ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज में विश्व एंडोडॉन्टिक दिवस पर ‘एंडो कर्व’ कार्यक्रम हुआ। विशेषज्ञों ने घुमावदार रूट कैनाल के आधुनिक उपचार और क्लिनिकल तकनीकों पर चर्चा की।
दांतों की जड़ों में मौजूद घुमावदार रूट कैनाल का उपचार डेंटल साइंस के उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां तकनीकी सटीकता, अनुभव और सावधानी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी विषय पर विद्यार्थियों और डेंटल विशेषज्ञों को आधुनिक उपचार पद्धतियों से अवगत कराने के उद्देश्य से शारदा यूनिवर्सिटी के शारदा स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज में विश्व एंडोडॉन्टिक दिवस के अवसर पर विशेष अकादमिक कार्यक्रम ‘एंडो कर्व: मास्टरिंग द आर्ट एंड साइंस ऑफ कर्व्ड कैनाल मैनेजमेंट’ आयोजित किया गया।
डिपार्टमेंट ऑफ कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडॉन्टिक्स की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में घुमावदार रूट कैनाल के प्रबंधन, उपचार के दौरान आने वाली चुनौतियों और दांतों की प्राकृतिक संरचना को सुरक्षित रखते हुए बेहतर उपचार करने की तकनीकों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और फैकल्टी सदस्यों के क्लिनिकल ज्ञान को बढ़ाना तथा उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों से परिचित कराना था।
डॉ. अनिल धींगरा ने साझा किया विशेषज्ञ अनुभव
कार्यक्रम में डीजे स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज एंड रिसर्च के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल धींगरा मुख्य अतिथि और विशेषज्ञ वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने घुमावदार रूट कैनाल के उपचार में तकनीकी दक्षता, धैर्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।

डॉ. अनिल धींगरा ने कहा कि घुमावदार रूट कैनाल का उपचार एंडोडॉन्टिक्स के महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। ऐसे मामलों में कैनाल की प्राकृतिक बनावट को सुरक्षित रखते हुए उसकी सही तरीके से सफाई और शेपिंग करना जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार पद्धतियों की जानकारी डेंटल प्रोफेशनल्स को बेहतर क्लिनिकल निर्णय लेने में मदद करती है।
उन्होंने ऐसे अकादमिक आयोजनों को ज्ञान साझा करने, नई तकनीकों को समझने और उपचार की गुणवत्ता बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण मंच बताया।
आधुनिक क्लिनिकल तकनीकों पर डीन ने दिया जोर
इस अवसर पर शारदा स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज के डीन डॉ. हेमंत सहानी ने डेंटल एजुकेशन में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण की जरूरत पर जोर दिया।
डॉ. सहानी के अनुसार, विद्यार्थियों और फैकल्टी को आधुनिक क्लिनिकल तकनीकों की जानकारी देने के साथ उनका सही इस्तेमाल सिखाना भी जरूरी है। ऐसे कार्यक्रम उन्हें नई प्रक्रियाओं को समझने, अपने उपचार कौशल को विकसित करने और क्लिनिकल अनुभव साझा करने का अवसर देते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास विद्यार्थियों को वैज्ञानिक और व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराना है, ताकि वे भविष्य में मरीजों के उपचार के दौरान उसका प्रभावी इस्तेमाल कर सकें। इस तरह की शैक्षणिक पहल बेहतर डेंटल एजुकेशन और मरीजों की देखभाल के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को मजबूत करती हैं।
घुमावदार रूट कैनाल के उपचार की बारीकियों पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान घुमावदार रूट कैनाल की पहचान से लेकर उनके उपचार की विभिन्न प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि जड़ों की प्राकृतिक बनावट और घुमाव को ध्यान में रखते हुए उपचार की योजना बनाना महत्वपूर्ण होता है।

चर्चा में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषय शामिल रहे:
घुमावदार रूट कैनाल की सही पहचान और उनकी बनावट को समझना।
उपचार के दौरान कैनाल को सावधानीपूर्वक नेगोशिएट करना।
शेपिंग और सफाई के समय दांतों की प्राकृतिक संरचना को सुरक्षित रखना।
जटिल क्लिनिकल मामलों में उपयुक्त तकनीक का चयन करना।
आधुनिक प्रक्रियाओं और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर उपचार संबंधी निर्णय लेना।
इस अकादमिक आयोजन ने डेंटल विद्यार्थियों और फैकल्टी सदस्यों को एंडोडॉन्टिक्स से जुड़ी आधुनिक प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल करने तथा अपने क्लिनिकल अनुभवों को साझा करने का अवसर दिया।
विभागीय फैकल्टी की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के आयोजन में डिपार्टमेंट ऑफ कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडॉन्टिक्स की विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा काबरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा प्रोफेसर डॉ. एकता चौधरी, डॉ. रमन मिश्रा, डॉ. शशांक अग्रवाल, डॉ. रितु शर्मा, डॉ. सुप्रिया सिंह, डॉ. फरहीन खान, डॉ. ज्योति यादव और डॉ. टी. प्रसन्ना ने भी आयोजन में योगदान दिया।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और फैकल्टी सदस्यों को दांतों की जड़ों से संबंधित जटिल उपचार प्रक्रियाओं को समझने, नवीन तकनीकों के प्रति अपनी जानकारी बढ़ाने और बेहतर क्लिनिकल अभ्यास की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।
शारदा स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज में आयोजित यह पहल डेंटल शिक्षा में अकादमिक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल के बीच तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रही।
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