लखनऊ के Aashiyana इलाके में 49 वर्षीय मानवेंद्र सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी बेटे अक्षत को मौके पर ले जाकर क्राइम सीन रीक्रिएट किया। हत्या के बाद शव के टुकड़े कर जंगल में फेंकने और धड़ को नीले ड्रम में छिपाने का खुलासा हुआ है। कई सवाल अब भी जांच के घेरे में हैं।
राजधानी लखनऊ के Aashiyana क्षेत्र के सेक्टर-एल में हुए सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। 20 फरवरी को 49 वर्षीय मानवेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने उनके बेटे अक्षत को गिरफ्तार किया है।
मंगलवार को पुलिस आरोपी अक्षत को घटनास्थल पर लेकर पहुंची और करीब 33 मिनट तक क्राइम सीन रीक्रिएट किया। घर के हर हिस्से की बारीकी से जांच की गई और महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। इस दौरान घर में दादी-बाबा और अन्य रिश्तेदार मौजूद थे।
पुलिस के अनुसार, अक्षत ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उसने पिता की गोली मारकर हत्या की। उसका कहना है कि पिता प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर दबाव बना रहे थे, जबकि उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता था। इसी नाराजगी में उसने यह कदम उठाया।
रीक्रिएशन के दौरान अक्षत ने बताया कि विवाद के समय पिता ने गद्दे के नीचे रखी रायफल निकाली थी। बाद में रायफल नीचे रखने पर उसने उसे उठाकर पिता को गोली मार दी।

हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसने तीसरी मंजिल से नीचे तक शव को घसीटा। शव भारी होने के कारण वह उसे बाहर नहीं ले जा सका। उसने कार घर के अंदर तक लाने की कोशिश की, लेकिन शव कार में नहीं रख पाया। इसके बाद वह एक नीला ड्रम लेकर आया और कमरे के अंदर आरी से हाथ-पैर काट दिए। कटे अंगों को पारा के जंगल में फेंक दिया और धड़ को पॉलीथीन में भरकर ड्रम में छिपा दिया। ड्रम के ऊपर रजाई और कपड़े भर दिए ताकि किसी को शक न हो।
उसने पिता के तीनों मोबाइल फोन बंद कर दिए और मुहल्ले में लापता होने तथा आत्महत्या की अफवाह फैलाई। 23 फरवरी को खुद ही थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। लेकिन पुलिस की जांच में पूरा मामला खुल गया।
अक्षत ने यह भी बताया कि वह शव जलाने के लिए 40 लीटर तारपीन का तेल लाया था, लेकिन उससे पहले ही पकड़ा गया।
सहायक पुलिस आयुक्त कैंट Abhay Pratap Mall ने बताया कि आरोपी ने हत्या की बात स्वीकार की है। कई बिंदुओं पर जांच जारी है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या अक्षत अकेला था या साजिश में कोई और भी शामिल है।

मामले से जुड़े कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। घर में वाई-फाई टावर होने के बावजूद सीसीटीवी कैमरा नहीं था। तड़के गोली चलने की आवाज किसी पड़ोसी ने नहीं सुनी। मानवेंद्र का शरीर भारी था, ऐसे में शव को अकेले नीचे लाना भी सवाल खड़े करता है।
पड़ोसियों के अनुसार, मानवेंद्र समाजसेवी प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और रामलीला का आयोजन कराते थे। विडंबना यह है कि अक्षत रामलीला में रावण का किरदार निभाता था।
पोस्टमार्टम चिकित्सकों के पैनल ने किया है। पुलिस अब हर पहलू से जांच कर रही है ताकि इस हत्याकांड की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
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