ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के 24 घंटे के हैकाथॉन ‘सस्टेन-ए-थॉन 2.0’ में देश के 48 से अधिक विश्वविद्यालयों की 70 से ज्यादा टीमों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में शारदा यूनिवर्सिटी की टीम वात्सल्य ने पहला स्थान हासिल कर ₹50,000 का नकद पुरस्कार जीता। AI, हेल्थटेक, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक, कृषि और स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों में छात्रों ने तकनीक आधारित समाधान प्रस्तुत किए।
क्या छात्रों के नए विचार वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान बन सकते हैं? क्या किसी कॉलेज प्रोजेक्ट को भविष्य के सफल स्टार्टअप में बदला जा सकता है? ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन ‘सस्टेन-ए-थॉन 2.0’ में देशभर से आए युवा प्रतिभागियों ने इन सवालों के जवाब अपने तकनीकी नवाचारों के जरिए देने की कोशिश की।
शारदा यूनिवर्सिटी ने 24 घंटे तक चले इस हैकाथॉन का सफल आयोजन किया, जिसमें 48 से अधिक विश्वविद्यालयों की 70 से ज्यादा टीमों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन शारदा स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग साइंस एंड इंजीनियरिंग (SSCSE) के कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग ने किया। इसका उद्देश्य छात्रों को नए विचार विकसित करने, उद्योग विशेषज्ञों से सीखने और अपने प्रोटोटाइप को भविष्य के उद्यमों में बदलने के लिए प्रोत्साहित करना था।
सात तकनीकी क्षेत्रों में छात्रों ने दिखाया हुनर
‘आइडिएट, इनोवेट, इम्पैक्ट’ यानी सोचें, नवाचार करें और प्रभाव डालें की थीम पर आधारित इस हैकाथॉन में सात प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया।
इनमें AI, डेटा साइंस और इंटेलिजेंट ऑटोमेशन; मेडटेक, बायोटेक और हेल्थटेक; स्मार्ट सिटी और शहरी विकास; साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक; कृषि, फूडटेक और ग्रामीण विकास; ब्लॉकचेन और फिनटेक; तथा विविध/ओपन इनोवेशन शामिल रहे।

प्रतिभागियों ने वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तकनीक आधारित समाधान विकसित किए। इसके बाद उन्होंने शिक्षाविदों और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स की जूरी के सामने अपने विचार और प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता के दौरान प्रतिष्ठित कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया और उनके प्रोजेक्ट पर व्यावहारिक फीडबैक साझा किया। इससे उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने का अवसर मिला।
टीम वात्सल्य ने मारी बाजी, ₹50,000 का पुरस्कार
प्रतियोगिता के अंतिम परिणामों में शारदा यूनिवर्सिटी की टीम वात्सल्य ने पहला स्थान हासिल किया। टीम को ₹50,000 का नकद पुरस्कार दिया गया।
नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर विमेन की टीम वेलोरा दूसरे स्थान पर रही और उसे ₹30,000 का पुरस्कार मिला। वहीं, शारदा यूनिवर्सिटी की टीम एजेंटिक लैब ने तीसरा स्थान प्राप्त कर ₹20,000 जीते।
शीर्ष तीन स्थानों के अलावा विभिन्न तकनीकी श्रेणियों में भी विजेता टीमों का चयन किया गया। उनके नाम इस प्रकार हैं:
कृषि, फूडटेक और ग्रामीण विकास: टीम कृषिवीर — शारदा यूनिवर्सिटी।
ब्लॉकचेन और फिनटेक: टीम एपेक्स एल्गोरिदम — गलगोटियास कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी।
साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक: टीम केओस — मानव रचना यूनिवर्सिटी।
AI, डेटा साइंस और इंटेलिजेंट ऑटोमेशन: टीम फेरोक्स — शारदा यूनिवर्सिटी।

मेडटेक, बायोटेक और हेल्थटेक: टीम मेडिसोल — शारदा यूनिवर्सिटी।
स्मार्ट सिटी और शहरी विकास: टीम जलएक्स — एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा।
विविध/ओपन इनोवेशन: टीम एपेक्स — जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट।
इन परिणामों में शारदा यूनिवर्सिटी की कई टीमों की सफलता भी सामने आई, जबकि अन्य संस्थानों के प्रतिभागियों ने अलग-अलग तकनीकी श्रेणियों में अपनी क्षमता प्रदर्शित की।
10 से अधिक विचारों को मिल सकता है इनक्यूबेशन सपोर्ट
हैकाथॉन का एक अहम पहलू केवल पुरस्कार जीतना नहीं, बल्कि छात्रों के विचारों को आगे बढ़ाने का अवसर भी रहा। आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता में सामने आए 10 से अधिक बेहतरीन विचारों को सहयोगी संगठनों के माध्यम से इनक्यूबेशन सपोर्ट मिल सकता है।
इस सहायता से चयनित प्रतिभागियों को अपने प्रोटोटाइप को बेहतर बनाने और उद्यमिता के अवसर तलाशने में मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, यह सहयोग संभावित है और इसे अंतिम रूप दिए जाने की जानकारी अलग से सामने आनी बाकी है।
कुलपति ने सतत विकास और नवाचार पर दिया जोर
इस अवसर पर शारदा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) सिबराम खारा ने सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘सस्टेन-ए-थॉन 2.0’ की सफलता दर्शाती है कि विश्वविद्यालय नवाचार, सहयोग और उद्यमिता की सोच को बढ़ावा देने वाले राष्ट्रीय मंच के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।

उनके अनुसार, देशभर के छात्रों, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर युवा इनोवेटर्स को ऐसे समाधान विकसित करने का अवसर दिया गया, जिनका वास्तविक दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, कार्यक्रम ने रचनात्मक विचारों को टिकाऊ उद्यमों में बदलने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया।
आयोजन समिति और टीम का रहा अहम योगदान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संचालन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति में प्रो. (डॉ.) गीता गणेशन, प्रो. (डॉ.) बत्री कृष्णन और प्रो. (डॉ.) सुदीप वार्ष्णेय शामिल रहे।
डॉ. रजनीश कुमार सिंह और प्रो. (डॉ.) जयंत शेखर ने कार्यक्रम के संयोजक के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। इसके अतिरिक्त प्रो. (डॉ.) अजय श्रीराम कुशवाहा, डॉ. अमृत कुमार अग्रवाल, सुश्री खुशवंत विर्दी और आयोजन टीम के अन्य सदस्यों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सभी सदस्यों के समन्वित प्रयासों से कार्यक्रम का आयोजन सफल रहा। कुल मिलाकर, ‘सस्टेन-ए-थॉन 2.0’ ने छात्रों को तकनीकी प्रयोग, विशेषज्ञों से संवाद और अपने विचारों को संभावित उद्यम में बदलने की दिशा में आगे बढ़ने का मंच दिया। अब इनक्यूबेशन सपोर्ट की संभावनाओं के बीच यह देखना अहम होगा कि प्रतियोगिता में सामने आए कितने विचार आगे चलकर व्यावहारिक समाधान और टिकाऊ व्यवसाय का रूप ले पाते हैं।
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