नोएडा की JSS यूनिवर्सिटी में 15–16 अप्रैल को महिला आरक्षण अधिनियम 2023 के समर्थन में मिस्ड कॉल अभियान चलाया गया, जिसमें 850 छात्रों ने भाग लेकर महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी जागरूकता दिखाई।
महिला सशक्तिकरण को लेकर देशभर में चल रहे प्रयासों के बीच नोएडा स्थित JSS यूनिवर्सिटी में एक अनूठी पहल देखने को मिली। 15 और 16 अप्रैल 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में “महिला आरक्षण अधिनियम–2023” यानी “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के समर्थन में एक विशेष मिस्ड कॉल अभियान आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
यह अभियान उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद (UPSHEC) और उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य युवाओं के बीच महिला सशक्तिकरण, समान अधिकार और राजनीतिक भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
अभियान के तहत विश्वविद्यालय के विभिन्न कक्षा कक्षों में छात्रों को महिला आरक्षण अधिनियम के महत्व के बारे में जानकारी दी गई और उन्हें एक निर्धारित मोबाइल नंबर—9667173333—पर मिस्ड कॉल देकर अपना समर्थन दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया गया। यह प्रक्रिया सरल और प्रभावी थी, जिससे बड़ी संख्या में छात्रों ने आसानी से इसमें भाग लिया।
दो दिनों तक चले इस अभियान में कुल 850 विद्यार्थियों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इनमें 297 छात्राएं और 553 छात्र शामिल थे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि न केवल छात्राएं, बल्कि छात्र भी महिला सशक्तिकरण के इस मुद्दे पर समान रूप से जागरूक और संवेदनशील हैं।
अभियान के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में एक सकारात्मक और जागरूक माहौल देखने को मिला। छात्र-छात्राओं ने न केवल मिस्ड कॉल देकर अपना समर्थन जताया, बल्कि इस विषय पर चर्चा करते हुए महिला अधिकारों और समाज में उनकी भूमिका को लेकर अपने विचार भी साझा किए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान युवाओं को सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम हैं। इससे छात्रों में न केवल जागरूकता बढ़ती है, बल्कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी के महत्व को भी समझते हैं।

“नारी शक्ति वंदन अधिनियम–2023” भारत में महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह व्यवस्था जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद लागू होगी।
JSS यूनिवर्सिटी में आयोजित इस अभियान के माध्यम से छात्रों को इस अधिनियम की बारीकियों से अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि यह कानून केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने का एक बड़ा प्रयास है।
अभियान में भाग लेने वाले कई छात्रों ने कहा कि इस तरह की पहल से उन्हें देश के महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में जानकारी मिलती है और वे अपनी राय व्यक्त करने के लिए प्रेरित होते हैं। छात्राओं ने विशेष रूप से इस अभियान को सराहते हुए कहा कि इससे उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने का अवसर मिला।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कक्षा कक्षों में शिक्षकों ने छात्रों को इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी और उन्हें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
यह पहल इस बात का भी संकेत है कि देश का युवा वर्ग अब केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज करा रहा है। महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर युवाओं की यह भागीदारी भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, JSS यूनिवर्सिटी में आयोजित यह मिस्ड कॉल अभियान न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम था, बल्कि यह एक जागरूकता अभियान के रूप में सामने आया, जिसने छात्रों को एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे से जोड़ने का काम किया।
आने वाले समय में यदि इस तरह के अभियान अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी आयोजित किए जाते हैं, तो यह निश्चित रूप से महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को और मजबूती प्रदान करेंगे।
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