ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी ने अंतिम वर्ष के नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए ‘कैंपस टू केयर – इंडस्ट्री रेडी’ कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यस्थल की परिस्थितियों, अस्पतालों की कार्यप्रणाली, पेशेवर व्यवहार और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए तैयार करना था। इस दौरान विद्यार्थियों को मॉक इंटरव्यू, ग्रुप डिस्कशन, करियर काउंसलिंग और सॉफ्ट स्किल्स से जुड़ा प्रशिक्षण दिया गया।
आज के दौर में केवल डिग्री हासिल करना ही सफलता की गारंटी नहीं माना जाता। बदलते समय के साथ उद्योगों की अपेक्षाएं भी बदल रही हैं। खासकर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ संवाद कौशल, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी ने अंतिम वर्ष के नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए 'कैंपस टू केयर – इंडस्ट्री रेडी' कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था, ताकि वे पेशेवर जीवन की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें।
यह कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि इसने यह भी साबित किया कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकती।

स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। अस्पतालों, मेडिकल संस्थानों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित और कुशल नर्सिंग पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
इसी को ध्यान में रखते हुए शारदा यूनिवर्सिटी ने इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को तैयार किया, ताकि विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अस्पतालों की कार्यप्रणाली, मरीजों के साथ व्यवहार, आपातकालीन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता और पेशेवर आचरण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया।
उन्हें मॉक इंटरव्यू, ग्रुप डिस्कशन, इंटरैक्टिव सेशन और करियर काउंसलिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया।
इस दौरान छात्रों को सिखाया गया कि किस प्रकार एक प्रभावशाली रिज्यूमे तैयार किया जाता है, इंटरव्यू के दौरान आत्मविश्वास के साथ अपनी बात कैसे रखी जाती है और पेशेवर माहौल में किस प्रकार बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।
इसके अलावा विद्यार्थियों को प्रभावी संचार कौशल, प्रोफेशनल ग्रूमिंग, टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

शारदा स्कूल ऑफ नर्सिंग साइंस एंड रिसर्च के डीन प्रोफेसर (डॉ.) आर. श्रीराजा कुमार ने इस अवसर पर कहा कि नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और जिम्मेदारी से जुड़ा क्षेत्र है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी माहौल में केवल विषय से संबंधित जानकारी ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, बेहतर संवाद कौशल और पेशेवर व्यवहार का होना भी बेहद जरूरी है।
उनके अनुसार, 'कैंपस टू केयर – इंडस्ट्री रेडी' कार्यक्रम विद्यार्थियों को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
करियर निर्माण पर विशेष ध्यान
शारदा स्किल्स एंड करियर सर्विसेज के निदेशक धीरज शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को एक सफल पेशेवर के रूप में विकसित करना भी है।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को अस्पतालों के कार्य वातावरण, इंटरव्यू प्रक्रिया और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की चुनौतियों के लिए तैयार किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इनमें डॉ. सुपर्णा कपूर, डॉ. मिनाती पांजा, डॉ. परिचर्ला वरप्रसाद, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट डॉ. आशा वर्गीज, डॉ. क्रिस्टा मैथ्यू, डॉ. अनामिका चरण, डॉ. फैम अहमद, डॉ. चंद्रभानु, डॉ. सुप्रवा बेहेरा और डॉ. नाजिया परवीन प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के डीन, फैकल्टी सदस्य, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी मौजूद रहे।
बदलते दौर में नई सोच की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और अधिक बढ़ेगी। ऐसे में केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक कौशल भी सफलता का आधार बनेंगे।
शारदा यूनिवर्सिटी की यह पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे विद्यार्थियों को न केवल अपने करियर को नई दिशा देने में मदद मिलेगी, बल्कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से निभा सकेंगे।
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