ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चार मूर्ति चौक पर बने पहले अंडरपास का 5 नवंबर से ट्रायल शुरू हो गया है। सुबह 6 से 11 बजे तक पांच घंटे में करीब 14 हजार वाहन यहां से गुजरे। 8 नवंबर रात 10 बजे तक ट्रायल चलेगा। सफल होने पर अंडरपास को स्थायी रूप से वाहनों के लिए खोलने की तैयारी है। करीब 99 करोड़ रुपये की लागत से बना यह अंडरपास ट्रैफिक जाम और ईंधन की बर्बादी कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चार मूर्ति चौक पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से परेशान वाहन चालकों के लिए आखिरकार राहत की तस्वीर सामने आने लगी है। जिस चौराहे से गुजरने में लोगों को कई बार काफी समय तक जाम में फंसे रहना पड़ता था, वहां अब वाहन बिना रुके फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं।
वजह है चार मूर्ति चौक पर नवनिर्मित अंडरपास, जिसका ट्रायल 5 नवंबर की सुबह 6 बजे से शुरू कर दिया गया है। ट्रायल शुरू होते ही महज पांच घंटे में करीब 14 हजार वाहन इस अंडरपास से गुजर चुके हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह ट्रायल सफल रहेगा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों को जल्द ही जाम से स्थायी राहत मिल पाएगी?
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक, अंडरपास का ट्रायल 5 नवंबर से शुरू होकर 8 नवंबर की रात 10 बजे तक चलेगा। इस दौरान वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी। यदि ट्रायल के दौरान कहीं कोई तकनीकी या यातायात संबंधी अड़चन सामने आती है तो उसे तत्काल दुरुस्त कराया जाएगा। ट्रायल सफल रहने पर अंडरपास को औपचारिक रूप से स्थायी तौर पर वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा।
पांच घंटे में 14 हजार वाहनों की आवाजाही, जाम से मिली शुरुआती राहत
बृहस्पतिवार सुबह 6 बजे अंडरपास को ट्रायल के लिए खोला गया। इसके बाद सुबह 11 बजे तक यानी करीब पांच घंटे में लगभग 14 हजार वाहन यहां से गुजर चुके थे। अंडरपास खुलने के बाद चार मूर्ति चौक पर यातायात का नजारा पहले की तुलना में बदला हुआ दिखाई दिया।
दरअसल, चार मूर्ति चौक ग्रेटर नोएडा वेस्ट का बेहद व्यस्त यातायात केंद्र है। यहां से रोजाना हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। पीक आवर्स में वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण लोगों को जाम का सामना करना पड़ता था। ऐसे में अंडरपास के ट्रायल के लिए खुलने से स्थानीय निवासियों और रोजाना इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है।
डेढ़ से दो किलोमीटर का रास्ता होगा कम, ईंधन की भी होगी बचत
इस अंडरपास का सबसे बड़ा फायदा उन वाहन चालकों को मिलेगा, जो 130 मीटर रोड और 60 मीटर रोड से गौड़ सिटी और तिगड़ी गोलचक्कर होते हुए गाजियाबाद की तरफ जाते हैं।
अभी तक इन वाहन चालकों को हिंडन पार करके यू-टर्न लेकर वापस आना पड़ता था। इस पूरी प्रक्रिया में न केवल अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी, बल्कि वाहनों का ईंधन भी अधिक खर्च होता था। अंडरपास शुरू होने से ऐसे वाहन चालकों की लगभग डेढ़ से दो किलोमीटर तक की दूरी कम हो जाएगी।

प्राधिकरण के अनुमान के मुताबिक, चार मूर्ति चौक से प्रतिदिन करीब 50 हजार वाहन गुजरते हैं। ऐसे में यदि वाहनों की अतिरिक्त दूरी और ईंधन की खपत में होने वाली कमी को जोड़ा जाए तो सालभर में लगभग 35 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
जाम कम होगा तो प्रदूषण पर भी पड़ेगा असर
अंडरपास का फायदा केवल समय और पैसे की बचत तक सीमित नहीं रहने वाला। चार मूर्ति चौक पर ट्रैफिक जाम कम होने से वाहनों को लंबे समय तक सड़क पर खड़े होकर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे ईंधन की अनावश्यक खपत कम होगी और वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण होने वाले प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लगातार बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के बीच यह अंडरपास यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।
एसीईओ सुमित यादव ने किया निरीक्षण, यातायात व्यवस्था सुधारने के निर्देश
अंडरपास का ट्रायल शुरू होने के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर अंडरपास और उसके आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया।
इस दौरान उप महाप्रबंधक विजय रावल, वरिष्ठ प्रबंधक प्रभात शंकर और प्राधिकरण की अन्य टीम भी मौजूद रही। अधिकारियों ने अंडरपास से गुजरने वाले वाहनों की आवाजाही का जायजा लिया और आसपास के क्षेत्र में यातायात को और अधिक व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए।
एसीईओ सुमित यादव ने कहा कि ट्रायल सफल रहने पर अंडरपास को जल्द ही स्थायी रूप से वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। ट्रायल के दौरान सामने आने वाली किसी भी समस्या को तत्काल ठीक कराया जाएगा, ताकि वाहन चालकों को सुचारु यातायात सुविधा मिल सके।
तय समय से पहले पूरा हुआ निर्माण, करीब 99 करोड़ रुपये हुए खर्च
चार मूर्ति चौक पर बने इस अंडरपास का निर्माण 15 फरवरी 2025 को शुरू किया गया था, जो 30 अक्टूबर 2026 को पूरा हो गया। खास बात यह है कि परियोजना दिसंबर 2026 की निर्धारित समयसीमा से पहले ही पूरी कर ली गई।
इस परियोजना पर लगभग 99 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। करीब 720 मीटर लंबा यह अंडरपास 60 मीटर रोड के समानांतर बनाया गया है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में यातायात दबाव को कम करने के लिहाज से इसे प्राधिकरण की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जा रहा है।
सीईओ एनजी रवि कुमार ने जताया निवासियों का आभार
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने अंडरपास के निर्माण के दौरान सहयोग देने के लिए ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने निर्माण कार्य में जुटी प्राधिकरण की पूरी टीम की भी सराहना की।
सीईओ ने आश्वस्त किया कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट और ग्रेटर नोएडा के जिन इलाकों में यातायात की समस्या बनी हुई है, वहां लोगों को राहत देने के लिए लगातार कार्य कराए जाएंगे।
फिलहाल चार मूर्ति अंडरपास का ट्रायल जारी है और सभी की नजरें 8 नवंबर की रात 10 बजे तक होने वाले इस परीक्षण पर टिकी हैं। यदि ट्रायल सफल रहता है तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हजारों वाहन चालकों को जल्द ही जाम से बड़ी राहत मिल सकती है। अब देखना होगा कि यह अंडरपास रोजाना के भारी यातायात दबाव में कितना कारगर साबित होता है।
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