केरल में चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने बीजेपी, सीपीएम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कथित गठजोड़, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और किसानों-युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर कई बड़े सवाल उठाए।
केरल की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने एक चुनावी सभा में ऐसे आरोप लगाए, जिसने राजनीतिक माहौल को अचानक गरमा दिया। अपने संबोधन में उन्होंने न सिर्फ राज्य की राजनीति को लेकर सवाल उठाए, बल्कि केंद्र सरकार, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और देश की अर्थव्यवस्था पर भी तीखी टिप्पणी की।
राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते हुए की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि विचारधाराओं की लड़ाई है। उनके मुताबिक एक तरफ लेफ्ट फ्रंट और सीपीएम की विचारधारा है, जबकि दूसरी ओर यूडीएफ और कांग्रेस का दृष्टिकोण है।
BJP और लेफ्ट के कथित गठजोड़ का आरोप
राहुल गांधी का सबसे बड़ा और विवादित दावा यह रहा कि केरल में पहली बार बीजेपी और लेफ्ट के बीच एक तरह की “साझेदारी” देखने को मिल रही है। उन्होंने इसे “पहेली” बताते हुए कहा कि एक वामपंथी दल का दक्षिणपंथी विचारधारा वाले दल के साथ खड़ा होना सामान्य नहीं है।
उन्होंने मंच पर मौजूद कुछ पूर्व वामपंथी नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये वही लोग हैं जो पहले लेफ्ट से जुड़े थे, लेकिन अब कांग्रेस के साथ खड़े हैं। राहुल गांधी के अनुसार, इससे यह साबित होता है कि लेफ्ट अब “जनता की पार्टी” नहीं रह गई, बल्कि कॉरपोरेट हितों के करीब हो गई है।

प्रधानमंत्री पर सीधे आरोप
अपने भाषण में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर भी सीधे निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक मुद्दे उठाते हैं, लेकिन केरल में सबरीमाला जैसे मुद्दों पर चुप रहते हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जो लोग बीजेपी या आरएसएस के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें जांच एजेंसियों के जरिए निशाना बनाया जाता है। खुद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कई केस दर्ज किए गए, उन्हें घंटों पूछताछ का सामना करना पड़ा, लेकिन केरल के मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।
भारत-अमेरिका समझौते पर सवाल
राहुल गांधी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच हुए कथित समझौते पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील के जरिए भारत के कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोल दिया गया है।
उनका कहना था कि छोटे भारतीय किसान अब बड़े अमेरिकी कृषि व्यवसायों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे, जिससे खेती पर गंभीर असर पड़ेगा। इसके अलावा उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा पर भी चिंता जताई और कहा कि भारत अब अपनी मर्जी से तेल नहीं खरीद सकता।

छोटे व्यापारियों और उद्योगों पर असर
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि भारत को हर साल भारी मात्रा में अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता दी गई है, जिससे देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को नुकसान होगा। उन्होंने इसे रोजगार और स्थानीय उत्पादन के लिए खतरा बताया।
पांच बड़ी गारंटियों का ऐलान
आरोपों के साथ-साथ राहुल गांधी ने केरल के लिए कांग्रेस की पांच प्रमुख गारंटियों का भी ऐलान किया। इनमें महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, छात्राओं को मासिक आर्थिक सहायता, युवाओं के लिए बिना ब्याज के लोन, वरिष्ठ नागरिकों के लिए बढ़ी हुई पेंशन और हर परिवार के लिए 25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा शामिल है।
उन्होंने कहा कि ये योजनाएं न सिर्फ लोगों को राहत देंगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी मजबूत करेंगी।

केरल की पहचान और राजनीति
अपने भाषण के अंत में राहुल गांधी ने केरल की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान की सराहना की। उन्होंने कहा कि केरल हमेशा प्रेम, एकता और भाईचारे को प्राथमिकता देता है। उन्होंने समाज सुधारक Narayana Guru का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की परंपरा हमेशा शांति और सहअस्तित्व की रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के दौर में लोगों को एकजुट रखना और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना बेहद जरूरी है।
राहुल गांधी का यह भाषण न केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, बल्कि इसमें उठाए गए मुद्दे आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकते हैं। अब देखना होगा कि उनके आरोपों और वादों का केरल के मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है और क्या यह चुनावी समीकरण को बदल पाएगा।
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