शारदा विश्वविद्यालय में आयोजित 10वीं आनंद स्वरूप गुप्ता मेमोरियल इंटरनेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता का भव्य समापन हुआ, जिसमें देश-विदेश की टीमों ने विधिक कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।
शारदा विश्वविद्यालय के शारदा स्कूल ऑफ लॉ द्वारा आयोजित 10वीं आनंद स्वरूप गुप्ता मेमोरियल इंटरनेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2026 का वैलिडिक्टरी समारोह बेहद भव्य और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह प्रतिष्ठित आयोजन विश्वविद्यालय के चाणक्य ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश से आई 40 से अधिक टीमों ने भाग लेकर अपने विधिक ज्ञान, तर्कशक्ति और वकालत कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत में विधि शिक्षा का स्तर तेजी से वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित हो रहा है। प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों ने काल्पनिक न्यायिक मामलों पर बहस करते हुए अपनी शोध क्षमता और कानूनी समझ का परिचय दिया, जिससे पूरा आयोजन ज्ञान और प्रतिस्पर्धा का अनूठा संगम बन गया।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान के साथ हुई। स्वागत उद्बोधन देते हुए प्रो. (डॉ.) ऋषिकेश दवे ने कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं विधि शिक्षा का एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक पहलू हैं। उन्होंने इसे छात्रों के बौद्धिक और पेशेवर विकास का सशक्त मंच बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से छात्रों को न्यायालय की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलता है।
इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इनमें डॉ. यू.सी. झा (ISIL), डॉ. लूथर रंगरेजी (विदेश मंत्रालय), प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिन्हा (डीएनएलयू, जबलपुर) और अली हसनखानी (AALCO) प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी अतिथियों ने अपने संबोधन में छात्रों को अंतरराष्ट्रीय विधि की गहरी समझ विकसित करने और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रतियोगिता के परिणाम बेहद रोचक और प्रतिस्पर्धात्मक रहे। सिंबायोसिस लॉ स्कूल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता का खिताब अपने नाम किया, जबकि कर्णावती यूनिवर्सिटी की टीम उपविजेता रही। विजेता टीम को 75,000 रुपये की नकद राशि और ट्रॉफी प्रदान की गई, जबकि उपविजेता टीम को 45,000 रुपये और ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा सभी प्रतिभागियों को SCC Online की सदस्यता भी प्रदान की गई, जिससे वे अपने विधिक अध्ययन को और अधिक सशक्त बना सकें। प्रतियोगिता के दौरान विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया, जिससे उनका उत्साह और आत्मविश्वास और बढ़ा।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के चांसलर पी.के. गुप्ता ने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंच छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनका वैश्विक दृष्टिकोण विकसित होता है।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राजेश टंडन ने अपने संबोधन में कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण अनुभव होती हैं। उन्होंने कहा कि इस मंच के माध्यम से छात्र न्यायालय की प्रक्रिया को करीब से समझते हैं और अपनी तार्किक क्षमता तथा अभिव्यक्ति कौशल को निखारते हैं, जो उन्हें एक सफल विधि पेशेवर बनने में मदद करता है।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें प्रो चांसलर वाई.के. गुप्ता, वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) सिबाराम खारा, डॉ. मनवेन्द्र सिंह, प्रो. (डॉ.) तारकेश, प्रो. (डॉ.) राहुल निकम, डॉ. रजिया चौहान, डॉ. वैशाली अरोड़ा और खुशबू माहेश्वरी सहित विभिन्न स्कूलों के फैकल्टी मेंबर्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल रहे।
पूरे आयोजन में अनुशासन, उत्साह और पेशेवर दृष्टिकोण का शानदार समन्वय देखने को मिला। प्रतियोगिता के दौरान छात्रों ने जिस प्रकार से जटिल कानूनी मुद्दों पर अपनी बात रखी, वह उनकी तैयारी और प्रतिभा का स्पष्ट प्रमाण था।
यह आयोजन न केवल एक प्रतियोगिता था, बल्कि छात्रों के लिए सीखने, नेटवर्किंग करने और अपने कौशल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का एक सुनहरा अवसर भी साबित हुआ। इस तरह के आयोजन भविष्य के विधि विशेषज्ञों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंत में, आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को और बड़े स्तर पर आयोजित करने का संकल्प लिया गया।
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