नोएडा प्राधिकरण में रक्षाबंधन के दिन बुलाई गई एक बैठक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सूत्रों के मुताबिक GM एके अरोड़ा ने सिविल विभाग से जुड़ी बैठक छुट्टी के दिन बुलाई, जिसकी सूचना अचानक WhatsApp ग्रुप के जरिए दी गई। बैठक में अनुपस्थित करीब 50 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है। वर्क सर्किल 6 से 10 के वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक, सहायक प्रबंधक और अपर अभियंता भी नोटिस की जद में बताए जा रहे हैं। कर्मचारियों का सवाल है कि छुट्टी के दिन बैठक बुलाने से पहले क्या निर्धारित प्रक्रिया और CEO की अनुमति ली गई थी?
नोएडा प्राधिकरण से जुड़ी एक बैठक अब अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।
मामला रक्षाबंधन के दिन बुलाई गई सिविल विभाग की बैठक से जुड़ा बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक छुट्टी के दिन बैठक बुलाए जाने के तरीके को लेकर प्राधिकरण के कर्मचारियों और अधिकारियों में नाराजगी है।
बताया जा रहा है कि GM एके अरोड़ा की ओर से बैठक बुलाई गई थी और इसकी सूचना कर्मचारियों को अचानक WhatsApp ग्रुप के जरिए दी गई।
अब विवाद सिर्फ बैठक बुलाए जाने तक सीमित नहीं है।
बैठक में गैरहाजिर रहने वाले करीब 50 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस दिए जाने की बात सामने आ रही है।
और नोटिस में उनसे तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
यानी छुट्टी के दिन बैठक...
अचानक WhatsApp पर सूचना...
और बैठक में नहीं पहुंचने वालों को नोटिस।
यही घटनाक्रम अब नोएडा प्राधिकरण के भीतर सवाल खड़े कर रहा है।
कौन-कौन अधिकारी नोटिस की जद में?
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में वर्क सर्किल-6 से लेकर वर्क सर्किल-10 तक के अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है।
इनमें—
- वरिष्ठ प्रबंधक
- प्रबंधक
- सहायक प्रबंधक
- अपर अभियंता
जैसे पदों पर तैनात अधिकारी-कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि बैठक में गैरहाजिर रहने वाले करीब 50 लोगों से जवाब मांगा गया है।
यही वजह है कि अब कर्मचारियों के बीच इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कुछ कर्मचारियों का सवाल है कि अगर बैठक इतनी महत्वपूर्ण थी तो इसकी सूचना पहले क्यों नहीं दी गई?
अगर बैठक में अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी थी तो छुट्टी के दिन बैठक बुलाने की प्रक्रिया क्या थी?
और सबसे अहम सवाल—
क्या छुट्टी के दिन कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने के लिए निर्धारित अनुमति ली गई थी?
छुट्टी के दिन दफ्तर खुलता कैसे है?
यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
नोएडा प्राधिकरण में सामान्य तौर पर छुट्टी के दिन कार्यालय खुलने और कर्मचारियों को बुलाने के लिए एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया होती है।
सूत्रों के मुताबिक छुट्टी के दिन कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने के लिए कार्मिक विभाग की ओर से संबंधित आदेश जारी करने की प्रक्रिया होती है।
और इस प्रक्रिया में CEO की अनुमति महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यानी छुट्टी के दिन कर्मचारी अपनी मर्जी से या किसी सामान्य निर्देश के आधार पर कार्यालय आने के लिए बाध्य नहीं किए जा सकते—इसके लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।
यही वजह है कि अब कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
रक्षाबंधन के दिन सिविल विभाग की बैठक बुलाने से पहले क्या पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था?
अगर अनुमति ली गई थी तो कर्मचारियों को इसकी जानकारी समय से क्यों नहीं दी गई?
और अगर अनुमति नहीं ली गई थी तो बैठक बुलाने का आधार क्या था?
GM एके अरोड़ा की कार्यशैली पर भी उठे सवाल
बैठक को लेकर शुरू हुआ विवाद अब GM एके अरोड़ा की कार्यशैली तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
सूत्रों का आरोप है कि बैठक बुलाने के तरीके को लेकर कर्मचारियों में पहले से नाराजगी है और इस घटना के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच तनातनी और बढ़ गई है।
कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि क्या बैठक बुलाने के लिए नियमों और निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार किया गया?
हालांकि इन आरोपों पर GM एके अरोड़ा का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
ऐसे में यह भी जरूरी है कि प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट किया जाए कि बैठक किस आदेश के तहत बुलाई गई थी और छुट्टी के दिन कर्मचारियों को बुलाने की क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
करीब 50 लोगों को नोटिस... क्या बढ़ेगा दबाव?
इस मामले में करीब 50 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस दिए जाने की खबर ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद अब अधिकारी-कर्मचारियों पर दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक वर्क सर्किल-6 से 10 तक के वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक, सहायक प्रबंधक और अपर अभियंताओं को नोटिस दिए जाने की चर्चा है।
यानी एक बैठक में गैरहाजिरी का मामला अब बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
कर्मचारियों का सवाल है कि अगर छुट्टी के दिन बैठक बुलाने की सूचना अचानक WhatsApp पर दी गई थी, तो क्या सभी अधिकारियों को समय रहते बैठक की जानकारी मिल पाई थी?
और अगर सूचना पर्याप्त समय पहले नहीं मिली तो गैरहाजिरी के लिए जिम्मेदारी तय करने का आधार क्या है?
नोएडा प्राधिकरण में अब असली सवाल यही
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि बैठक हुई या नहीं।
सवाल यह है कि छुट्टी के दिन बैठक बुलाने की प्रक्रिया क्या थी?
क्या कार्मिक विभाग के जरिए आदेश जारी हुआ?
क्या CEO की अनुमति ली गई?
अगर अनुमति थी तो उसका आदेश क्या था?
अगर बैठक अनिवार्य थी तो इसकी जानकारी पहले से क्यों नहीं दी गई?
और अगर करीब 50 अधिकारी-कर्मचारी बैठक में नहीं पहुंचे तो क्या उन्हें नोटिस देने से पहले इन परिस्थितियों को भी देखा गया?
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज है।
एक तरफ छुट्टी के दिन बैठक बुलाने का सवाल है...
दूसरी तरफ बैठक में गैरहाजिर रहने वालों को नोटिस...
और तीसरी तरफ GM एके अरोड़ा की कार्यशैली को लेकर उठती चर्चाएं।
अब देखना होगा कि इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के उच्च अधिकारी क्या रुख अपनाते हैं और क्या GM एके अरोड़ा की ओर से कर्मचारियों की नाराजगी और उठ रहे सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब दिया जाता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक बैठक का नहीं है...
सवाल नियम, प्रक्रिया और अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच बढ़ते भरोसे का भी है।
अगर छुट्टी के दिन बैठक बुलाने के लिए नियम हैं, तो उन नियमों का पालन होना चाहिए।
और अगर नियमों का पालन हुआ है, तो प्राधिकरण को सामने आकर पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
फिलहाल निगाहें इसी बात पर हैं कि तीन दिन में मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद यह मामला किस दिशा में जाता है—क्या कार्रवाई आगे बढ़ेगी, या फिर बैठक बुलाने की प्रक्रिया पर उठे सवालों का कोई जवाब सामने आएगा?
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