अयोध्या में ISICPM 2026 का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न हो गया। समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अयोध्या मेडिकल कॉलेज के लिए ICU हब एंड स्पोक मॉडल, नए सुपर-स्पेशियलिटी विभाग, अत्याधुनिक कैथ लैब और कैंपस में स्टाफ आवास जैसी कई बड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं की घोषणा की।
अयोध्या में अब सिर्फ धार्मिक और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई रफ्तार देने की तैयारी दिखाई दे रही है। देशभर के विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी में आयोजित इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटेंसिव केयर एंड पेरिऑपरेटिव मेडिसिन यानी ISICPM 2026 के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने अयोध्या मेडिकल कॉलेज के लिए कई बड़े हेल्थकेयर विस्तार प्रस्तावों की घोषणा की।
2 से 4 अक्टूबर 2026 तक राजर्षि दशरथ ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज में आयोजित इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन एसजीपीजीआई लखनऊ के एनेस्थिसियोलॉजी एवं इंटेंसिव केयर विभाग ने अयोध्या मेडिकल कॉलेज के सहयोग से किया। सम्मेलन में देशभर के प्रमुख संस्थानों से 200 से ज्यादा क्लिनिकल विशेषज्ञों और पोस्ट-ग्रेजुएट रेजिडेंट्स ने हिस्सा लिया।
अयोध्या के लिए क्यों अहम हैं ये घोषणाएं?
समापन समारोह में ब्रजेश पाठक ने कहा कि अयोध्या में देश ही नहीं, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शहर में आधुनिक और मजबूत स्वास्थ्य सुविधाओं का होना समय की जरूरत है।
इसी जरूरत को देखते हुए अयोध्या मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कई योजनाओं की घोषणा की गई।
सबसे अहम योजना ICU सेवाओं को डिजिटल तरीके से SGPGI लखनऊ से जोड़ने की है। इसके तहत अयोध्या मेडिकल कॉलेज के ICU को डिजिटल 'हब एंड स्पोक' मॉडल के माध्यम से SGPGI से जोड़े जाने की योजना है। इसका उद्देश्य क्रिटिकल केयर बेड का बेहतर इस्तेमाल और गंभीर मरीजों के इलाज में विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराना है।

SGPGI की मुख्य इंटेंसिव केयर टीम रियल-टाइम मॉनिटरिंग और एडवांस्ड बेड आवंटन की ट्रैकिंग में मदद करेगी।
इसके अलावा अयोध्या मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी जैसे सुपर-स्पेशियलिटी विभाग विकसित करने की घोषणा की गई। यानी गंभीर न्यूरोलॉजिकल, किडनी और पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाने की जरूरत कम करने की कोशिश होगी।
दिल के मरीजों के लिए भी बड़ा ऐलान
अयोध्या मेडिकल कॉलेज में जल्द अत्याधुनिक कार्डियोलॉजी कैथ लैब स्थापित करने की भी घोषणा हुई। इसका फायदा स्थानीय मरीजों के साथ-साथ अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी मिल सकेगा।
दिल से जुड़ी आपात स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर कैथ लैब जैसी सुविधा उपलब्ध होने से जीवनरक्षक कार्डियक उपचार को तेजी से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
चौबीसों घंटे इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सेवाओं को सुचारु रखने के लिए मेडिकल कॉलेज कैंपस में ही फैकल्टी, नर्सिंग स्टाफ और सहायक पैरामेडिकल टीमों के लिए आवासीय सुविधा विकसित करने का वादा भी किया गया।
सम्मेलन में 'पेरिऑपरेटिव मेडिसिन' पर खास जोर
ISICPM 2026 की सबसे खास बात इसका पेरिऑपरेटिव मेडिसिन पर केंद्रित होना रहा। आसान भाषा में समझें तो पेरिऑपरेटिव मेडिसिन मरीज की सर्जरी की पूरी यात्रा को कवर करती है—ऑपरेशन से पहले की तैयारी, ऑपरेशन के दौरान की देखभाल और सर्जरी के बाद की निगरानी एवं उपचार।
