ग्रेटर नोएडा में बुधवार रात और गुरुवार सुबह हुई तेज बारिश के बाद जलभराव की समस्या से निपटने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर अधिकारियों ने फील्ड में रहकर जल निकासी, नालियों की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त कराया। वहीं इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव वाले स्थानों को चिन्हित कर त्वरित समाधान की मांग उठाई।
मानसून की तेज बारिश अक्सर शहरों की तैयारियों की असली परीक्षा लेती है। कुछ घंटों की बारिश ही यह तय कर देती है कि शहर का ड्रेनेज सिस्टम कितना सक्षम है और प्रशासन कितना सतर्क। बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक हुई लगातार बारिश के दौरान ग्रेटर नोएडा में भी कई स्थानों पर जलभराव की आशंका बनी, लेकिन इस बार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पहले से अलर्ट मोड में नजर आया। जैसे ही बारिश तेज हुई, प्राधिकरण की टीमें फील्ड में उतर गईं और जलभराव की स्थिति पर लगातार निगरानी शुरू कर दी।
सुबह होते-होते शहर के विभिन्न वर्क सर्किलों की टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय दिखाई दीं। जहां भी सड़कों पर पानी जमा होने की सूचना मिली, वहां तत्काल पंप लगाकर पानी की निकासी कराई गई। जिन स्थानों पर नालियां अवरुद्ध मिलीं या ड्रेनेज सिस्टम प्रभावित दिखा, वहां मौके पर ही सफाई कराकर जल निकासी को सुचारु बनाया गया।
सीईओ एनजी रवि कुमार ने पहले ही जारी कर दिए थे सख्त निर्देश
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एनजी रवि कुमार ने मानसून की सक्रियता को देखते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बारिश के दौरान कार्यालयों में बैठने के बजाय फील्ड में मौजूद रहें।
उन्होंने कहा था कि यदि कहीं भी जलभराव की समस्या दिखाई दे तो बिना किसी देरी के उसका समाधान कराया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सीईओ के इन निर्देशों का असर गुरुवार को पूरे शहर में साफ दिखाई दिया। सुपरवाइजर से लेकर वर्क सर्किल प्रभारी और वरिष्ठ अधिकारी तक सभी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण करते रहे।

वर्क सर्किल की टीमों ने संभाला मोर्चा
तेज बारिश के दौरान प्राधिकरण के सभी वर्क सर्किलों की टीमें लगातार अपने क्षेत्रों का दौरा करती रहीं। जिन सड़कों पर पानी जमा होता दिखाई दिया, वहां तुरंत पंप लगाकर जल निकासी कराई गई।
इसके साथ ही ड्रेनेज सिस्टम और नालियों की सफाई कर पानी के प्रवाह को सामान्य बनाया गया। सभी वर्क सर्किल अपनी-अपनी क्षेत्रीय स्थिति का अपडेट लगातार कंट्रोल ग्रुप पर साझा करते रहे, ताकि किसी भी स्थान पर समस्या बढ़ने से पहले कार्रवाई की जा सके।
वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद संभाली कमान
जलभराव की स्थिति का जायजा लेने के लिए केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी भी स्वयं फील्ड में उतरे।
अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) श्रीलक्ष्मी वीएस ने सेक्टर ईकोटेक-2 और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा जल निकासी व्यवस्था का जायजा लिया।
वहीं एसीईओ सुमित यादव ने ईकोटेक-3 और 130 मीटर रोड का दौरा कर वहां की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए।
इसके अलावा महाप्रबंधक (जीएम) एके सिंह तथा उप महाप्रबंधक (डीजीएम) विजय कुमार रावल भी पूरे समय फील्ड में सक्रिय रहे।
डीजीएम विजय कुमार रावल ने बैनेट विश्वविद्यालय, सिरसा गोलचक्कर, ट्रकर्स प्वाइंट और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा की। जिन स्थानों पर पानी जमा होने की संभावना थी, वहां पहले से टीमें तैनात रखी गईं।
गोलचक्करों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी
बारिश के दौरान शहर के प्रमुख गोलचक्करों, औद्योगिक क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई। प्राधिकरण की टीमों ने यह सुनिश्चित किया कि कहीं भी लंबे समय तक पानी जमा न रहे और यातायात प्रभावित न हो।
जहां भी आवश्यकता महसूस हुई, वहां तत्काल सफाई और पंपिंग की व्यवस्था की गई ताकि नागरिकों और उद्योगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

नालों की सफाई का अभियान भी जारी
प्राधिकरण ने केवल आपातकालीन जल निकासी तक खुद को सीमित नहीं रखा। भविष्य में जलभराव की समस्या को कम करने के उद्देश्य से वर्क सर्किल और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा ग्रामवार निर्धारित शेड्यूल के अनुसार नालों की सफाई का अभियान भी लगातार चलाया जा रहा है।
इस अभियान का उद्देश्य मानसून के पूरे सीजन में ड्रेनेज व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है।
उद्योग संगठन ने भी निभाई सक्रिय भूमिका
इस निरीक्षण और राहत अभियान के दौरान इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (आईबीए), गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष अमित उपाध्याय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कृष्ण शर्मा तथा कोषाध्यक्ष राकेश अग्रवाल भी पूरे समय अधिकारियों के साथ मौजूद रहे।
आईबीए के पदाधिकारियों ने औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव वाले प्रमुख स्थानों को मौके पर चिन्हित कराया और अधिकारियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि किन क्षेत्रों में हर वर्ष बारिश के दौरान जलभराव की समस्या अधिक गंभीर हो जाती है और किन स्थानों पर स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि औद्योगिक क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए, ताकि उद्योगों का उत्पादन, माल परिवहन और कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित न हो।
सभी स्तर के अधिकारी और कर्मचारी रहे सक्रिय
बारिश के दौरान वरिष्ठ प्रबंधक राजेश कुमार निम, वरिष्ठ प्रबंधक नागेंद्र सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक नरोत्तम सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक प्रभात शंकर सहित सभी वर्क सर्किल के प्रबंधक, सहायक प्रबंधक और सुपरवाइजर लगातार फील्ड में मौजूद रहे।
इन अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पर नजर रखी और आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित कराई।
अब नजर अगले मानसूनी दौर पर
बारिश के इस दौर में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने जिस तरह से सक्रियता दिखाई, उससे यह संकेत जरूर मिला है कि प्रशासन जलभराव की समस्या को लेकर गंभीर है। हालांकि वास्तविक चुनौती तब सामने आएगी जब लगातार कई दिनों तक भारी बारिश होगी। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ड्रेनेज सिस्टम, नालों की सफाई और फील्ड मॉनिटरिंग की यह रणनीति भविष्य में भी उतनी ही प्रभावी साबित होती है या नहीं।
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