दिल्ली-NCR में CNG 3.89 रुपये प्रति किलो महंगी होकर 86.98 रुपये पहुंच गई है। ऑटो-टैक्सी यूनियनों ने एक सप्ताह में किराया बढ़ाने या CNG सब्सिडी देने की मांग की है। मांग पूरी न होने पर 9 सितंबर को हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
दिल्ली-एनसीआर में रोजाना ऑटो और टैक्सी से सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर जल्द ही अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। CNG की कीमत में अचानक बढ़ोतरी के बाद ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। यूनियनों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच मौजूदा किराए पर वाहन चलाना ड्राइवरों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।
मामला सिर्फ किराया बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं है। यूनियनों ने सरकार को एक तरह से समयसीमा भी दे दी है। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में 9 सितंबर को हड़ताल की चेतावनी दी गई है। अगर सरकार और यूनियनों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो इसका सीधा असर दिल्ली-एनसीआर की ऑटो-टैक्सी सेवाओं और रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों पर पड़ सकता है।
CNG महंगी हुई तो बढ़ा ड्राइवरों का खर्च
दिल्ली-एनसीआर में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए CNG लंबे समय से प्रमुख ईंधन विकल्पों में शामिल रही है। ऐसे में CNG की कीमत में होने वाली हर बढ़ोतरी का सीधा असर वाहन चलाने की लागत पर पड़ता है।
हालिया बढ़ोतरी के बाद ड्राइवरों का कहना है कि पहले से बढ़े हुए खर्च के बीच अब ईंधन पर अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ रही है। यूनियनों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में CNG के दाम कुल मिलाकर करीब 10 से 11 रुपये प्रति किलो तक बढ़ चुके हैं।
यूनियन का तर्क है कि जब ईंधन, वाहन के रखरखाव और दूसरे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, तो लंबे समय से चले आ रहे किराए में बदलाव किए बिना ड्राइवरों के लिए अपनी रोजाना की कमाई बनाए रखना मुश्किल है।
सरकार से एक हफ्ते में किराया बढ़ाने की मांग
ऑटो रिक्शा एसोसिएशन और दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन के महासचिव राजेंद्र सोनी ने सरकार से मौजूदा किराए की समीक्षा कर जल्द नई दरें लागू करने की मांग की है।
यूनियन ने सरकार से कहा है कि एक सप्ताह के भीतर किराए में बढ़ोतरी की जाए, ताकि CNG की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ सीधे ड्राइवरों पर न पड़े।
यूनियन का कहना है कि किराया बढ़ाना अगर तत्काल संभव नहीं है, तो सरकार को वैकल्पिक राहत देनी चाहिए। इसके लिए CNG पर बढ़ी कीमत के अनुपात में ड्राइवरों को सब्सिडी देने की मांग भी रखी गई है।
यानी यूनियनों के सामने फिलहाल दो विकल्प हैं—या तो यात्रियों से लिया जाने वाला किराया बढ़ाया जाए या फिर सरकार बढ़ी हुई CNG कीमत का कुछ बोझ खुद उठाकर ड्राइवरों को राहत दे।
9 सितंबर को हड़ताल की चेतावनी
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यूनियनों की हड़ताल की चेतावनी है। राजेंद्र सोनी ने कहा है कि अगर उनकी मांग पर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो 9 सितंबर को हड़ताल की जा सकती है।
हड़ताल की स्थिति में दिल्ली और आसपास के इलाकों में ऑटो और टैक्सी की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है। इसका सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ सकता है जो रोजाना दफ्तर, कॉलेज, बाजार, अस्पताल और दूसरे जरूरी कामों के लिए सार्वजनिक परिवहन के साथ ऑटो-टैक्सी पर निर्भर रहते हैं।
हालांकि, अभी हड़ताल अंतिम रूप से हुई है या नहीं, यह सरकार और यूनियनों के बीच बातचीत के नतीजे पर निर्भर करेगा। फिलहाल यूनियनों की ओर से चेतावनी सामने आई है।
दिल्ली में कितनी पहुंची CNG की कीमत?
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड यानी IGL के मुताबिक, शनिवार से दिल्ली और आसपास के शहरों में CNG की कीमत में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है।
इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG की कीमत करीब 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है।
ईंधन की कीमत में यह वृद्धि ऐसे समय हुई है जब ऑटो-टैक्सी चालक पहले से ही अपने रोजाना के परिचालन खर्च को लेकर चिंता जता रहे हैं। यूनियनों का कहना है कि CNG के दाम बढ़ने के बाद अगर किराए में संशोधन नहीं किया गया तो ड्राइवरों की वास्तविक कमाई और घट सकती है।
यात्रियों की जेब पर क्या पड़ेगा असर?
अगर सरकार यूनियनों की मांग स्वीकार करती है और ऑटो-टैक्सी का किराया बढ़ता है, तो इसका सीधा असर यात्रियों के रोजाना के परिवहन खर्च पर पड़ेगा।
दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, छात्र, वरिष्ठ नागरिक और ऐसे लोग जो छोटी दूरी के लिए ऑटो या टैक्सी पर निर्भर हैं, उन्हें हर यात्रा के लिए पहले से अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।
वहीं दूसरी तरफ ड्राइवरों का तर्क है कि किराया बढ़ाना उनके लिए कमाई बढ़ाने का जरिया नहीं, बल्कि बढ़ती परिचालन लागत को संतुलित करने की जरूरत है।
अब सरकार के फैसले पर टिकी नजर
फिलहाल पूरा मामला सरकार के अगले कदम पर टिका हुआ है। एक तरफ CNG की कीमत बढ़ने से ड्राइवरों का खर्च बढ़ा है, तो दूसरी तरफ किराया बढ़ने की स्थिति में यात्रियों की जेब पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि ड्राइवरों को राहत भी मिले और यात्रियों पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े।
अगर अगले कुछ दिनों में किराए को लेकर कोई समाधान नहीं निकलता है, तो 9 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल दिल्ली-एनसीआर के परिवहन तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
फिलहाल दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों की नजर इसी बात पर है कि क्या सरकार CNG की बढ़ी कीमत का समाधान किराया बढ़ाकर करेगी, ड्राइवरों को सब्सिडी देगी या फिर बातचीत से हड़ताल टालने का रास्ता निकलेगा?
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