ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और MY Bharat के सहयोग से आयोजित "नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत" अभियान में विद्यार्थियों ने रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से नशे के खिलाफ जनजागरण का संदेश दिया। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी भाल चंद्र त्रिपाठी ने युवाओं से नशा मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार को ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला, जहां सैकड़ों युवाओं ने सिर्फ भाषण नहीं सुने, बल्कि खुद आगे बढ़कर यह संकल्प लिया कि वे न केवल नशे से दूर रहेंगे बल्कि समाज को भी इस बुराई से बचाने के लिए जागरूक करेंगे। अवसर था शारदा यूनिवर्सिटी में आयोजित "नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत" कार्यक्रम का, जिसे युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा MY Bharat के सहयोग से आयोजित किया गया।
आज देश का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय वर्ग युवा है। यही युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत भी हैं और सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी। ऐसे समय में जब नशे की लत देश के कई राज्यों में सामाजिक चुनौती बन चुकी है, तब शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि समाज निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी सोच के साथ आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर सामाजिक जिम्मेदारी की भावना जगाने का प्रयास था।

कार्यक्रम का शुभारंभ गौतम बुद्ध नगर के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) भाल चंद्र त्रिपाठी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद पूरे सभागार में मौजूद विद्यार्थियों ने नशा मुक्त भारत की शपथ ली। विद्यार्थियों ने यह संकल्प दोहराया कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगे, अपने मित्रों और परिवार को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेंगे तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
जब नुक्कड़ नाटक ने झकझोर दिया हर दर्शक को
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली हिस्सा शारदा यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। इस प्रस्तुति में दिखाया गया कि किस प्रकार नशे की लत केवल एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करती है।
नाटक में बेरोजगारी, पारिवारिक तनाव, अपराध, आर्थिक बर्बादी और मानसिक स्वास्थ्य जैसी समस्याओं को नशे से जोड़ते हुए यह संदेश दिया गया कि यदि समय रहते जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक दिखाई देगा।
दर्शकों ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे सामाजिक बदलाव की दिशा में प्रभावी प्रयास बताया।
प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं ने रखे अपने विचार
कार्यक्रम को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा गया। युवाओं की रचनात्मकता को मंच देने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
इनमें 'यूथ डायलॉग फॉर चेंज' विषय पर वाद-विवाद एवं भाषण प्रतियोगिता, 'वर्ड्स फॉर चेंज' स्लोगन लेखन, 'कलर्स ऑफ चेंज' पेंटिंग प्रतियोगिता, थीम आधारित नृत्य, नुक्कड़ नाटक, 'वॉइसेज़ फॉर चेंज' स्लैम पोएट्री, संगीत, रील मेकिंग और शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता शामिल थीं।
हर प्रस्तुति का उद्देश्य एक ही था—युवाओं को यह समझाना कि नशे से दूर रहकर ही स्वस्थ, सुरक्षित और विकसित समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शारदा यूनिवर्सिटी के डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके युवा होते हैं। यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ते हैं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं, तो समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सामाजिक रूप से जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को समाज की चुनौतियों को समझने और उनके समाधान में भागीदार बनने का अवसर प्रदान करते हैं।
'नशा मुक्त भारत' केवल सरकारी अभियान नहीं
MY Bharat के डिप्टी डायरेक्टर शिवेंद्र सिंह ने कार्यक्रम में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।
उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत केवल सरकार का अभियान नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब युवा स्वयं इस मुहिम का हिस्सा बनते हैं और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करते हैं, तभी इसका वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आज के विद्यार्थी ही विकसित भारत की नींव रखेंगे और यह संदेश अपने परिवार, मित्रों तथा समाज तक पहुंचाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं रह गई है। इसका सीधा असर शिक्षा, रोजगार, कानून-व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक ताने-बाने पर भी पड़ता है। यही कारण है कि सरकार लगातार "नशा मुक्त भारत अभियान" के माध्यम से युवाओं को जागरूक करने का प्रयास कर रही है।
ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी इस अभियान को और अधिक प्रभावी बना सकती है।
सामूहिक संकल्प से ही मिलेगा समाधान
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शांति नारायणन ने किया। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट (डॉ.) यशोधरा राज, ऋषांक अग्रवाल, आशीष, रचना बंसल सहित विभिन्न विभागों के डीन, फैकल्टी सदस्य, स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन केवल औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ नहीं हुआ, बल्कि इस विश्वास के साथ हुआ कि यदि देश का युवा जागरूक होगा, तो नशे जैसी सामाजिक बुराई को हराया जा सकता है।
नशा मुक्त भारत का सपना केवल कानूनों से पूरा नहीं होगा। इसके लिए परिवार, समाज, शिक्षण संस्थान और सबसे बढ़कर युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जब युवा स्वयं बदलाव का संकल्प लेते हैं, तभी विकसित भारत का सपना वास्तविकता में बदल सकता है।
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