दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। पहली सूची के मुताबिक राजधानी में मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 45 लाख से घटकर 97 लाख 53 हजार 577 रह गई है। करीब 47.56 लाख नाम कम हुए हैं। चुनाव आयोग ने इनके पीछे अनुपस्थित रहने, दूसरे स्थान पर वोटर लिस्ट में नाम होने, मृत्यु और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को प्रमुख कारण बताया है।
दिल्ली की राजनीति और चुनावी व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के पहले चरण के बाद राजधानी में वोटरों की संख्या में करीब 47.56 लाख की कमी दर्ज की गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुनरीक्षण के बाद दिल्ली में मतदाताओं की कुल संख्या अब एक करोड़ से भी कम रह गई है।
पहले दिल्ली की मतदाता सूची में कुल 1 करोड़ 45 लाख 10 हजार 299 मतदाता दर्ज थे। SIR के पहले चरण के बाद जारी सूची में यह संख्या घटकर 97 लाख 53 हजार 577 रह गई। यानी दोनों आंकड़ों के बीच 47 लाख 56 हजार 722 मतदाताओं का अंतर है।
लेकिन क्या इतने बड़े पैमाने पर लोगों का वोटिंग अधिकार खत्म कर दिया गया? चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी में इसके पीछे कई अलग-अलग कारण बताए गए हैं।
43 लाख मतदाता मिले अनुपस्थित या दूसरी जगह ट्रांसफर
चुनाव आयोग के मुताबिक, सूची से कम हुए करीब 47 लाख नामों में सबसे बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है जो सत्यापन के दौरान अपने पते पर मौजूद नहीं मिले या जिनका वोटर रिकॉर्ड दूसरी जगह ट्रांसफर हो चुका है।
आयोग के अनुसार करीब 43 लाख मतदाता अनुपस्थित मिले या उनका मतदाता रिकॉर्ड कहीं और ट्रांसफर पाया गया। ऐसे मामलों में बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO ने सत्यापन प्रक्रिया के तहत संबंधित पते की जांच की।
बताया गया है कि जिन मतदाताओं को उनके पते पर अनुपस्थित पाया गया, उनके घरों पर BLO ने केवल एक बार नहीं, बल्कि तीन बार तक जाकर सत्यापन करने की कोशिश की। इसके बाद ही नाम हटाने की सिफारिश की गई।
यानी मतदाता सूची में यह बदलाव केवल एक कागजी प्रक्रिया के आधार पर नहीं किया गया, बल्कि घर-घर सत्यापन के बाद कार्रवाई किए जाने की बात आयोग ने कही है।
2.82 लाख मृत मतदाताओं के नाम भी हटे
SIR के दौरान दिल्ली की मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम भी सामने आए, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। आयोग के अनुसार 2 लाख 82 हजार 412 मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
इसके अलावा 1 लाख 41 हजार से ज्यादा डुप्लीकेट मतदाता भी चिन्हित किए गए। डुप्लीकेट का मतलब ऐसे रिकॉर्ड से है जिसमें एक व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज पाया गया।
इस तरह आयोग ने मतदाता सूची को अपडेट करते हुए मृत, डुप्लीकेट और दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के रिकॉर्ड को अलग करने की प्रक्रिया अपनाई।
SIR में हजारों BLO और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी जुड़े
दिल्ली में इस पूरी कवायद को अंजाम देने के लिए बड़ी संख्या में बूथ लेवल अधिकारी लगाए गए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब 13 हजार BLO इस प्रक्रिया में जुटे थे।
इसके साथ ही राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट यानी BLA भी प्रक्रिया में शामिल रहे। आंकड़ों के अनुसार आम आदमी पार्टी के 9,462, भाजपा के 12,788 और कांग्रेस के 10,772 BLA इस प्रक्रिया से जुड़े थे।
इसका उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी था।
दिल्ली में बढ़ेंगे मतदान केंद्र
मतदाता सूची में बदलाव के साथ दिल्ली में मतदान केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई गई है। पहले राजधानी में 13,033 मतदान केंद्र थे। अब इनकी संख्या बढ़ाकर 14,947 कर दी गई है।
इसका मकसद मतदाताओं की सुविधा और मतदान केंद्रों पर भीड़ को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना बताया जा रहा है।
हालांकि SIR की प्रक्रिया का यह पहला चरण है। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को जारी की जाएगी। इसलिए मौजूदा आंकड़ों को अंतिम संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
दिल्ली में पुरुषों से ज्यादा महिला वोटर?
पहले चरण की सूची में दिल्ली में कुल 97,53,577 मतदाता दर्ज हैं।
इनमें:
- पुरुष मतदाता: 49,88,993
- महिला मतदाता: 47,64,137
- थर्ड जेंडर मतदाता: 447
यानी नई सूची में पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से अधिक है। वहीं थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 447 दर्ज की गई है।
एक लाख से ज्यादा युवा वोटर
नई मतदाता सूची में युवा मतदाताओं की संख्या भी महत्वपूर्ण है। दिल्ली में 18 से 19 वर्ष की उम्र वाले मतदाताओं की संख्या एक लाख से ज्यादा बताई गई है।
वहीं राजधानी में बुजुर्ग मतदाताओं की संख्या भी कम नहीं है। 85 वर्ष से अधिक उम्र के 40,871 मतदाता सूची में दर्ज हैं। इनमें 100 वर्ष से अधिक उम्र के 189 मतदाता भी शामिल हैं।
मटियाला सबसे बड़ा, दिल्ली कैंट सबसे छोटा विधानसभा क्षेत्र
विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो मतदाताओं की संख्या के लिहाज से मटियाला विधानसभा क्षेत्र सबसे बड़ा है। यहां 3,33,057 मतदाता दर्ज हैं।
वहीं दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम मतदाता हैं। यहां कुल 41,654 मतदाता दर्ज किए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या अंतिम सूची में फिर बदलेगा आंकड़ा?
SIR की पहली सूची में 47 लाख से ज्यादा नाम कम होने के बाद स्वाभाविक रूप से कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि नाम कम होने के पीछे अनुपस्थिति, दूसरी जगह स्थानांतरण, मृत्यु और डुप्लीकेट रिकॉर्ड जैसे कारण हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी प्रक्रिया पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही दिल्ली में मतदाताओं की वास्तविक अंतिम संख्या सामने आएगी।
इसलिए फिलहाल 97 लाख 53 हजार 577 का आंकड़ा SIR के पहले चरण की सूची का है, अंतिम मतदाता संख्या का नहीं।
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