सुल्तानपुर मंडी समिति के स्थलीय निरीक्षण में कई खामियां मिलने पर राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने सख्त निर्देश दिए। अवैध कब्जे 15 दिन में हटाने, कब्जा समाप्ति का प्रमाण-पत्र आने तक प्रभारी सचिव का वेतन न आहरित करने, निर्माण गुणवत्ता की जांच, जलभराव और जाम की समस्या दूर करने के निर्देश दिए गए।
सुल्तानपुर मंडी समिति में व्यवस्थाओं और निर्माण कार्यों की हकीकत जानने पहुंचे राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने निरीक्षण के दौरान मिली खामियों पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को सिर्फ कमियां दूर करने की हिदायत नहीं दी, बल्कि कई मामलों में समयसीमा तय करते हुए जवाबदेही भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सबसे ज्यादा सख्ती मंडी परिसर में किए गए अवैध कब्जों को लेकर दिखाई गई। निदेशक ने टटर आदि के माध्यम से किए गए सभी अवैध कब्जों को 15 दिनों के भीतर पूरी तरह हटाने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, कब्जे पूरी तरह समाप्त होने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए जाने तक प्रभारी सचिव का वेतन आहरित न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यानी मंडी परिसर से अवैध कब्जे हटाने की जिम्मेदारी अब सीधे तौर पर तय कर दी गई है।
मंडी गेट पर बोर्ड तक नहीं मिला
निरीक्षण के दौरान मंडी गेट पर बोर्ड स्थापित न होने की बात भी सामने आई। इस पर निदेशक ने नाराजगी जताते हुए उपनिदेशक निर्माण को तत्काल उचित और प्रमुख स्थान पर बोर्ड लगवाने के निर्देश दिए।
मंडी जैसी सार्वजनिक और व्यावसायिक गतिविधियों वाली जगह पर प्रवेश द्वार की पहचान स्पष्ट होना जरूरी है। ऐसे में गेट पर बोर्ड का न होना भी निरीक्षण के दौरान अधिकारियों की नजर में आया।

ई-नाम कार्यालय के दरवाजे की गुणवत्ता पर भी सवाल
निरीक्षण सिर्फ साफ-सफाई और व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहा। मंडी परिसर में हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को भी बारीकी से देखा गया।
निदेशक को ई-नाम कार्यालय के दरवाजे के कब्जे खराब गुणवत्ता के पाए गए। इस पर उन्होंने संबंधित उपनिदेशक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न हो, इसे लेकर निदेशक ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जहां भी कमी मिलेगी, वहां जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सड़क निर्माण में कमी, सीसी ज्वाइंट पर खास नजर
मंडी परिसर में कराए गए सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए भी निदेशक को कुछ खामियां मिलीं। विशेष रूप से सीसी ज्वाइंट के पास सड़क की गुणवत्ता में कमी सामने आई।
इस पर जितेंद्र प्रताप सिंह ने संबंधित अधिकारियों को सड़क निर्माण कार्य की जांच कराने के निर्देश दिए। साथ ही जहां जरूरत हो, वहां आवश्यक मरम्मत कराने और निर्माण कार्य में कमी के लिए दोषी या उत्तरदायी व्यक्ति का दायित्व निर्धारित करने को कहा।
इस निर्देश से साफ है कि निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद भी उसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी से संबंधित अधिकारी या कार्यदायी पक्ष बच नहीं पाएंगे।
बरसात में जलभराव से स्थायी राहत की तैयारी
सुल्तानपुर मंडी में बरसात के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या भी निरीक्षण के दौरान चर्चा में रही।

निदेशक ने अधिकारियों को जलभराव का केवल अस्थायी समाधान करने के बजाय स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
मंडी में बारिश के दौरान जलभराव होने से व्यापारियों, किसानों और अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जल निकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाने और समस्या की जड़ तक पहुंचने पर जोर दिया गया।
मंडी के मुख्य मार्ग पर जाम भी बना मुद्दा
निरीक्षण के दौरान मंडी में जाम की स्थिति को लेकर भी निदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने व्यापारियों को मंडी के पीछे की ओर व्यवस्थित करने की बात कही, ताकि मुख्य मार्ग पर अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था न हो।
निर्देश का उद्देश्य मुख्य मार्ग पर आवागमन को सुचारु बनाए रखना है, जिससे मंडी में आने-जाने वाले किसानों, व्यापारियों और अन्य लोगों को परेशानी न हो।
अब समयबद्ध अनुपालन की बारी
निरीक्षण के अंत में निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने सभी संबंधित अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा।
साथ ही निर्धारित समयावधि में अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यानी निरीक्षण के बाद अब अगली नजर इस बात पर रहेगी कि मौके पर मिली कमियों को वास्तव में कितनी तेजी से दूर किया जाता है।
खास तौर पर 15 दिनों में अवैध कब्जे हटाने, उनके पूर्णतः समाप्त होने का प्रमाण-पत्र देने और तब तक प्रभारी सचिव का वेतन आहरित न किए जाने का निर्देश इस पूरे निरीक्षण का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है।
मंडी में निर्माण गुणवत्ता, जलभराव, जाम और अवैध कब्जों जैसे मुद्दों पर एक साथ कार्रवाई के निर्देश देकर निदेशक ने साफ कर दिया है कि निरीक्षण केवल खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। अब असली परीक्षा अधिकारियों के स्तर पर होने वाली कार्रवाई और उसकी रिपोर्ट से होगी।
COMMENTS