़ी कड़ियां
पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई के दौरान निम्न मामलों का संबंध सामने आया है:
E-FIR No. 010560/2021 — थाना गांधी नगर
E-FIR No. 020095/2021 — थाना प्रीत विहार
FIR No. 231/19 — धारा 420/467/468/120B IPC, थाना गांधी नगर
इन मामलों की कड़ियों को बरामद वाहनों से जोड़कर आगे की जांच की जा रही है।
23 वर्षीय आर्यन मावी का नाम सामने
पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार मामले में आर्यन मावी, निवासी विवेक विहार, दिल्ली, उम्र 23 वर्ष, का नाम सामने आया है।
बरामदगी में कुल दो Toyota Fortuner SUVs शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन वाहनों की चोरी कहां से हुई, इन्हें किस तरह दिल्ली-NCR तक लाया गया और इनके वास्तविक पहचान संबंधी विवरणों को छिपाने या बदलने की कोशिश किस स्तर पर हुई।
क्या किसी बड़े नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच?
एक ही नंबर के साथ दो महंगी SUV का अलग-अलग स्थानों पर इस्तेमाल होना जांच का महत्वपूर्ण पहलू है। इसके साथ ही दोनों वाहनों का चोरी का निकलना और एक वाहन का पुराने धोखाधड़ी के मामले से जुड़ना जांच को और गंभीर बना देता है।
अब पुलिस की जांच इस बात पर भी केंद्रित हो सकती है कि क्या यह केवल दो वाहनों तक सीमित मामला है या इसके पीछे चोरी के वाहनों को फर्जी पहचान के साथ इस्तेमाल करने वाला कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।
पुलिस ने संबंधित जांच अधिकारियों को जानकारी दे दी है और आगे की जांच जारी है। जांच के दौरान वाहनों के दस्तावेज, वास्तविक पहचान, पूर्व मालिकाना रिकॉर्ड और इनके इस्तेमाल से जुड़े अन्य मामलों की भी पड़ताल की जा रही है।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि चोरी के महंगे वाहनों को फर्जी या संदिग्ध पहचान के साथ सड़कों पर कैसे इस्तेमाल किया जा रहा था। फिलहाल AATS की इस कार्रवाई से दो चोरी की Fortuner पुलिस के कब्जे में हैं और इनके जरिए सामने आई कड़ियां आगे की जांच का आधार बन रही हैं।
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