Friday, May 01, 2026

बंगाल में ‘खेला’ या कमल की आंधी? रिजल्ट से पहले BJP ने तैयार किया सीक्रेट मास्टर प्लान

4 मई की मतगणना से पहले बीजेपी पूरी तरह अलर्ट मोड में, कोलकाता में 2 मई को होगी हाई-लेवल रणनीतिक बैठक; बूथ से काउंटिंग सेंटर तक हर गतिविधि पर रहेगी पैनी नजर

New Delhi , Latest Updated On - May 01 2026 | 16:12:00 PM
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। एग्जिट पोल में बढ़त के दावों के बाद पार्टी अब मतगणना दिवस की रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी है। कोलकाता में 2 मई को होने वाली अहम बैठक में केंद्रीय नेतृत्व, प्रवासी नेता और काउंटिंग एजेंट्स शामिल होंगे।

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणाम आने से पहले भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले पार्टी ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए 2 मई को कोलकाता में एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में उन प्रवासी नेताओं को विशेष रूप से बुलाया गया है जिन्हें चुनाव के दौरान विधानसभा और जोन स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

बीजेपी का साफ संदेश है कि मतगणना के दिन किसी भी स्तर पर कोई चूक नहीं होनी चाहिए। बूथ प्रबंधन से लेकर काउंटिंग सेंटर तक हर गतिविधि पर पार्टी की पैनी नजर रहेगी। यही वजह है कि केंद्रीय नेतृत्व खुद बंगाल में डेरा डाले हुए है और लगातार बैठकें कर रहा है।

एग्जिट पोल से बढ़ा बीजेपी का आत्मविश्वास

मतदान समाप्त होने के बाद आए अधिकांश एग्जिट पोल्स में बीजेपी को बढ़त मिलती दिखाई गई है। कुछ सर्वेक्षणों में तो पार्टी को स्पष्ट बहुमत तक का अनुमान दिया गया है। इन आंकड़ों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व दोनों का उत्साह बढ़ा दिया है। हालांकि पार्टी किसी भी प्रकार की ढिलाई के मूड में नहीं है।

बीजेपी का मानना है कि बंगाल की कई सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी है, इसलिए मतगणना के हर राउंड पर बारीकी से नजर रखना बेहद जरूरी होगा। पार्टी इसी रणनीति के तहत अपने नेताओं और एजेंट्स को पूरी तरह प्रशिक्षित और सक्रिय कर रही है।


कोलकाता में होगी हाई-लेवल रणनीतिक बैठक

2 मई को कोलकाता में होने वाली बैठक में पश्चिम बंगाल प्रभारी सुनील बंसल और केंद्रीय मंत्री एवं चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव शामिल होंगे। दोनों नेता पिछले कई दिनों से बंगाल में लगातार बैठकें कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में काउंटिंग डे की विस्तृत रणनीति तय की जाएगी। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किस काउंटिंग सेंटर पर कौन नेता मौजूद रहेगा, एजेंट्स की भूमिका क्या होगी और हर राउंड की मॉनिटरिंग किस प्रकार की जाएगी।

इसके साथ ही प्रवासी नेताओं को यह निर्देश भी दिया जाएगा कि वे अपने-अपने प्रभार वाले क्षेत्रों में मौजूद रहकर पूरी मतगणना प्रक्रिया पर नजर बनाए रखें।

लगातार बैठकों का दौर जारी

मतदान खत्म होने के तुरंत बाद 30 अप्रैल को कोलकाता में सुनील बंसल और भूपेंद्र यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी। इस दौरान मतदान के बाद की ग्राउंड रिपोर्ट ली गई और विभिन्न सीटों की स्थिति का आकलन किया गया।

इसके बाद 1 मई को दोनों नेताओं ने सिलीगुड़ी में स्थानीय नेताओं और काउंटिंग एजेंट्स के साथ बैठक की। इस बैठक में एजेंट्स को मतगणना प्रक्रिया की तकनीकी और कानूनी बारीकियों की जानकारी दी गई ताकि किसी भी स्थिति में पार्टी कमजोर न पड़े।

अब 2 मई की बैठक को बेहद निर्णायक माना जा रहा है। पार्टी इसे अंतिम रणनीतिक तैयारी के तौर पर देख रही है।


हर राउंड पर रहेगी नजर

बीजेपी की रणनीति सिर्फ जीत का दावा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मतगणना प्रक्रिया के हर चरण को मजबूत तरीके से संभालने पर केंद्रित है। पार्टी चाहती है कि हर टेबल, हर ईवीएम और हर राउंड की जानकारी तत्काल नेतृत्व तक पहुंचे।

इसके लिए विशेष निगरानी तंत्र तैयार किया जा रहा है। एजेंट्स को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाई जाए।

TMC भी कर रही वापसी का दावा

जहां बीजेपी एग्जिट पोल्स से उत्साहित नजर आ रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस भी अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार दावा कर रही हैं कि उनकी सरकार फिर से सत्ता में वापसी करेगी।

टीएमसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं, महिला वोट बैंक और ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत पकड़ को अपनी सबसे बड़ी ताकत मान रही है। ऐसे में बंगाल की सियासत में मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे का माना जा रहा है।

निर्णायक जंग से पहले आखिरी तैयारी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2 मई की बैठक सिर्फ समीक्षा बैठक नहीं बल्कि 4 मई की निर्णायक लड़ाई की अंतिम रणनीतिक कवायद है। बीजेपी इस बार बंगाल में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही है और इसी कारण पार्टी कोई भी जोखिम लेने को तैयार नहीं है।

अब सभी की नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि बंगाल में ‘खेला’ जारी रहेगा या फिर कमल खिलने जा रहा है।

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