Greater Noida के IIMT College में फीस वसूली को लेकर छात्र ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र का दावा है कि निर्धारित फीस और डिस्काउंट के बावजूद उससे ₹2.20 लाख लिए गए और इतनी ही रकम ERP पोर्टल पर दर्ज है।
ग्रेटर नोएडा स्थित IIMT कॉलेज में फीस वसूली को लेकर एक छात्र ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्र का आरोप है कि निर्धारित फीस और डिस्काउंट की व्यवस्था के बावजूद उससे कथित तौर पर ₹2.20 लाख की फीस वसूली गई, जबकि उसके मुताबिक उसकी फीस करीब ₹1.60 लाख के आसपास बनती थी। छात्र का दावा है कि संबंधित फीस की रकम यूनिवर्सिटी के ERP पोर्टल पर भी ₹2.20 लाख के रूप में दर्ज दिखाई दे रही है।

छात्र ने इस पूरे मामले में न्याय की गुहार लगाई है और सवाल उठाया है कि आखिर फीस की रकम ERP पोर्टल पर किस आधार पर बढ़ाई गई।
₹1.60 लाख की फीस, फिर ₹2.20 लाख कैसे?
छात्र द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक, कॉलेज में उसकी फीस करीब ₹1.60 लाख निर्धारित थी। लेकिन कथित तौर पर उससे ₹2.20 लाख की फीस ली गई। छात्र का सवाल है कि अगर कॉलेज की निर्धारित फीस एक निश्चित राशि थी, तो ERP पोर्टल पर अतिरिक्त राशि किस आधार पर दर्ज की गई?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि फीस की जानकारी ERP सिस्टम में किस स्तर पर दर्ज और स्वीकृत होती है और उसमें बदलाव करने का अधिकार किसके पास होता है?

₹1.83 लाख फीस पर ₹23 हजार का डिस्काउंट, फिर इस छात्र से क्यों नहीं?
छात्र ने फीस स्ट्रक्चर को लेकर एक और गंभीर दावा किया है। उसके मुताबिक, ₹1.83 लाख की फीस पर करीब ₹23 हजार का डिस्काउंट दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि यह डिस्काउंट व्यवस्था लागू थी, तो संबंधित छात्र से कथित तौर पर ₹2.20 लाख क्यों वसूले गए?
क्या छात्र की कैटेगरी, कोर्स, एडमिशन वर्ष या अन्य किसी शर्त के कारण फीस अलग थी? या फिर फीस रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी हुई? इन सवालों का जवाब कॉलेज प्रशासन की ओर से स्पष्ट रूप से सामने आना अभी बाकी है।
ERP पोर्टल पर दर्ज रकम ने बढ़ाए सवाल
इस मामले को गंभीर बनाने वाली बात छात्र का यह दावा है कि केवल मौखिक तौर पर फीस अधिक नहीं मांगी गई, बल्कि यूनिवर्सिटी के ERP पोर्टल पर भी ₹2.20 लाख की फीस दर्ज दिखाई दे रही है।
यदि ERP में दर्ज रकम और कॉलेज द्वारा निर्धारित वास्तविक फीस में अंतर है, तो इसकी जांच जरूरी हो जाती है कि पोर्टल पर यह राशि किस अधिकारी या विभाग के माध्यम से दर्ज की गई।
छात्र का आरोप है कि इस पूरे मामले में कॉलेज के कुछ शिक्षक भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, किस शिक्षक की क्या भूमिका है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि Bharat News 360 TV नहीं करता है। किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले संबंधित दस्तावेजों और कॉलेज प्रशासन के जवाब की जांच जरूरी है।

सवाल सिर्फ एक छात्र का नहीं, फीस सिस्टम की पारदर्शिता का
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर एक ही कोर्स या समान फीस स्ट्रक्चर में छात्रों से अलग-अलग रकम ली जा रही है, तो इसका आधार क्या है?
- निर्धारित फीस कितनी थी?
- छात्र को मिलने वाला डिस्काउंट कितना था?
- ERP में ₹2.20 लाख किस आधार पर दर्ज हुए?
- फीस एंट्री किस कर्मचारी या अधिकारी ने की?
- क्या छात्र को फीस का पूरा ब्रेकअप उपलब्ध कराया गया?
- क्या कॉलेज के सभी छात्रों के ERP रिकॉर्ड और फीस रसीदों में समानता है?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामला फीस में किसी तकनीकी/प्रशासनिक गलती का है या जानबूझकर अतिरिक्त फीस वसूली का।
कॉलेज प्रशासन का जवाब महत्वपूर्ण
ऐसे मामले में कॉलेज प्रशासन का पक्ष बेहद महत्वपूर्ण है। IIMT कॉलेज से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित छात्र के लिए निर्धारित फीस कितनी थी, उसे कितना डिस्काउंट मिलना था और ERP पोर्टल पर ₹2.20 लाख की राशि किस आधार पर दर्ज हुई।
यदि कॉलेज प्रशासन के पास फीस बढ़ने का वैध और दस्तावेजी आधार है, तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए ताकि छात्र और उसके परिवार की आशंकाएं दूर हो सकें।
वहीं, यदि ERP रिकॉर्ड में गलती हुई है तो उसे सुधारने और छात्र से अतिरिक्त ली गई राशि के निपटारे को लेकर भी स्पष्ट प्रक्रिया सामने आनी चाहिए।
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