ग्राम चिपियाना बुजुर्ग के खसरा नंबर 492 में कथित अवैध निर्माण का मामला 15 दिन बाद भी सवालों के घेरे में है। GNIDA वर्क सर्किल-1 के टेक्निकल अधिकारी अमित नागर के अनुसार धारा-10 के नोटिस की कार्रवाई चल रही है और अधिकारियों के हस्ताक्षर बाकी हैं। वहीं, विभाग की ओर से यह भी कहा गया कि कॉलोनाइजर स्वयं अपने प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा तोड़ रहा है। दूसरी ओर, सूत्रों का दावा है कि एक लेंटर में कथित रूप से खराब सामग्री लगाए जाने के कारण उसे कॉलोनाइजर ने खुद हटाया, जबकि बाकी निर्माण कार्य आज भी जारी है। 10 अगस्त को कार्रवाई करने पहुंची टीम के साथ कथित गाली-गलौज और बदसलूकी की घटना पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्राम चिपियाना बुजुर्ग | खसरा नंबर 492

ग्राम चिपियाना बुजुर्ग के खसरा नंबर 492 में कथित अवैध निर्माण का मामला सामने आए 15 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य आज भी उसी रफ्तार से जारी है। खबर सामने आने के बाद कुछ समय के लिए निर्माण रुकने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में फिर काम शुरू हो गया।
सूत्रों के मुताबिक, निर्माण रुकने के बाद संबंधित कॉलोनाइजर ने GNIDA के संबंधित विभाग में कर्मचारियों से मुलाकात की, जिसके बाद निर्माण दोबारा शुरू हो गया।
GNIDA अधिकारी ने क्या कहा?
हमारी टीम ने वर्क सर्किल-1 के टेक्निकल अमित नागर से बात की। उनका कहना है कि मामले में धारा-10 के नोटिस की कार्रवाई चल रही है और अधिकारियों के हस्ताक्षर बाकी हैं। अमित नागर के मुताबिक, कॉलोनाइजर स्वयं अपने प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा तोड़ रहा है और कार्य रोक दिया गया है।
लेकिन यहां भी सवाल खड़ा होता है—यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध है, तो क्या कॉलोनाइजर द्वारा खुद कुछ हिस्सा तोड़ देना ही पर्याप्त कार्रवाई मानी जा सकती है?
अगर विभाग स्वयं कार्रवाई की प्रक्रिया में है, तो नियमों के उल्लंघन पर विभागीय स्तर से स्पष्ट और प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?
यही स्थिति कई सवालों को जन्म देती है और विभागीय कार्रवाई तथा निर्माणकर्ता के बीच कथित मिलीभगत की आशंका को लेकर उठ रहे सवालों को और गंभीर बनाती है।
लेकिन सूत्रों का दावा है कि एक लेंटर में कथित रूप से खराब सामग्री लगाए जाने के कारण उस हिस्से को कॉलोनाइजर ने खुद हटाया, जबकि बाकी निर्माण आज भी जारी है।
अब सवाल है—
अगर धारा-10 की कार्रवाई चल रही है, तो बाकी निर्माण क्यों जारी है?
अगर कॉलोनाइजर खुद निर्माण तोड़ रहा है, तो विभागीय कार्रवाई की वास्तविक स्थिति क्या है?
10 अगस्त की घटना पर भी सवाल
10 अगस्त 2026 को निर्माण रोकने पहुंची टीम के साथ कथित गाली-गलौज और बदसलूकी की बात सामने आई थी।
लेकिन सवाल है—
क्या FIR दर्ज हुई?
क्या कोई सख्त कार्रवाई हुई?
किसकी जवाबदेही तय हुई?
जवाब है—नहीं।
विभाग की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि “ये तो होता रहता है।”
अब सवाल यह है कि क्या सरकारी कार्रवाई करने पहुंची टीम के साथ कथित गाली-गलौज और बदसलूकी को “ये तो होता रहता है” कहकर नजरअंदाज करना उचित है?
क्या इस तरह का रवैया उन सवालों को और गंभीर नहीं बनाता कि आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है, या फिर इसके पीछे कोई ऐसी वजह है जिसकी वजह से मामले में सख्ती नहीं दिखाई जा रही?
और यदि किसी टीम के साथ कथित बदसलूकी के बाद भी FIR या सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो क्या इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर उठ रहे संदेह और गहरे नहीं होते?
अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी भी सामने नहीं आई है।
‘चढ़ावे’ और ‘पैकेट’ के आरोप
इस मामले में सूत्रों की ओर से वर्क सर्किल-1 के अधिकारियों तक कथित ‘चढ़ावे’ और समय-समय पर ‘पैकेट’ पहुंचने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
सवाल यह है कि अगर ये आरोप गलत हैं, तो GNIDA सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?
क्या विभाग इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है?
क्या संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से इस मामले में कोई स्पष्टीकरण लिया गया?
अब जनता को जवाब चाहिए
यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध है तो उसे प्रभावी तरीके से रोका क्यों नहीं गया?
और अगर धारा-10 का नोटिस तैयार है तो अधिकारियों के हस्ताक्षर कब होंगे और जमीन पर कार्रवाई कब दिखाई देगी?
क्योंकि जब शिकायत हो, खबर हो, टीम मौके पर पहुंचे और उसके बावजूद निर्माण लगातार आगे बढ़े, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—
क्या यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही है या फिर व्यवस्था के भीतर कुछ और चल रहा है?
आखिर खसरा नंबर 492 में निर्माण को रोकने की जिम्मेदारी वाले अधिकारी कहां हैं और कार्रवाई कब होगी?
Bharat News 360 TV इन आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहा है। GNIDA, वर्क सर्किल-1 या संबंधित पक्ष अपना पक्ष रखना चाहें तो उसे भी प्रमुखता से प्रसारित किया जाएगा।
COMMENTS