चरैवेति फाउंडेशन ने अपने सामाजिक सरोकारों के साथ एक वर्ष का सफर पूरा किया। फाउंडेशन ने सात स्कूलों को गोद लेकर बच्चों की शिक्षा, प्रोत्साहन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के लिए कई पहल कीं। वर्षभर में बच्चों को स्टेशनरी, मेडल, स्वेटर, स्कूल ड्रेस और पुस्तकें उपलब्ध कराने के साथ पौधरोपण, चरैवेति वाटिका, तिरंगा यात्रा, प्रतियोगिताओं और शिक्षा जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
एक साल का सफर… सात स्कूल… और सैकड़ों बच्चों के सपनों को संवारने की कोशिश। चरैवेति फाउंडेशन ने सामाजिक सरोकारों की दिशा में काम करते हुए अपना पहला वर्ष पूरा कर लिया है। इस मौके पर फाउंडेशन की ओर से सभी सदस्यों, सहयोगियों और उन लोगों के प्रति आभार जताया गया, जिन्होंने संस्था को आगे बढ़ाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
एक वर्ष के इस सफर में फाउंडेशन ने शिक्षा को केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय बच्चों के आत्मविश्वास, प्रतिभा, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सामाजिक जुड़ाव को भी अपने अभियान का हिस्सा बनाया। फाउंडेशन की ओर से सात स्कूलों को गोद लिया गया है और इन स्कूलों में वर्षभर अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया।

बच्चों को प्रोत्साहन से शुरू हुई पहल
चरैवेति फाउंडेशन की पहल में सबसे महत्वपूर्ण स्थान बच्चों की शिक्षा और उनके उत्साह को बढ़ाने का रहा। स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्टेशनरी उपलब्ध कराई गई। परीक्षा परिणाम आने के बाद कक्षा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वाले बच्चों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल देकर सम्मानित किया गया।
इस पहल का उद्देश्य सिर्फ अच्छे अंक लाने वाले बच्चों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि दूसरे विद्यार्थियों को भी मेहनत और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना रहा।
कहीं स्वेटर तो कहीं स्कूल ड्रेस बनी मदद
फाउंडेशन ने बच्चों की जरूरतों को देखते हुए अलग-अलग स्कूलों में आवश्यक सहयोग भी उपलब्ध कराया। अमेठी के स्कूल में बच्चों को ठंड से बचाने के लिए स्वेटर वितरित किए गए। वहीं प्रतापगढ़ के स्कूल के बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस की व्यवस्था की गई।
इन प्रयासों के पीछे यही सोच रही कि आर्थिक या संसाधनों की कमी बच्चों की पढ़ाई और स्कूल जाने की राह में बाधा न बने।

250 से ज्यादा पौधों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
चरैवेति फाउंडेशन ने शिक्षा के साथ पर्यावरण को भी अपनी गतिविधियों में प्रमुख स्थान दिया। जून और जुलाई के दौरान फाउंडेशन से जुड़े सभी स्कूलों में मिलाकर 250 से अधिक पौधे लगाए गए।
पौधरोपण के साथ बच्चों को पर्यावरण संरक्षण और पेड़-पौधों की देखभाल के महत्व से जोड़ने की कोशिश की गई। कुछ स्कूलों में 'चरैवेति वाटिका' भी तैयार की गई है, जबकि बाकी स्कूलों में इसके निर्माण का काम जारी है।
यानी पहल केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल परिसर को हराभरा बनाने और बच्चों को प्रकृति से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान
बच्चों के भविष्य को आकार देने वाले शिक्षकों को भी इस अभियान में सम्मान दिया गया। शिक्षक दिवस के अवसर पर कुछ स्कूलों में अध्यापकों को सम्मानित किया गया। फाउंडेशन का मानना है कि बच्चों के विकास में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और उनके योगदान को प्रोत्साहित करना भी समाज की जिम्मेदारी है।

तिरंगा यात्रा से गांवों तक पहुंचा देशभक्ति का संदेश
अगस्त महीने में फाउंडेशन के बच्चे 'हर घर तिरंगा' अभियान से भी जुड़े। बच्चों ने अपने गांव को अभियान से जोड़ने के उद्देश्य से तिरंगा यात्रा निकाली। इस दौरान बच्चों में देशभक्ति की भावना के साथ सामूहिक भागीदारी और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
रंगोली और कला प्रतियोगिताओं से निखरी प्रतिभा
बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने के लिए अलग-अलग स्कूलों में विभिन्न प्रतियोगिताएं भी कराई गईं। कहीं रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गई तो कहीं कला प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
ऐसी गतिविधियों के जरिए बच्चों के आत्मविश्वास और मनोबल को बढ़ाने की कोशिश की गई, ताकि वे पढ़ाई के साथ अपनी दूसरी प्रतिभाओं को भी पहचान सकें।
स्कूलों में लाइब्रेरी के लिए जुटाई गईं किताबें
शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाने के लिए कुछ स्कूलों में लाइब्रेरी की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी पहल हुई। इसके तहत पुस्तकों को एकत्रित कर स्कूलों को उपलब्ध कराया गया।
इसका उद्देश्य बच्चों के बीच पाठ्यक्रम की किताबों से आगे पढ़ने की आदत विकसित करना और स्कूलों में अध्ययन के लिए बेहतर माहौल तैयार करना रहा।

'शिक्षा कितनी जरूरी है' पर लगातार जागरूकता
चरैवेति फाउंडेशन की गतिविधियों में शिक्षा के महत्व को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी शामिल रहे। समय-समय पर बच्चों के लिए 'जीवन में शिक्षा कितनी आवश्यक है' विषय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के महत्व, भविष्य की संभावनाओं और पढ़ाई के प्रति गंभीरता को समझाने का प्रयास किया गया।
मिड डे मील में मिला अलग अनुभव
फाउंडेशन ने कुछ स्कूलों में बच्चों के लिए मिड डे मील की व्यवस्था भी की। बच्चों के लिए यह रोजमर्रा की दिनचर्या से अलग अनुभव रहा। फाउंडेशन की ओर से इसे बच्चों के साथ जुड़ने और उन्हें एक अलग तरह की खुशी देने की कोशिश के रूप में देखा गया।
आगे भी जारी रहेगा सफर
एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर चरैवेति फाउंडेशन ने अपने सभी सदस्यों और सहयोगियों के प्रति आभार जताया। संस्था की ओर से कहा गया कि सभी लोगों के सहयोग ने फाउंडेशन को लगातार काम करने और आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण मदद की है।
सात स्कूलों से शुरू हुआ यह सफर अब एक ऐसे प्रयास की तस्वीर पेश कर रहा है, जिसमें शिक्षा के साथ बच्चों का आत्मविश्वास, पर्यावरण, रचनात्मकता, देशभक्ति और सामाजिक चेतना भी केंद्र में है।
अब इस एक साल के अनुभव के बाद फाउंडेशन की उम्मीद है कि आगे भी समाज के लोगों का सहयोग मिलता रहेगा और चरैवेति की यह पहल अधिक बच्चों तक पहुंच सकेगी। क्योंकि किसी बच्चे के हाथ में सिर्फ एक किताब या पौधा देना छोटा कदम हो सकता है, लेकिन वही कदम उसके भविष्य और समाज की दिशा बदलने की शुरुआत बन सकता है।
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