मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुरुवार से गुजरात के अपने पहले दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे बूथस्तरीय अधिकारियों, चुनावी साक्षरता क्लबों के सदस्यों, छात्रों, शिक्षकों और नागरिकों से संवाद करेंगे। दौरे का मुख्य केंद्र ‘रोल से पोल तक पारदर्शिता’ रहेगा। अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन में नागरिक संवाद के साथ अडालज बावड़ी का दौरा और गुजरात विश्वविद्यालय में 500 से अधिक BLO तथा 1,000 से ज्यादा ELC सदस्यों के साथ संवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है।
भारत की चुनावी व्यवस्था दुनिया में सबसे बड़ी है और इसी व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर अब गुजरात से एक बड़ा संदेश देने की तैयारी है। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुरुवार से गुजरात के अपने पहले दौरे पर रहेंगे। इस दौरे में सिर्फ अधिकारियों के साथ बैठकें नहीं होंगी, बल्कि जमीनी स्तर पर चुनाव कराने वाले बूथस्तरीय अधिकारियों, चुनावी साक्षरता क्लबों, शिक्षकों, छात्रों और आम नागरिकों के साथ सीधे संवाद पर जोर रहेगा।
पूरे कार्यक्रम का केंद्रीय विषय ‘रोल से पोल तक पारदर्शिता’ रखा गया है। यानी मतदाता सूची तैयार होने से लेकर मतदान केंद्र तक की पूरी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनता के विश्वास को केंद्र में रखने का संदेश दिया जाएगा।
अडालज बावड़ी से अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन तक कार्यक्रम
गुजरात दौरे के पहले दिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ऐतिहासिक अडालज बावड़ी का दौरा करेंगे। यह कार्यक्रम गुजरात की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने की पहल का हिस्सा है।
इसके बाद वे अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन (AMA) के परिसर में पहुंचेंगे। यहां उनका नागरिकों के साथ संवाद प्रस्तावित है। कार्यक्रम का विषय होगा—“भारत में चुनाव कराना—दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र”।
इस संवाद में भारतीय चुनाव प्रणाली के विशाल स्वरूप, उसकी चुनौतियों और पारदर्शिता के लिए अपनाए जाने वाले उपायों पर चर्चा होगी।
500 से ज्यादा BLO के साथ सीधी बातचीत
मुख्य चुनाव आयुक्त का गुजरात दौरा अगले दिन और महत्वपूर्ण हो जाएगा। शुक्रवार को वे गुजरात विश्वविद्यालय के अटल कलाम हॉल में राज्यभर से आए 500 से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) के साथ संवाद करेंगे।
BLO चुनावी प्रक्रिया की सबसे निचली लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। मतदाता सूची से संबंधित जमीनी सत्यापन और मतदाताओं से जुड़ी कई प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका रहती है।
ऐसे में इस कार्यक्रम का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में जमीनी स्तर के अधिकारियों की भूमिका को सामने लाना है।
1,000 से ज्यादा ELC सदस्य भी होंगे शामिल
इसके बाद CEC ज्ञानेश कुमार शेला स्थित AUDA सभागार में चुनावी साक्षरता क्लबों यानी ELC के 1,000 से अधिक सदस्यों के साथ संवाद करेंगे।
इस कार्यक्रम में हाल ही में शुरू किए गए ELC 2.0 के विजन, मिशन और प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी जाएगी। चुनाव आयोग चुनावी साक्षरता क्लबों को युवा नागरिकों को चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ने वाले मंच के रूप में आगे बढ़ा रहा है।
इसका मकसद केवल चुनाव के समय मतदान के लिए जागरूक करना नहीं, बल्कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पूरी समझ से जोड़ना भी है।
ECINET पर भी होगा विशेष सूचना सत्र
गुजरात दौरे के दौरान ECINET को लेकर भी सूचना सत्र आयोजित किया जाएगा। यह चुनाव संबंधी सूचनाओं और सेवाओं के लिए एक ही स्थान पर उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
आयोग के अनुसार ECINET को इस वर्ष जनवरी में लॉन्च किया गया था और यह अंग्रेजी के अलावा 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मतदाताओं और चुनाव से जुड़े लोगों को चुनाव संबंधी जानकारी और सेवाओं तक आसान पहुंच देने पर जोर है।
कार्यक्रमों के दौरान चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी तकनीकी और मीडिया से जुड़े विषयों पर पावरपॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से जानकारी देंगे। इनमें महानिदेशक (मीडिया) आशीष गोयल, महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना, निदेशक शुभ्रा सक्सेना और उप निदेशक (मीडिया) अपूर्वा कुमार सिंह शामिल हैं।
CEC ने बताया—क्यों जरूरी है पारदर्शिता?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया में सबसे बड़ा है और इसकी चुनावी प्रक्रिया सबसे पारदर्शी है। उन्होंने बताया कि गुजरात दौरे के दौरान अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन के सदस्यों, समर्पित BLO के साथ-साथ कुलपतियों, प्राचार्यों, शिक्षकों और छात्रों से संवाद किया जाएगा।
उन्होंने भारत की चुनावी व्यवस्था के विशाल आकार का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में 4,123 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र और लगभग 12 लाख मतदान केंद्र हैं। इतनी व्यापक व्यवस्था के बावजूद चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखना इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है।
राजनीतिक दलों के एजेंट भी निभाते हैं निगरानी की भूमिका
CEC ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भूमिका का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार राजनीतिक दलों द्वारा नामित बूथ लेवल एजेंट (BLA) मतदाता सूची के समानांतर ऑडिट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी तरह वास्तविक मतदान और मतगणना के दौरान पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट भी प्रक्रिया की निगरानी में भूमिका निभाते हैं।
यानी चुनावी पारदर्शिता को केवल निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधियों की भागीदारी को भी इसका अहम हिस्सा माना जा रहा है।
International IDEA की अध्यक्षता का भी जिक्र
CEC ज्ञानेश कुमार ने भारत की चुनावी व्यवस्था के वैश्विक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि 2026 में भारत, अपने मुख्य चुनाव आयुक्त के प्रतिनिधित्व में International IDEA (International Institute for Democracy and Electoral Assistance) की अध्यक्षता संभाल रहा है।
यह संगठन दुनिया के प्रमुख लोकतांत्रिक देशों को साथ लेकर लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों पर काम करता है।
गुजरात दौरे का व्यापक संदेश यही है कि दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी मशीनरी को जमीनी स्तर से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक अधिक पारदर्शी, जागरूक और सहभागी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अब देखना होगा कि BLO, ELC, नागरिकों और शिक्षण संस्थानों के साथ होने वाला यह सीधा संवाद चुनावी जागरूकता और भरोसे को किस तरह मजबूत करता है।
गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संदीप सागले के कार्यालय ने इन संवाद कार्यक्रमों की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य CEC ज्ञानेश कुमार के ‘रोल से पोल तक पारदर्शिता’ के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाना और चुनावी कार्य तथा मतदाता जागरूकता से जुड़े लोगों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना है।
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