ग्रेटर नोएडा के बिलासपुर में अतिक्रमण और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई की। खसरा संख्या 1554 की करीब 24 हजार वर्गमीटर जमीन पर किए जा रहे कथित अवैध निर्माण और कब्जे को ध्वस्त कर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। प्राधिकरण के अनुसार मुक्त कराई गई जमीन की अनुमानित कीमत करीब 48 करोड़ रुपये है। कार्रवाई के दौरान बाउंड्री बनाकर अवैध प्लॉटिंग की तैयारी की जा रही थी।
ग्रेटर नोएडा में अधिसूचित क्षेत्र के भीतर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्राधिकरण की कार्रवाई लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में बुधवार को बिलासपुर में उस समय हलचल मच गई, जब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम ने अतिक्रमण के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया।
कार्रवाई का दायरा करीब 24 हजार वर्गमीटर जमीन तक बताया गया है। प्राधिकरण के मुताबिक इस जमीन पर कुछ कॉलोनाइजरों द्वारा बाउंड्री बनाकर कथित तौर पर अवैध प्लॉटिंग की तैयारी की जा रही थी।
प्राधिकरण की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया और जमीन को कब्जे से मुक्त कराया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्राधिकरण के अनुसार मुक्त कराई गई जमीन की अनुमानित कीमत करीब 48 करोड़ रुपये है।
यानी कार्रवाई सिर्फ कुछ निर्माण हटाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एके सिंह के अनुसार बिलासपुर के खसरा संख्या 1554 की जमीन पर कॉलोनाइजर कथित तौर पर अवैध निर्माण कर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे।
प्राधिकरण के अनुसार मौके पर बाउंड्री बनाकर जमीन की प्लॉटिंग करने की तैयारी की जा रही थी।
जब इस गतिविधि की जानकारी प्राधिकरण को मिली तो संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया।
प्राधिकरण का कहना है कि नोटिस दिए जाने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया।
इसके बाद कार्रवाई का निर्णय लिया गया और बुधवार को प्राधिकरण की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया।

इस पूरी कार्रवाई में नोटिस के बाद भी कथित अतिक्रमण नहीं हटाना अहम बिंदु रहा।
प्राधिकरण की ओर से पहले ही संबंधित पक्ष को निर्माण हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। लेकिन जब मौके पर अतिक्रमण बना रहा, तो अधिकारियों ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
कार्रवाई ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर की गई।
सीईओ के निर्देश के बाद परियोजना विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक नागेंद्र सिंह के नेतृत्व में वर्क सर्किल-8 की पूरी टीम मौके पर पहुंची।
प्राधिकरण के सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में अवैध निर्माण को हटाया गया।
24 हजार वर्गमीटर जमीन हुई कब्जामुक्त
प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद करीब 24 हजार वर्गमीटर जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।
प्राधिकरण के मुताबिक इस जमीन की अनुमानित कीमत लगभग 48 करोड़ रुपये है।
यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रेटर नोएडा में तेजी से बढ़ती जमीन की कीमतों के बीच अधिसूचित क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और कब्जे की गतिविधियां प्राधिकरण के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
ऐसे में प्राधिकरण की ओर से की गई कार्रवाई का उद्देश्य न केवल मौजूदा अवैध निर्माण को हटाना है, बल्कि अधिसूचित क्षेत्र में अनधिकृत कॉलोनियों और प्लॉटिंग की गतिविधियों पर रोक लगाना भी है।

कार्रवाई के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ग्रेटर नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को अवैध निर्माण करने की अनुमति नहीं है।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि ग्रेटर नोएडा में कहीं भी जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण से संपर्क करके जमीन और संबंधित परियोजना की पूरी जानकारी जरूर हासिल करें।
एसीईओ ने लोगों को विशेष रूप से सावधान करते हुए कहा कि वे अवैध कॉलोनियों में अपनी गाढ़ी कमाई न फंसाएं।
यानी प्राधिकरण की चिंता सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है। आम लोगों को ऐसी जमीन या प्लॉट खरीदने से बचाने की कोशिश भी की जा रही है, जहां बाद में कानूनी या प्रशासनिक परेशानी खड़ी हो सकती है।
सीईओ के निर्देश पर लगातार चल रही कार्रवाई
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने अधिसूचित क्षेत्र में अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इन्हीं निर्देशों के तहत प्राधिकरण की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में अवैध कब्जों और निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।
बिलासपुर की कार्रवाई भी इसी अभियान का हिस्सा है।
प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि अधिसूचित क्षेत्र में जमीन पर अवैध कब्जे या निर्माण की कोशिशों को किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं दी जाएगी।

बिलासपुर की इस कार्रवाई से उन लोगों के लिए भी संदेश है, जो बिना प्राधिकरण से सत्यापन कराए जमीन खरीदने की तैयारी कर रहे हैं।
किसी भी जमीन में निवेश करने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि जमीन किस क्षेत्र में आती है, वहां निर्माण या प्लॉटिंग की अनुमति है या नहीं और संबंधित परियोजना प्राधिकरण से स्वीकृत है या नहीं।
क्योंकि बाद में अगर जमीन अवैध कॉलोनी या अनधिकृत प्लॉटिंग का हिस्सा निकलती है, तो खरीदार की मेहनत की कमाई फंस सकती है।
48 करोड़ की जमीन खाली, लेकिन अभियान अभी जारी
फिलहाल बिलासपुर में करीब 24 हजार वर्गमीटर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। जमीन की अनुमानित कीमत करीब 48 करोड़ रुपये बताई गई है।
कार्रवाई में अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया और मौके पर प्राधिकरण की कार्रवाई पूरी की गई।
लेकिन ग्रेटर नोएडा में अतिक्रमण के खिलाफ यह अभियान यहीं रुकने वाला नहीं है।
सीईओ के निर्देश के बाद प्राधिकरण का फोकस अधिसूचित क्षेत्रों में अवैध निर्माण, कब्जे और प्लॉटिंग की गतिविधियों पर बना हुआ है।
अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में प्राधिकरण की कार्रवाई किन अन्य इलाकों तक पहुंचती है और कितनी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाता है।
फिलहाल बिलासपुर में 48 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत वाली जमीन पर चला बुलडोजर उन लोगों के लिए बड़ा संकेत है, जो अधिसूचित क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण या अवैध प्लॉटिंग की कोशिश कर रहे हैं।
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