आगामी विधानसभा निर्वाचन की तैयारियों के बीच गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में ईवीएम और वीवीपैट की फर्स्ट लेवल चेकिंग को लेकर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। 21 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों को तकनीकी व प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी देने के साथ मशीनों पर लाइव और हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी दिया गया।
आगामी विधानसभा निर्वाचन को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारु ढंग से संपन्न कराने की तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनावी प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण चरणों में शामिल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम और वीवीपैट की फर्स्ट लेवल चेकिंग, जिसे एफएलसी कहा जाता है, को लेकर ग्रेटर नोएडा में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।
यह कार्यशाला गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के सभागार में आयोजित हुई, जहां उत्तर प्रदेश के 21 जनपदों से आए जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों को ईवीएम एवं वीवीपैट की जांच से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का आयोजन भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के क्रम में किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विभिन्न जनपदों में प्रस्तावित ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की प्रथम स्तर की जांच पूरी गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप संपन्न हो।

विशेष कार्यशाला की अध्यक्षता भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग ने की। कार्यक्रम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश नवदीप रिणवा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इसके अलावा भारत निर्वाचन आयोग के सचिव मधुसूदन गुप्ता, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश अखंड प्रताप सिंह, भारत निर्वाचन आयोग के अवर सचिव राकेश कुमार और उत्तर प्रदेश के उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी अमित सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग ने एफएलसी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अधिकारियों को मार्गदर्शन दिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ईवीएम और वीवीपैट से संबंधित प्रत्येक प्रक्रिया को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा तय किए गए प्रोटोकॉल और मानकों के अनुसार पूरी सावधानी के साथ संपन्न किया जाए।
फर्स्ट लेवल चेकिंग यानी एफएलसी चुनाव से पहले ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की तकनीकी जांच की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। कार्यशाला में अधिकारियों और सुपरवाइजरों को इस प्रक्रिया के प्रशासनिक और तकनीकी दोनों पहलुओं की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान मशीनों की जांच, उनके संचालन और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही यह भी बताया गया कि एफएलसी के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रियागत त्रुटि न हो, इसके लिए किन-किन सावधानियों का पालन आवश्यक है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश नवदीप रिणवा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी एफएलसी से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश साझा किए। अधिकारियों को ईवीएम की तकनीकी एवं प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था, एफएलसी की प्रक्रिया और विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों तथा मास्टर ट्रेनरों की जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से बताया गया।
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के संपूर्ण जीवन चक्र से जुड़ा प्रशिक्षण रहा। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को मशीनों के संचालन से लेकर रैंडमाइजेशन, कमीशनिंग, मतदान प्रक्रिया, मतगणना और मतगणना के बाद की प्रक्रियाओं तक विभिन्न चरणों की जानकारी दी।

इस दौरान प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि अलग-अलग स्तरों पर निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किस तरह किया जाना है और चुनावी प्रक्रिया में तकनीकी तथा प्रशासनिक सतर्कता क्यों महत्वपूर्ण है।
ईसीआईएल के विशेषज्ञ पी.सी. मंडल ने ईवीएम एवं वीवीपैट की तकनीकी संरचना और उनकी सुरक्षा विशेषताओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। वहीं, भारत निर्वाचन आयोग के ईवीएम प्रभाग के सचिव मधुसूदन गुप्ता ने एफएलसी के दौरान सामने आने वाली सामान्य त्रुटियों और उनसे बचने के लिए जरूरी सावधानियों पर विशेष रूप से चर्चा की।
कार्यशाला को केवल सैद्धांतिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा गया। आयोजन स्थल पर पर्याप्त संख्या में ईवीएम और वीवीपैट मशीनें उपलब्ध कराई गई थीं, जिनके माध्यम से प्रतिभागियों को लाइव और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
बीईएल और ईसीआईएल के विशेषज्ञ इंजीनियरों ने मशीनों के संचालन और एफएलसी प्रक्रिया का चरणबद्ध प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों और प्रतिभागियों को स्वयं ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों को संचालित करने और निर्धारित प्रक्रियाओं का अभ्यास करने का अवसर दिया गया।

हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और ईवीएम तथा वीवीपैट से जुड़े तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं को करीब से समझा। इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जब विभिन्न जिलों में वास्तविक एफएलसी की प्रक्रिया शुरू हो, तब प्रशिक्षित अधिकारी और सुपरवाइजर निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संपन्न करा सकें।
प्रशिक्षण के समापन से पहले प्रतिभागियों का मूल्यांकन भी किया गया। इसके साथ ही एक डाउट क्लियरिंग सेशन आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों और प्रतिभागियों ने एफएलसी प्रक्रिया तथा ईवीएम-वीवीपैट के तकनीकी संचालन से जुड़े अपने सवाल रखे।
विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी प्रतिभागियों से घोषणा-पत्र भी प्राप्त किए गए। इन घोषणा-पत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में बताए गए विषयों को समझने और किसी प्रकार की शंका शेष न होने की पुष्टि की।
कार्यशाला के समापन अवसर पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एफएलसी की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। ईवीएम और वीवीपैट से संबंधित प्रत्येक चरण में भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

अधिकारियों का मानना है कि चुनावी तैयारियों के इस महत्वपूर्ण चरण में तकनीकी दक्षता, प्रशासनिक सतर्कता और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन आगामी विधानसभा निर्वाचन को निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाएगा।
जिलाधिकारी ने कार्यशाला के सफल आयोजन पर मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, विभिन्न जनपदों से आए जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं एफएलसी सुपरवाइजरों, मास्टर ट्रेनरों, ईसीआईएल के विशेषज्ञों और अन्य संबंधित अधिकारियों का मार्गदर्शन, सहयोग और सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला में 21 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं एफएलसी सुपरवाइजर, मास्टर ट्रेनर, ईसीआईएल के विशेषज्ञ और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। ग्रेटर नोएडा में आयोजित यह कार्यशाला अब उन जिलों के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगी, जहां आगामी दिनों में ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग की प्रक्रिया शुरू की जानी है।
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