लखनऊ में आयोजित संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' और 'वन वोटर लिस्ट' का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव विकास कार्यों की गति को प्रभावित करते हैं और एक साथ चुनाव होने से प्रशासनिक दक्षता, सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग तथा देश के विकास को नई दिशा मिलेगी।
देश में लंबे समय से चर्चा का विषय बने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' (One Nation, One Election) को लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। स्थानीय होटल ताज में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्यों के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने भाग लिया और इस प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पहल को राष्ट्रहित में ऐतिहासिक और दूरदर्शी बताते हुए इसे जल्द से जल्द लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि पूरे देश में लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनाव एक साथ कराए जाएं तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
लखनऊ में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में संयुक्त संसदीय समिति के सदस्यों के साथ उत्तर प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य 'वन नेशन, वन इलेक्शन' से जुड़े संवैधानिक, प्रशासनिक और विकासात्मक पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श करना था।

ए.के. शर्मा बोले— लगातार चुनाव विकास कार्यों को करते हैं प्रभावित
बैठक में अपने विचार रखते हुए ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहल केवल चुनावी सुधार नहीं, बल्कि देश के विकास और प्रशासनिक दक्षता से जुड़ा एक बड़ा कदम है।
उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2021 से राजनीति में सक्रिय होने के बाद अब तक वे लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और नगर निकाय सहित पांच बड़े चुनाव देख चुके हैं। आने वाले वर्षों में 2027 और 2029 में भी चुनाव प्रस्तावित हैं। इस प्रकार केवल आठ वर्षों में लगभग आठ बार चुनावी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
उनका कहना था कि हर चुनाव से पहले लगभग दो से तीन महीने तक पूरा प्रशासन चुनावी तैयारियों में व्यस्त रहता है। इसके कारण विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है। चुनाव समाप्त होने के बाद भी प्रशासन को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगता है, जिससे परियोजनाओं पर असर पड़ता है।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' से क्या होंगे फायदे?
ए.के. शर्मा ने बैठक में कहा कि यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो इसके अनेक सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
उन्होंने कहा कि—
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चुनावों की बार-बार होने वाली प्रक्रिया समाप्त होगी।
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सरकारी खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी।
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सुरक्षा बलों की बार-बार तैनाती की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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प्रशासन अधिक समय विकास कार्यों पर दे सकेगा।
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सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
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जनता को योजनाओं और सेवाओं का लाभ समय पर मिलेगा।
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नीति निर्माण और विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में चुनावी आचार संहिता लागू होते ही कई विकास परियोजनाओं पर अस्थायी रोक लग जाती है, जिससे जनता को योजनाओं का लाभ मिलने में देरी होती है।
'वन वोटर लिस्ट' की भी उठाई मांग
बैठक के दौरान ए.के. शर्मा ने केवल 'वन नेशन, वन इलेक्शन' ही नहीं बल्कि 'वन वोटर लिस्ट' की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि यदि पूरे देश में एक समान मतदाता सूची तैयार की जाती है तो चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, सरल और व्यवस्थित बन सकेगी। इससे मतदाता सूची तैयार करने में लगने वाले समय और संसाधनों की भी बचत होगी।
'विकसित भारत' के लक्ष्य को मिलेगी नई गति
ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'विकसित भारत' का जो संकल्प देश के सामने रखा है, उसे साकार करने के लिए प्रशासनिक निरंतरता अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि बार-बार चुनावों के कारण प्रशासनिक मशीनरी विकास कार्यों से हटकर चुनावी व्यवस्थाओं में व्यस्त रहेगी तो विकास की गति प्रभावित होना स्वाभाविक है। ऐसे में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' इस दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकता है।

उपमुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने भी जताया समर्थन
बैठक में उपस्थित उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
सभी नेताओं का मानना था कि यदि देश में एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और विकास कार्यों को निरंतर गति मिलेगी।
जयवीर सिंह बोले— सभी दलों को सकारात्मक सोच के साथ आगे आना चाहिए
उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने भी बैठक में अपने विचार रखते हुए कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' देशहित में एक महत्वपूर्ण सुधार है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्यापक सुधारों पर सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और समाज के प्रत्येक वर्ग को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उनका विश्वास है कि इस व्यवस्था के लागू होने से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।
लोकतांत्रिक सुधारों पर बढ़ी राष्ट्रीय बहस
देश में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का विषय लंबे समय से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। केंद्र सरकार इसे प्रशासनिक दक्षता, वित्तीय बचत और विकास कार्यों की निरंतरता से जोड़कर देख रही है, जबकि इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों और संवैधानिक विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग मत भी सामने आते रहे हैं।
लखनऊ में हुई यह उच्चस्तरीय बैठक इस दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार की स्पष्ट सोच को सामने लाती है। बैठक में मौजूद नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो लोकतंत्र और विकास दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।
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