गाजियाबाद के रामलीला मैदान कविनगर में जिला प्रशासन और सिविल डिफेंस की ओर से विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर चित्र प्रदर्शनी आयोजित की गई। राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कश्यप ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस दौरान विभाजन के प्रत्यक्षदर्शी वरिष्ठ नागरिकों ने अपने अनुभव साझा किए और शहीद परिवारों को सम्मानित किया गया।
14 अगस्त 1947… एक ऐसा दिन जब देश आजादी की दहलीज पर खड़ा था। करोड़ों लोगों के लिए यह गर्व और उत्सव का समय था, लेकिन इसी दौर में लाखों परिवारों की जिंदगी ऐसी त्रासदी में बदल गई, जिसकी टीस पीढ़ियों तक महसूस की गई।
विभाजन की इसी भयावह स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुक्रवार को गाजियाबाद के रामलीला मैदान, कविनगर में जिला प्रशासन एवं सिविल डिफेंस की ओर से विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
प्रदर्शनी का उद्घाटन पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कश्यप ने किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने महर्षि विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं के साथ चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
तस्वीरों में विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, पीड़ा और उस समय की परिस्थितियों को दर्शाया गया। प्रदर्शनी का उद्देश्य सिर्फ इतिहास दिखाना नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को यह समझाना भी रहा कि आजादी की कीमत और देश के बंटवारे की त्रासदी कितनी गहरी थी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि विभाजन की विभीषिका देश की संस्कृति, सामाजिक ढांचे और आजादी की रक्षा के प्रति प्रत्येक नागरिक के दायित्व की याद दिलाती है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ 14 अगस्त 1947 को पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा था, वहीं दूसरी तरफ धर्म के नाम पर देश का विभाजन हुआ।
राज्यमंत्री ने कहा कि भारत की एकता और अखंडता के लिए यह बेहद दुखद अध्याय रहा। उनके मुताबिक विभाजन से करीब दो से तीन करोड़ लोग बुरी तरह प्रभावित हुए।
उन्होंने कहा कि विभाजन को देश की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जाता है। उस दौरान कितने लोगों की जान गई, इसकी कोई सर्वमान्य और प्रमाणिक संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन भारत और दूसरे देशों में सामने आए विभिन्न दावों के आधार पर करीब 20 लाख लोगों की हत्या का अनुमान लगाया जाता है।

उन्होंने युवा पीढ़ी से इस इतिहास को समझने की अपील करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में जितने लोग शहीद हुए, उससे कई गुना लोगों की जान देश की आजादी के बाद हुए विभाजन में चली गई।
कार्यक्रम का सबसे भावुक हिस्सा उस समय देखने को मिला, जब अविभाजित भारत से गाजियाबाद आकर बसे वरिष्ठ नागरिकों ने विभाजन की अपनी यादें साझा कीं।
वरिष्ठ नागरिक जगदीश साधना, विनय कक्कड़ और रमन मिलगानी समेत अन्य लोगों ने उस दौर से जुड़े अपने अनुभव सुनाए।
उनकी बातों में केवल इतिहास नहीं था, बल्कि वह दर्द था जिसे उन्होंने स्वयं जिया था। घर छोड़ने की मजबूरी, विस्थापन और अनिश्चित भविष्य जैसी परिस्थितियों ने किस तरह परिवारों की जिंदगी बदल दी, इसकी झलक उनके अनुभवों में दिखाई दी।
इन अनुभवों ने प्रदर्शनी में लगी तस्वीरों को और अधिक जीवंत बना दिया। तस्वीरें जहां उस दौर का दृश्य दिखा रही थीं, वहीं प्रत्यक्षदर्शियों की बातें उस इतिहास के पीछे छिपी मानवीय पीड़ा को सामने ला रही थीं।
शहीद परिवारों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के परिवारों को भी सम्मानित किया गया।
राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने शहीद परिवारों को अपने हाथों से सम्मान प्रदान किया। इस दौरान मौजूद लोगों ने शहीदों के त्याग और बलिदान को नमन किया।
कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले परिवारों के योगदान को हमेशा याद रखा जाना चाहिए।
आज की पीढ़ी को इतिहास से सीख लेने की जरूरत—राज्यमंत्री
नरेंद्र कश्यप ने अपने संबोधन में वर्तमान परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सीमाएं सुरक्षित हुई हैं।
उन्होंने पड़ोसी देश की ओर से आतंकवाद के जरिए भारत को कमजोर करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा जवाब दिया और पाकिस्तान में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाया।
राज्यमंत्री ने यह भी कहा कि दूसरे देशों से भारत आए करीब 50 हजार सिख, हिंदू और अन्य समुदायों के लोगों को नागरिकता देने की दिशा में योगी सरकार काम कर रही है।
उनके मुताबिक विभाजन से जुड़ी घटनाओं और उसके बाद विस्थापित परिवारों की समस्याओं को समझना जरूरी है, ताकि वर्तमान और आने वाली पीढ़ी देश की एकता और अखंडता का महत्व समझ सके।

प्रदर्शनी के उद्घाटन के बाद महर्षि विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं ने भी इसका अवलोकन किया।
युवाओं की मौजूदगी इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। क्योंकि विभाजन की घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी अब धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं। ऐसे में तस्वीरों, दस्तावेजों और प्रत्यक्षदर्शियों की स्मृतियों के जरिए उस दौर की जानकारी अगली पीढ़ी तक पहुंचाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि इतिहास को सिर्फ किताबों में पढ़ना पर्याप्त नहीं है। इतिहास के पीछे छिपे संघर्ष, पीड़ा और बलिदान को समझना भी उतना ही जरूरी है।
इन लोगों की रही प्रमुख मौजूदगी
चित्र प्रदर्शनी के उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन ललित जायसवाल ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन अनिल अग्रवाल ने किया।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरव, एडीएम सिटी विकास कश्यप, जिला सूचना अधिकारी योगेंद्र प्रताप सिंह, सिविल डिफेंस की उप नियंत्रक अनुराधा सिंह, भाजपा नेता सरकार एसपी सिंह, सिविल डिफेंस के डिवीजनल वार्डन दीपक अग्रवाल, सतीश चोपड़ा और हरमीत बख्शी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी रही और सभी ने विभाजन की त्रासदी तथा देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को याद किया।
अंतिम संदेश
गाजियाबाद के रामलीला मैदान में लगी यह प्रदर्शनी केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं थी। यह उन परिवारों की कहानी थी, जिन्होंने इतिहास की सबसे कठिन परिस्थितियों में अपना घर, जमीन और कभी-कभी अपने अपनों तक को खो दिया।
विभाजन का इतिहास हमें यह याद दिलाता है कि देश की एकता कोई सामान्य उपलब्धि नहीं, बल्कि पीढ़ियों के संघर्ष और बलिदान से मिली विरासत है। इसे सुरक्षित रखना सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
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