फर्नीचर मार्केट में इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण को लेकर सवाल—आखिर अनुमति किसकी थी और किसके संरक्षण में चला काम? GNIDA वर्क सर्किल-1 की निगरानी पर भी उठे सवाल।
शाहबेरी
में रातों-रात सड़क निर्माण!
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा
खेल?
ग्रेटर
नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-1
के अंतर्गत आने वाले शाहबेरी
क्षेत्र की फर्नीचर मार्केट
इन दिनों चर्चा का विषय बनी
हुई है। यहां रातों-रात इंटरलॉकिंग सड़क
निर्माण को लेकर गंभीर
सवाल खड़े हो रहे
हैं। आरोप है कि
जिस मार्केट में यह सड़क
बनाई जा रही है,
वह लंबे समय से
विवादों और कथित अनियमितताओं
के आरोपों से घिरी रही
है। ऐसे में सबसे
बड़ा सवाल यह है
कि आखिर इस सड़क
निर्माण की अनुमति किसने
दी और किसके आदेश
पर यह कार्य कराया
जा रहा है?
स्थानीय
लोगों और सूत्रों का
दावा है कि सड़क
निर्माण का कार्य कथित
तौर पर फर्नीचर कारोबारियों
द्वारा कराया जा रहा है।
आरोप यह भी है
कि सड़क का निर्माण
किसी अधिकृत सरकारी योजना के तहत नहीं,
बल्कि निजी हितों को
ध्यान में रखकर किया
जा रहा है। यदि
ऐसा है तो यह
मामला केवल सड़क निर्माण
तक सीमित नहीं रह जाता,
बल्कि प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और
निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर
प्रश्नचिन्ह खड़े करता है।
सबसे
गंभीर आरोप वर्क सर्किल-1
के जिम्मेदार कर्मचारियों पर लगाए जा
रहे हैं। स्थानीय लोगों
का कहना है कि
जिस क्षेत्र की निगरानी की
जिम्मेदारी संबंधित जूनियर इंजीनियर की है, वहां
उनकी जानकारी के बिना इतना
बड़ा निर्माण कार्य संभव नहीं है।
आरोप है कि कल
रात भी सड़क के
बचे हुए हिस्से का
निर्माण कराया गया और काम
देर रात तक जारी
रहा।
अब जरा सोचिए... जब
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कई स्वीकृत
विकास कार्य महीनों और कई बार
वर्षों तक फाइलों में
अटके रहते हैं, तब
यह सड़क इतनी तेजी
से कैसे तैयार हो
रही है? आखिर ऐसी
कौन-सी व्यवस्था है
जो कथित तौर पर
इस निर्माण को दिन और
रात दोनों समय जारी रखने
की अनुमति दे रही है?
आरोप
लगाने वालों का यह भी
कहना है कि यह
पूरा मामला ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की नाक के
नीचे हो रहा है।
लोगों के बीच चर्चा
है कि क्या संबंधित
अधिकारी वास्तव में अनजान हैं
या फिर सब कुछ
देखते हुए भी आंखें
बंद रखने का दिखावा
किया जा रहा है?
क्योंकि यदि निर्माण में किसी प्रकार
की अनियमितता है तो जिम्मेदार
लोगों की जवाबदेही तय
होनी चाहिए।
अब निगाहें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों
पर हैं। क्या इस
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच
होगी? क्या सड़क निर्माण
की अनुमति, निर्माण का खर्च और
संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका सार्वजनिक
की जाएगी? या फिर यह
मामला भी अन्य विवादों
की तरह फाइलों में
दबकर रह जाएगा?
शाहबेरी
की यह सड़क अब
केवल एक सड़क नहीं
रही, बल्कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की पारदर्शिता, जवाबदेही
और निगरानी व्यवस्था की परीक्षा बन
चुकी है।
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