इसका मूल विचार 'एक क्लिनिक, एक टीम, एक प्लान' है। यानी सर्जरी वाले मरीज की अलग-अलग मेडिकल जरूरतों को अलग-अलग हिस्सों में देखने के बजाय एक समन्वित व्यवस्था के तहत संभालना।
इस मॉडल में एनेस्थिसियोलॉजिस्ट की भूमिका भी ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं रहती। वे मरीज की पूरी उपचार यात्रा के दौरान मेडिकल देखभाल और सुरक्षा के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंतिम लक्ष्य सर्जरी को मरीज के लिए अधिक सुरक्षित, सहज और कम तनावपूर्ण बनाना है।
तीन दिन में 27 एक्सपर्ट लेक्चर और 75 रेजिडेंट्स की ट्रेनिंग
सम्मेलन के दौरान दो कार्यशालाएं, 27 एक्सपर्ट लेक्चर, दो सिम्पोजियम, एक पैनल डिस्कशन, एक पोस्ट-ग्रेजुएट क्विज और करीब 40 पोस्टर एवं पोडियम प्रेजेंटेशन आयोजित किए गए।
कुल 75 रेजिडेंट्स को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी गई, ताकि किताबों में पढ़े गए जटिल मेडिकल सिद्धांतों को वास्तविक क्लिनिकल परिस्थितियों में इस्तेमाल करने की समझ विकसित हो सके।

पहले दिन पॉइंट-ऑफ-केयर अल्ट्रासाउंड यानी POCUS और जटिल परिस्थितियों में एडवांस्ड एयरवे मैनेजमेंट की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान दिया गया।
वैज्ञानिक सत्रों में सटीक ब्लड मैनेजमेंट, थोरेसिक केयर, पीडियाट्रिक सर्जरी में सुरक्षा, मरीज की निगरानी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कार्डियोपल्मोनरी एक्सरसाइज टेस्टिंग यानी CPET पर लाइव मशीन मॉड्यूल और आधुनिक सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया पर तकनीकी चर्चा भी हुई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञता और सम्मान
सम्मेलन के दौरान डॉ. जे. बालावेन्कटसुब्रमण्यम, प्रेसिडेंट-इलेक्ट, वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज ऑफ एनेस्थिसियोलॉजिस्ट्स ने प्रतिष्ठित मेमोरियल लेक्चर दिया। उन्होंने मल्टी-डिसिप्लिनरी और परिणाम-आधारित पेरिऑपरेटिव मेडिसिन की दिशा में संरचनात्मक बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।
समापन समारोह में ब्रजेश पाठक ने विजयी पोस्ट-ग्रेजुएट रेजिडेंट्स और चुनिंदा फैकल्टी सदस्यों को अकादमिक पुरस्कार और सम्मान भी प्रदान किए। PG साइंटिफिक क्विज, पोडियम रिसर्च प्रेजेंटेशन और क्लिनिकल एब्स्ट्रैक्ट जैसी श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले चिकित्सकों को सम्मानित किया गया।
विज्ञान के साथ अयोध्या की संस्कृति का संगम
सम्मेलन सिर्फ चिकित्सा विज्ञान तक सीमित नहीं रहा। देशभर से आए प्रतिनिधियों के लिए अयोध्या की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा कार्यक्रम भी रखा गया।
250 से ज्यादा प्रतिभागियों के लिए श्रीराम जन्मभूमि में रामलला के दर्शन, सूरज कुंड और अयोध्या के ऐतिहासिक मंदिरों की यात्रा का आयोजन किया गया।
इस तरह ISICPM 2026 ने एक तरफ इंटेंसिव केयर और एनेस्थीसिया के क्षेत्र में शिक्षा, शोध और प्रोफेशनल विकास को मंच दिया, तो दूसरी तरफ अयोध्या की बदलती स्वास्थ्य जरूरतों को भी राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सम्मेलन में घोषित हेल्थकेयर योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से आकार लेती हैं और अयोध्या मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं में इनका असर कब दिखाई देता है।
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