मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, नौवहन सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत की कूटनीति एक बार फिर सक्रिय नजर आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर अहम बातचीत की।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
ईद और नौरोज की शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत की शुरुआत ईद और नौरोज के अवसर पर शुभकामनाएं देकर की। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये पर्व पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आएंगे।
यह पहल न सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा थी, बल्कि मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में सकारात्मक संदेश देने की कोशिश भी थी।
हमलों की निंदा और चिंता
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की।
उन्होंने कहा कि ऐसे हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं, बल्कि इससे वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है।
नौवहन सुरक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि नौकायन की स्वतंत्रता को बनाए रखना बेहद जरूरी है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी जहाजरानी मार्ग खुले और सुरक्षित रहें।
मिडिल ईस्ट के समुद्री रास्ते वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, ऐसे में इनकी सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकता बन जाती है।
इस बातचीत में एक अहम मुद्दा ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी रहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान सरकार द्वारा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए दिए जा रहे सहयोग की सराहना की और उम्मीद जताई कि यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम को भारत की संतुलित विदेश नीति के रूप में देखा जा रहा है।
एक ओर जहां क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है, वहीं भारत शांति, संवाद और सहयोग के जरिए हालात को संभालने की कोशिश कर रहा हैलेकिन बड़ा सवाल यही है—
क्या इस बातचीत से मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव पर कोई असर पड़ेगा?
क्या वैश्विक स्तर पर स्थिरता बहाल हो पाएगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही मिल पाएंगे।
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