देश के तीन राज्यों में गुरुवार को लोकतंत्र का महापर्व देखने को मिला। मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात की तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए सुबह सात बजे से मतदान शुरू हुआ। दतिया में सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया, जबकि बांकीपुर और मांजलपुर सीटों पर भी मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला। इन उपचुनावों के परिणामों को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात में विधानसभा उपचुनावों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। मध्य प्रदेश की दतिया सीट, बिहार की बांकीपुर सीट और गुजरात की मांजलपुर सीट पर हो रहे चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। इन सीटों पर सुबह सात बजे से मतदान शुरू हुआ और शाम छह बजे तक मतदान जारी रहेगा।
चुनाव आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मतदान केंद्रों पर पुलिस बलों की तैनाती के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरों और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का भी सहारा लिया गया है।
दतिया में सबसे अधिक मतदान
तीनों सीटों में सबसे ज्यादा मतदान मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर दर्ज किया गया। दोपहर एक बजे तक यहां 48.91 प्रतिशत मतदान हो चुका था।
इससे पहले सुबह दस बजे तक 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। बरौदी मतदान केंद्र संख्या-219 पर 28.42 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि चिरूला क्षेत्र में लगभग 19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
दतिया विधानसभा सीट पर कुल 2,20,344 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इनमें 1,16,088 पुरुष और 1,04,246 महिला मतदाता शामिल हैं। इस सीट पर कुल 21 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।
क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव?
दतिया विधानसभा सीट मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में गिनी जाती है। यह सीट इसलिए खाली हुई क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में दिल्ली की अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई।
इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने अनुभवी नेता कुंवर घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है। घनश्याम सिंह सातवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मॉडल पोलिंग बूथ संख्या-185 पर पहुंचकर मतदान किया और लोगों से लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
बांकीपुर में प्रशांत किशोर की प्रतिष्ठा दांव पर
बिहार की राजधानी पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट भी राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोपहर एक बजे तक यहां 20.01 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
इस सीट पर कुल 422 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां लगभग 3.79 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
सबसे दिलचस्प मुकाबला जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर, भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा और राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा गुप्ता के बीच माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे सकते हैं।

बांकीपुर सीट खाली क्यों हुई?
बांकीपुर सीट के पूर्व विधायक नितिन नवीन राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए थे। इसके बाद उन्हें विधानसभा की सदस्यता छोड़नी पड़ी और यह सीट खाली हो गई।
चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महासचिव नितिन अभिषेक ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया को और सख्त बनाने की मांग की।
मांजलपुर में बीजेपी के सामने प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती
गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर दोपहर एक बजे तक 21.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जय प्रकाश सोनी ने भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
यह सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री योगेश पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी। योगेश पटेल वर्ष 1990 से लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और आठ बार विधायक चुने गए थे।
मांजलपुर विधानसभा सीट वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी और तब से इस सीट पर लगातार बीजेपी का दबदबा कायम रहा है।
तीन राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण
इन तीनों राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन इन चुनावों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
मध्य प्रदेश में यह मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।
बिहार में यह चुनाव प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं माना जा रहा है।
वहीं गुजरात में भारतीय जनता पार्टी अपने मजबूत गढ़ को बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
तीनों राज्यों में मतदान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मतदान केंद्रों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस की तैनाती की गई है।
अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न होने पाए।
तीन अगस्त को आएंगे नतीजे
इन तीनों सीटों पर मतदान समाप्त होने के बाद मतों की गिनती 3 अगस्त को की जाएगी। इसके बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि जनता ने किस उम्मीदवार पर भरोसा जताया है।
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह उपचुनाव केवल तीन सीटों तक सीमित नहीं है। इसके नतीजे आने वाले समय में राज्यों की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।
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