गौतमबुद्धनगर में खाद्य पदार्थों और दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य विकास अधिकारी भाल चंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय समिति की बैठक में खाद्य प्रतिष्ठानों, रेस्टोरेंट, ढाबों, स्कूल-कॉलेजों और छात्रावासों की कैंटीनों में नियमित व आकस्मिक निरीक्षण तथा सघन सैंपलिंग के निर्देश दिए गए। मिलावट की पुष्टि होने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई और जुर्माने के निर्देश दिए गए हैं।
गौतमबुद्धनगर में अब खाने की थाली से लेकर दवा की दुकान तक गुणवत्ता जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आम लोगों को शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ तथा मानकों के अनुरूप दवाइयां उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसी दिशा में बुधवार, 30 सितंबर 2026 को कलेक्ट्रेट सभागार में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जिला स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी भाल चंद्र त्रिपाठी ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद में खाद्य एवं पेय पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी तरीके से पालन कराना रहा।
खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश
बैठक में सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय सर्वेश कुमार मिश्रा और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीरेंद्र द्विवेदी ने खाद्य सुरक्षा को लेकर हाल के दिनों में की गई प्रवर्तन कार्रवाई, निरीक्षण और सैंपलिंग अभियान की विस्तृत जानकारी मुख्य विकास अधिकारी के सामने रखी।

समीक्षा के दौरान सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर खाद्य एवं पेय पदार्थों की सघन सैंपलिंग कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर किसी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि यदि प्रयोगशाला जांच में किसी खाद्य नमूने में मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही नियमों के तहत जुर्माना और अन्य दंडात्मक प्रावधान तत्काल लागू करने के निर्देश भी दिए गए।
रेस्टोरेंट से लेकर स्कूल कैंटीन तक होगी निगरानी
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को जिले में संचालित खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें केवल बाजारों और सामान्य खाद्य दुकानों को ही शामिल नहीं किया गया है, बल्कि रेस्टोरेंट, ढाबे, स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों की कैंटीन भी जांच के दायरे में रहेंगी।
सीडीओ ने इन स्थानों पर नियमित और आकस्मिक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोगों और विद्यार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिल रहा है।
खास तौर पर स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों की कैंटीन में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता महत्वपूर्ण मानी गई है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी रोजाना भोजन और पेय पदार्थों का सेवन करते हैं।

फूड फोर्टिफिकेशन और इस्तेमाल किए गए तेल पर भी जोर
बैठक में खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। मुख्य विकास अधिकारी ने फूड फोर्टिफिकेशन, रीयूज्ड कुकिंग ऑयल के सुरक्षित निस्तारण और शुद्ध खाद्य एवं पेय पदार्थों के उपयोग को लेकर विस्तृत एडवाइजरी तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि केवल कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आम लोगों को भी खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाना जरूरी है। इसलिए तैयार की जाने वाली एडवाइजरी का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए गए, ताकि लोग मिलावट, खाद्य गुणवत्ता और इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल से जुड़े जोखिमों के बारे में जानकारी हासिल कर सकें।
अब दवाइयों और कॉस्मेटिक उत्पादों की भी नियमित जांच
बैठक में खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ औषधियों की गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई। औषधि निरीक्षक ने जनपद में मानकों के अनुरूप दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी मुख्य विकास अधिकारी को दी।

समीक्षा के दौरान सीडीओ ने ब्लड बैंक, मेडिकल स्टोर्स, दवा निर्माण इकाइयों और कॉस्मेटिक उत्पादों की नियमित और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध हों। दवा निर्माण और बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठानों की निगरानी को लेकर भी अधिकारियों को सक्रियता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
मुख्य विकास अधिकारी ने बैठक में मौजूद सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि खाद्य सुरक्षा और औषधियों की गुणवत्ता से जुड़े मामलों में पूर्ण सक्रियता, जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ कार्रवाई की जाए।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि जिले के लोगों को एक ओर जहां शुद्ध और सुरक्षित खाद्य एवं पेय पदार्थ उपलब्ध हों, वहीं दूसरी ओर उन्हें गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित दवाइयां भी मिलें।
बैठक में जिला पूर्ति अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, औषधि निरीक्षक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
गौतमबुद्धनगर में हुई इस बैठक के बाद अब खाद्य प्रतिष्ठानों, रेस्टोरेंट, ढाबों, शिक्षण संस्थानों की कैंटीनों और औषधि से जुड़े प्रतिष्ठानों की निगरानी पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। प्रयोगशाला जांच में मिलावट सामने आने पर कार्रवाई के निर्देशों के बीच आने वाले दिनों में सैंपलिंग और निरीक्षण अभियान और तेज हो सकता है।
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