ग्रेटर नोएडा स्थित जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च में विद्यार्थियों को जिम्मेदार और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व की सीख देने के लिए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक कल्याण, आर्थिक स्थिरता और ‘पीपल, प्लैनेट, प्रॉफिट’ के सिद्धांत पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के दौरान संस्थान और स्विट्जरलैंड के ह्यूमैनिस्टिक मैनेजमेंट नेटवर्क के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।
क्या किसी कारोबारी संस्थान की सफलता केवल मुनाफे से तय होनी चाहिए, या समाज और पर्यावरण के प्रति उसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है? आज के वैश्विक कारोबारी परिदृश्य में यह सवाल लगातार अहम होता जा रहा है। इसी सोच को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (GLBIMR), ग्रेटर नोएडा में ‘नेक्स्ट जनरेशन लीडरशिप’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का आयोजन किया गया।
संस्थान के इंटरनेशनल रिलेशंस सेल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नेतृत्व के ऐसे दृष्टिकोण से परिचित कराया गया, जिसमें व्यावसायिक सफलता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को भी महत्व दिया गया। कार्यक्रम का संचालन स्विट्जरलैंड स्थित ह्यूमैनिस्टिक मैनेजमेंट नेटवर्क के प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. अर्न्स्ट वोन किमाकोविट्ज़ ने किया।
इस पाठ्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करना, नेतृत्व को उद्देश्य से जोड़ना और विभिन्न हितधारकों के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत करना था।
पर्यावरण संकट से संसाधनों के न्यायसंगत वितरण तक हुई चर्चा
दो दिवसीय पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने कई ऐसी वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया, जिनका प्रभाव समाज, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। इनमें पर्यावरण संकट, संसाधनों का न्यायसंगत वितरण और सामाजिक कल्याण जैसे विषय प्रमुख रहे।

सत्रों में इस बात पर जोर दिया गया कि आधुनिक नेतृत्व को केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहना चाहिए। किसी भी व्यावसायिक निर्णय का प्रभाव कर्मचारियों, ग्राहकों, समाज और पर्यावरण पर पड़ता है। इसलिए भावी नेतृत्वकर्ताओं के लिए जरूरी है कि वे निर्णय लेते समय व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय परिणामों को भी समझें।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह सोचने का अवसर दिया कि व्यावसायिक संस्थान किस तरह अपने विकास के साथ समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे सकते हैं। इसका उद्देश्य केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार निर्णय लेने की व्यावहारिक समझ प्रदान करना भी था।
‘पीपल, प्लैनेट, प्रॉफिट’ बना कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण
पाठ्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में ‘ट्रिपल बॉटम लाइन’ फ्रेमवर्क शामिल रहा, जिसे ‘पीपल, प्लैनेट और प्रॉफिट’ यानी लोग, पृथ्वी और लाभ के सिद्धांत के रूप में समझाया गया।
इस अवधारणा के तहत विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी व्यवसाय की सफलता का आकलन केवल उसके वित्तीय प्रदर्शन से नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण पर उसके प्रभाव से भी किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने टीमों में काम करते हुए ऐसे नवोन्मेषी व्यावसायिक विचार प्रस्तुत किए, जिनमें सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया।
दूसरे दिन आयोजित समूह प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, सहयोगात्मक भावना और व्यावहारिक सोच सामने आई। इन गतिविधियों के माध्यम से उन्हें टीमवर्क, समस्या समाधान और सामूहिक निर्णय लेने के महत्व को समझने का अवसर मिला।
स्विट्जरलैंड के ह्यूमैनिस्टिक मैनेजमेंट नेटवर्क के साथ हुआ समझौता
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पड़ाव जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च और स्विट्जरलैंड स्थित ह्यूमैनिस्टिक मैनेजमेंट नेटवर्क के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होना रहा।
इस पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना और मूल्य-आधारित, उद्देश्यपूर्ण तथा जिम्मेदार नेतृत्व को प्रोत्साहित करना है। यह साझेदारी विद्यार्थियों को वैश्विक प्रबंधन दृष्टिकोण और नेतृत्व से जुड़ी नई अवधारणाओं से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न और पाठ्यक्रम पूर्णता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

पंकज अग्रवाल और डॉ. सपना राकेश ने जिम्मेदार नेतृत्व पर दिया जोर
इस अवसर पर जीएल बजाज ग्रुप के वाइस चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में कॉर्पोरेट और सामाजिक जगत को ऐसे युवा नेतृत्वकर्ताओं की आवश्यकता है, जो व्यावसायिक सफलता के साथ समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें।
उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करने और उन्हें दूरदर्शी, संवेदनशील तथा जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वहीं, जीएलबीआईएमआर की डायरेक्टर डॉ. सपना राकेश ने कहा कि नेतृत्व केवल पद या अधिकार तक सीमित नहीं है। यह जिम्मेदारी निभाने, सीमाओं से परे सहयोग करने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता भी है।
उन्होंने डॉ. अर्न्स्ट वोन किमाकोविट्ज़ के मार्गदर्शन में आयोजित पाठ्यक्रम और ह्यूमैनिस्टिक मैनेजमेंट नेटवर्क के साथ हुए समझौते को विद्यार्थियों को उद्देश्यपूर्ण एवं जिम्मेदार नेतृत्व के लिए प्रेरित करने वाली पहल बताया।
व्यावसायिक उत्कृष्टता के साथ सकारात्मक बदलाव का संदेश
जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को वैश्विक प्रबंधन परिदृश्य, नवीन विचारों और व्यावहारिक नेतृत्व कौशल से परिचित कराने के संस्थान के प्रयासों का हिस्सा है।
दो दिवसीय पाठ्यक्रम ने इस विचार को रेखांकित किया कि भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को आर्थिक लक्ष्यों के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय हितों पर भी ध्यान देना होगा।
कार्यक्रम का मूल संदेश स्पष्ट रहा—उद्देश्य के साथ नेतृत्व करें, जिम्मेदारी से सोचें और सकारात्मक एवं सार्थक बदलाव लाएं।
COMMENTS