JSS University Noida के College of Pharmacy और Indian Pharmacopoeia Commission Ghaziabad के संयुक्त तत्वावधान में ANRF प्रायोजित राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। ADR Reporting, Signal Management, Benefit-Risk Assessment और Regulatory Compliance पर देशभर के 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में JSS University ने DPSRU और IPC के साथ दो MoU भी किए।
किसी मरीज के लिए दवा बीमारी से राहत की उम्मीद होती है, लेकिन क्या हर दवा हर परिस्थिति में पूरी तरह सुरक्षित होती है? दवा लेने के बाद होने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रिया यानी Adverse Drug Reaction (ADR) को समय रहते पहचानना, उसकी सही रिपोर्टिंग करना और उससे जुड़े जोखिमों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना आज स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी जरूरत बन चुका है।
इसी अहम मुद्दे को केंद्र में रखते हुए JSS University, Noida के College of Pharmacy और Indian Pharmacopoeia Commission (IPC), Ghaziabad के संयुक्त तत्वावधान में “Strengthening India’s Pharmacovigilance Ecosystem: Training on ADR Reporting, Signal Management & Regulatory Compliance” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया है।
Anusandhan National Research Foundation (ANRF), भारत सरकार के सहयोग से आयोजित यह दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 13 अगस्त 2026 से शुरू हुआ और 14 अगस्त को संपन्न हुआ। इससे पहले 12 अगस्त को प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें 52 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
दवा की सुरक्षा से जुड़ा सवाल, देशभर के विशेषज्ञ एक मंच पर
सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में देश के फार्मेसी, चिकित्सा शिक्षा, नियामकीय व्यवस्था और शोध क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल हुए।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जी.एन. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ Indian Pharmacopoeia Commission (IPC) के Secretary-cum-Scientific Director डॉ. विवेकानंदन कैलासेल्वन, DPSRU, New Delhi के Vice Chancellor प्रो. रविचंद्रन वी., JSS University के Pro-Chancellor एवं Director-TED डॉ. सुरेश भोजराज, JSS University के Advisor डॉ. संजय त्यागी तथा JSS Mahavidyapeetha के Special Officer डॉ. ललित वर्मा, IAS (Retd.) सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
वहीं College of Pharmacy के Principal डॉ. प्रवीण टी.के., Dean Academics डॉ. बी. मनोज कुमार और JSS University की Registrar डॉ. ममता टी.जी. भी उद्घाटन समारोह का हिस्सा बने।
फार्माकोविजिलेंस क्यों है इतना जरूरी?
उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दवाओं की सुरक्षा केवल दवा विकसित करने तक सीमित विषय नहीं है। किसी दवा के बाजार में आने के बाद भी उसके प्रभाव और संभावित प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की लगातार निगरानी जरूरी होती है।
मुख्य अतिथि डॉ. जी.एन. सिंह ने अपने संबोधन में Pharmacovigilance की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मरीजों की रक्षा करने और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में फार्माकोविजिलेंस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने इस क्षेत्र में बेहतर प्रशिक्षण, जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
डॉ. विवेकानंदन कैलासेल्वन ने प्रतिभागियों को Indian Pharmacopoeia Commission की ओर से अगले तीन महीनों में आयोजित किए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी।
उन्होंने छात्रों, शोधकर्ताओं और फार्मेसी क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों से इन कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने का आह्वान किया।
उनका संदेश साफ था कि Pharmacovigilance जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। इसके लिए लगातार सीखने, शोध करने और पेशेवर गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
युवाओं को जिम्मेदार फार्मेसी प्रोफेशनल बनने का संदेश
JSS University के Pro-Chancellor और Director-TED डॉ. सुरेश भोजराज ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में छात्रों को सक्षम, जिम्मेदार और समाज के प्रति समर्पित फार्मेसी स्नातक बनने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने युवा शोधकर्ताओं को Drug Discovery और Drug Development के क्षेत्र में नए और नवाचार आधारित शोध करने के लिए प्रोत्साहित किया।
साथ ही उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शोध और दवा विकास की पूरी प्रक्रिया में उच्च स्तर के Pharmacovigilance standards और Patient Safety को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
यानी नई दवा की खोज जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि वह मरीज के लिए सुरक्षित भी हो।
दो महत्वपूर्ण MoU ने बढ़ाया सहयोग का दायरा
राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह का एक बड़ा आकर्षण दो महत्वपूर्ण Memorandum of Understanding (MoU) पर हस्ताक्षर भी रहा।
पहला MoU JSS University और DPSRU, New Delhi के बीच हुआ, जबकि दूसरा JSS University और IPC, Ghaziabad के बीच हुआ।
इन समझौतों का उद्देश्य शिक्षा, शोध और पेशेवर विकास के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है।
इन MoU के जरिए दोनों संस्थानों के बीच सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और शोध गतिविधियों को आगे बढ़ाने की दिशा में नए अवसर तैयार होने की उम्मीद है।
इसी अवसर पर सम्मेलन के Souvenir का भी विमोचन किया गया।
350 से ज्यादा प्रतिभागी, कई अहम विषयों पर चर्चा
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में 350 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
इनमें अकादमिक संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र, नियामकीय एजेंसियों, फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री, शोध संस्थानों और छात्र समुदाय से जुड़े लोग शामिल हैं।
दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञ ADR Reporting, Signal Management, Benefit-Risk Assessment और Regulatory Compliance जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।
इसके अलावा Pharmacovigilance के सामने उभर रही नई चुनौतियों पर भी चर्चा होगी।
कार्यक्रम में केवल विशेषज्ञ व्याख्यान ही नहीं, बल्कि Interactive Sessions, Panel Discussion, Poster Presentations और Oral Presentations भी आयोजित किए जा रहे हैं।
इससे छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को अपने शोध और विचार विशेषज्ञों के सामने रखने का अवसर मिल रहा है।
भारत के Pharmacovigilance सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश
ANRF, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब दवाओं की सुरक्षा और मरीजों की सुरक्षा को लेकर वैज्ञानिक निगरानी की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
JSS University, Noida और Indian Pharmacopoeia Commission का यह संयुक्त प्रयास Pharmacovigilance Education, Research, Professional Capacity Building और Patient Safety को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है।
आखिरकार किसी भी दवा की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि वह बीमारी पर कितना असर करती है। उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि उसके संभावित जोखिमों को कितनी जल्दी पहचाना जाता है, उनकी रिपोर्टिंग कितनी प्रभावी है और मरीज की सुरक्षा के लिए समय रहते क्या कदम उठाए जाते हैं।
नोएडा में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए दवा की सुरक्षा से मरीज की सुरक्षा तक एक मजबूत Pharmacovigilance ecosystem तैयार करने पर केंद्रित रहा।
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