Friday, July 17, 2026

तिलपता दुकान हादसे पर बदली पूरी तस्वीर! वायरल दावों के बीच सामने आया GNIDA का पक्ष

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने रखा आधिकारिक पक्ष, नियमों के पालन और सुरक्षित शहरी विकास पर दिया जोर।

New Delhi , Latest Updated On - Jul 16 2026 | 19:15:00 PM
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तिलपता गांव में निर्माणाधीन दो मंजिला दुकान गिरने के मामले में सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए गए, लेकिन अब GNIDA ने अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट किया है। प्राधिकरण का कहना है कि संबंधित निर्माण पहले से ही निर्धारित मानकों के विपरीत था और इस संबंध में नोटिस भी जारी किया जा चुका था।

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ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर क्षेत्र स्थित तिलपता गांव में निर्माणाधीन दो मंजिला दुकान गिरने की घटना चर्चा का विषय बनी रही। घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि नाले की खुदाई के दौरान निर्माणाधीन दुकान धराशायी हो गई। वायरल वीडियो के आधार पर विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और लोगों के बीच कई सवाल भी उठने लगे। हालांकि, अब इस पूरे मामले में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है।

प्राधिकरण के महाप्रबंधक (सिविल) ए.के. सिंह के अनुसार, संबंधित निर्माण पहले से ही निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया था। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि निर्माण नाले की निर्धारित भूमि के भीतर किया जा रहा था, जिससे भविष्य में जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। इसी कारण निर्माणकर्ता को पहले ही नोटिस जारी कर नियमों का पालन करने और आवश्यक निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था।


GNIDA का कहना है कि तेजी से विकसित हो रहे ग्रेटर नोएडा में आधुनिक और सुरक्षित शहरी अवसंरचना विकसित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में नालों के निर्माण, चौड़ीकरण और सफाई का कार्य नियमित रूप से कराया जा रहा है, ताकि बरसात के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं से नागरिकों को राहत मिल सके और शहर की जल निकासी व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

प्राधिकरण का मानना है कि यदि नालों की निर्धारित भूमि पर निर्माण होने दिया जाए तो भविष्य में न केवल जल निकासी व्यवस्था बाधित होगी, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से ऐसे मामलों में समय-समय पर निरीक्षण कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाती है और संबंधित पक्षों को नियमों के अनुसार निर्माण करने के लिए निर्देशित किया जाता है।


GNIDA ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी भवन या व्यावसायिक निर्माण कार्य से पहले संबंधित विभाग से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करना प्रत्येक निर्माणकर्ता की जिम्मेदारी है। स्वीकृत नक्शे और निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण न केवल कानूनी विवादों से बचाता है, बल्कि भविष्य में आर्थिक नुकसान और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को भी काफी हद तक कम करता है।

वायरल वीडियो में घटना को नाले की खुदाई से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन प्राधिकरण ने फिलहाल ऐसी किसी भी बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। GNIDA का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार संबंधित निर्माण पहले से ही नियमों के विपरीत पाया गया था और इस संबंध में नियमानुसार नोटिस जारी किया जा चुका था। इसलिए वर्तमान में प्राधिकरण अपने रिकॉर्ड और पूर्व में की गई कार्रवाई को इस मामले का महत्वपूर्ण आधार मान रहा है।


फिलहाल दुकान गिरने के वास्तविक कारणों पर अंतिम तकनीकी निष्कर्ष आना बाकी है। यदि इस मामले में विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाती है, तो उसी के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि संरचना गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे। तब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्राधिकरण का पक्ष यही है कि संबंधित निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं था और नाले की भूमि पर निर्माण को लेकर पहले ही आवश्यक कार्रवाई की जा चुकी थी।

यह घटनाक्रम एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि तेजी से हो रहे शहरी विकास के बीच भवन निर्माण नियमों, स्वीकृत नक्शों और सार्वजनिक अवसंरचना से जुड़े मानकों का पालन करना बेहद आवश्यक है। GNIDA का मानना है कि नियमानुसार निर्माण ही सुरक्षित, सुव्यवस्थित और भविष्य के अनुकूल शहर की मजबूत आधारशिला बन सकता है।

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