उत्तर प्रदेश में छात्र-छात्राओं के लिए बड़ा ऐलान हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4,60,559 विद्यार्थियों के बैंक खातों में ₹148.04 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि DBT के जरिए ट्रांसफर की। इसी कार्यक्रम में 50 हजार बेटियों को स्कूटी देने की योजना का भी जिक्र हुआ। सीएम ने छात्रों से कहा कि छात्रवृत्ति का पैसा किताबों और पढ़ाई पर खर्च करें, चाट-गुटखे में नहीं।
उत्तर प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं के लिए 3 अक्टूबर का दिन राहत और उम्मीद लेकर आया। राजधानी लखनऊ के लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4,60,559 विद्यार्थियों के बैंक खातों में ₹148.04 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि सीधे ट्रांसफर की। सरकार के मुताबिक यह राशि डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाई गई।
लेकिन कार्यक्रम सिर्फ छात्रवृत्ति तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने छात्रों को पढ़ाई और पैसे के इस्तेमाल को लेकर सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति की रकम का इस्तेमाल अच्छी किताबें खरीदने, पढ़ाई करने और लाइब्रेरी में समय देने के लिए किया जाना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने छात्रों से मजाकिया लेकिन स्पष्ट अंदाज में कहा कि इस पैसे को चाट या गुटखा खाने में बर्बाद न करें।

छात्रवृत्ति के साथ फीस रीइम्बर्समेंट भी
सरकार की व्यवस्था के तहत छात्रवृत्ति के साथ शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि भी विद्यार्थियों के खातों में भेजी गई। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक इस वितरण में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के विद्यार्थी शामिल हैं। इनमें अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,23,615, अनुसूचित जाति के 1,59,959, सामान्य वर्ग के 38,084 और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थी शामिल हैं। इन वर्गों के लिए क्रमशः करीब ₹60.01 करोड़, ₹64.54 करोड़, ₹11.43 करोड़ और ₹12.06 करोड़ की राशि बताई गई है।
यानी सरकार का दावा है कि छात्रवृत्ति की प्रक्रिया को ज्यादा सीधे और पारदर्शी तरीके से लागू किया जा रहा है, ताकि बीच की प्रक्रिया में देरी या कटौती की गुंजाइश कम हो।
योगी का पिछली सरकार पर हमला
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले की छात्रवृत्ति व्यवस्था को लेकर पिछली सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिलती थी और विशेष रूप से एससी-एसटी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति को लेकर भी अनियमितताओं का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद पिछली अवधि की बकाया छात्रवृत्ति भी विद्यार्थियों तक पहुंचाने का काम किया गया। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में डीबीटी को पारदर्शिता का माध्यम बताया। ये आरोप मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए हैं; इन पर संबंधित विपक्षी दलों की अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया हो सकती है।
राजभर और संजीव कुमार गोंड का भी किया जिक्र
भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर उन्हें छात्र जीवन में समय पर छात्रवृत्ति मिलती तो वह पढ़ाई में आगे बढ़ते और शायद नेता बनने के बजाय होनहार छात्र बनते।
योगी ने राजभर के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में मेहनत की, जनता की आवाज बने और बाद में मंत्री बने। मुख्यमंत्री ने उनके संघर्ष के दिनों में थ्री-व्हीलर और टैक्सी चलाने का भी उल्लेख किया।
इसी क्रम में उन्होंने मंत्री संजीव कुमार गोंड का भी उदाहरण दिया और उनके संघर्षपूर्ण जीवन का जिक्र किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक संघर्ष के बाद जनता ने उन्हें चुना और वह आज सरकार का हिस्सा हैं।
50 हजार बेटियों को जल्द मिलेगी स्कूटी
छात्रवृत्ति के साथ कार्यक्रम में बेटियों के लिए भी बड़ी घोषणा चर्चा में रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 50 हजार बेटियों को जल्द स्कूटी दी जाएगी।

इससे पहले सरकार रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को मंजूरी दे चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार योजना का लक्ष्य मेधावी स्नातक छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराना है और पहले चरण में करीब 50 हजार छात्राओं को लाभ देने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने बेटियों की शिक्षा के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेटियों को जन्म से लेकर ग्रेजुएशन तक पढ़ाई के लिए चरणबद्ध आर्थिक सहायता दी जा रही है। साथ ही उन्होंने युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराने की योजना का भी जिक्र किया।
'पैसा पढ़ाई में लगाइए, चाट-गुटखे में नहीं'
कार्यक्रम का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा मुख्यमंत्री की छात्रों से की गई अपील रही।
योगी ने कहा कि बैंक खाते में आने वाली छात्रवृत्ति सिर्फ खर्च करने के लिए पैसा नहीं है, बल्कि इसे अपने भविष्य में निवेश की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने छात्रों से अच्छी किताबें खरीदने और अपना बुक बैंक बनाने की सलाह दी।
उनका कहना था कि किताबें और पढ़ाई का लाभ सिर्फ एक छात्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के लिए भी धरोहर बन सकता है।

एडमिशन के बाद छात्रवृत्ति देने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने छात्रवृत्ति की समय-सारिणी को भी व्यवस्थित किया है। छात्र आम तौर पर अप्रैल, मई, जून और जुलाई में एडमिशन लेते हैं और एडमिशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रवृत्ति भेजने की व्यवस्था की गई है।
सरकार का कहना है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई आर्थिक कारणों से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
यूपी बोर्ड परीक्षा को लेकर भी बड़ा दावा
योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का जिक्र करते हुए यूपी बोर्ड परीक्षाओं का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अब बोर्ड परीक्षा कई महीनों तक चलने के बजाय करीब 15 दिनों में पूरी हो जाती है और लगभग एक महीने में परिणाम जारी किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार का लक्ष्य केवल छात्रवृत्ति देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है।
ऐसे में लोक भवन से निकला संदेश सिर्फ ₹148 करोड़ की छात्रवृत्ति तक सीमित नहीं है। एक तरफ लाखों छात्रों के खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाने की बात है, दूसरी तरफ 50 हजार बेटियों के लिए स्कूटी का ऐलान है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि छात्रवृत्ति और स्कूटी से जुड़ी घोषणाएं जमीन पर किस तरह और कितनी तेजी से लागू होती हैं।
फिलहाल मुख्यमंत्री का छात्रों के लिए संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—सरकार की ओर से मिलने वाली मदद को अपने भविष्य को मजबूत करने में लगाइए… क्योंकि आज की किताब, आज की पढ़ाई और आज की मेहनत ही कल की दिशा तय कर सकती है।
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