राष्ट्रीय टूथब्रशिंग दिवस के अवसर पर शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज ने नोएडा के सेक्टर-45 में बच्चों के लिए सामुदायिक मौखिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें विशेषज्ञों और बीडीएस विद्यार्थियों ने बच्चों को सही तरीके से ब्रश करना सिखाया और दांतों व मसूड़ों को स्वस्थ रखने के आसान उपाय बताए।
बच्चों की मुस्कान सिर्फ उनके चेहरे की खूबसूरती नहीं, बल्कि उनकी सेहत का भी अहम हिस्सा है। लेकिन क्या बच्चों को पता है कि दांतों को स्वस्थ रखने के लिए कितनी देर और किस तरीके से ब्रश करना चाहिए?
क्या वे जानते हैं कि दिन में दो बार ब्रश करने की आदत दांतों की सड़न और मसूड़ों की कई समस्याओं से बचाव में मदद कर सकती है? इन्हीं सवालों के जवाब देने और बच्चों में छोटी उम्र से ही दंत स्वच्छता की आदत विकसित करने के उद्देश्य से शारदा विश्वविद्यालय ने नोएडा में एक विशेष जागरूकता पहल की।
राष्ट्रीय टूथब्रशिंग दिवस के अवसर पर शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज की ओर से सेक्टर-45, नोएडा स्थित सेतु शिक्षा ज्योति केंद्र, बालगिरी मंदिर रोड पर सामुदायिक मौखिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को दांतों की साफ-सफाई के प्रति जागरूक करना और उन्हें ब्रश करने की सही तकनीक समझाना था।

सिर्फ जानकारी नहीं, बच्चों को सिखाकर समझाया गया सही तरीका
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को बताया गया कि मौखिक स्वच्छता को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना क्यों जरूरी है। विशेषज्ञों ने दिन में दो बार ब्रश करने की आवश्यकता, ब्रश करने की सही तकनीक और दांतों को साफ रखने के जरूरी तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी।
बच्चों को डेंटल कैरीज़ यानी दांतों में होने वाली सड़न तथा मसूड़ों से जुड़ी बीमारियों के बारे में भी समझाया गया। उन्हें बताया गया कि समय पर दांतों की सफाई और सही आदतें अपनाकर इन समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि बच्चों को केवल भाषण या सामान्य जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया। इंटरैक्टिव डेमोंस्ट्रेशन और अलग-अलग शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से उन्हें ब्रश करने का व्यावहारिक तरीका दिखाया गया। बच्चों को खुद समझने और सवाल पूछने का अवसर मिला, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक रोचक और संवादात्मक बनी।
बचपन में बनी अच्छी आदतें जीवनभर देती हैं फायदा: डॉ. हेमंत साहनी
इस अवसर पर शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज के डीन डॉ. हेमंत साहनी ने इस पहल की सराहना की।

उन्होंने सामुदायिक स्तर पर दंत स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बचपन में मौखिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना बेहद महत्वपूर्ण है। छोटी उम्र में अपनाई गई अच्छी आदतें जीवनभर स्वस्थ रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
डॉ. साहनी ने यह भी कहा कि इस तरह के जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रम निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। इनका उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक मौखिक स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी पहुंचाना है। उन्होंने इसे संस्थान की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया, जिसके तहत शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता को केवल परिसर तक सीमित न रखकर समुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
समय पर दंत स्वच्छता की शिक्षा कई बीमारियों से बचा सकती है: डॉ. स्वाति शर्मा
पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. स्वाति शर्मा ने भी कार्यक्रम के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को शुरुआती अवस्था से ही मौखिक स्वास्थ्य की शिक्षा देना और निवारक दंत चिकित्सा के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
उनके अनुसार, बच्चों को ब्रश करने की सही तकनीक सिखाना और नियमित रूप से दांतों की सफाई के लिए प्रोत्साहित करना दांतों और मसूड़ों से जुड़ी कई ऐसी बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है, जिनसे बचाव संभव है। उन्होंने कार्यक्रम को सार्थक और प्रभावशाली बनाने में संकाय सदस्यों तथा विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों की भी सराहना की।
डॉक्टरों और बीडीएस विद्यार्थियों ने मिलकर बच्चों को किया जागरूक
कार्यक्रम का संचालन डॉ. निष्ठा, डॉ. साक्षी और डॉ. फैसल ने किया। वहीं, बीडीएस इंटर्न प्राची, श्रावणी, शाइस्ता और अजय ने सक्रिय भूमिका निभाई। इसके साथ ही तृतीय वर्ष के बीडीएस विद्यार्थियों तुषार, तिशा, ज़ोया, सोमेशा और तान्या ने भी कार्यक्रम में भागीदारी की।
पूरी टीम ने बच्चों को मौखिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ व्यावहारिक प्रदर्शन के जरिए ब्रश करने का सही तरीका समझाया। विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों के सहयोग से बच्चों के लिए यह अनुभव केवल जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने गतिविधियों के माध्यम से दंत स्वच्छता की बुनियादी बातें सीखीं।
छोटी उम्र से सही आदत, भविष्य में स्वस्थ मुस्कान
राष्ट्रीय टूथब्रशिंग दिवस पर आयोजित यह पहल बच्चों को यह समझाने की दिशा में महत्वपूर्ण रही कि दांतों की देखभाल किसी समस्या के सामने आने के बाद नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों से शुरू होती है। दिन में दो बार ब्रश करना, सही तकनीक अपनाना और दांतों व मसूड़ों की सफाई पर ध्यान देना स्वस्थ मौखिक जीवन की बुनियादी जरूरतें हैं।
शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज का यह सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और जनभागीदारी के माध्यम से बच्चों तक स्वास्थ्य संबंधी जरूरी संदेश पहुंचाने का प्रयास रहा। आखिरकार, बचपन में सीखी गई सही आदतें ही आगे चलकर स्वस्थ मुस्कान की मजबूत नींव बनती हैं।
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