बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ कथित बदसलूकी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया और उसके पैर में गोली लगी। दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पकड़ा गया है। पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक पांच लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि घटना से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।
बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ सड़क पर कथित छेड़खानी और बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुई पुलिस कार्रवाई अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान नंदन के पैर में गोली लगी। एक अन्य आरोपी हरेराम यादव को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। ताजा गिरफ्तारियों के बाद इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की संख्या पांच हो गई है।
मुठभेड़ की परिस्थितियों को लेकर पुलिस का कहना है कि आरोपी को पकड़ने की कार्रवाई के दौरान उसने भागने की कोशिश की और पुलिस से मुठभेड़ हुई। कुछ रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से यह भी कहा गया है कि नंदन ने पुलिस पर गोली चलाई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। इन परिस्थितियों की आधिकारिक जांच और विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
19 सितंबर की घटना के बाद वायरल हुआ था वीडियो
पुलिस के अनुसार घटना 19 सितंबर की शाम की है। एक नाबालिग छात्रा अपने छात्र मित्र के साथ जमुई के एक इलाके में गई थी। इसी दौरान कुछ युवकों और नाबालिगों ने दोनों को रोक लिया और छात्रा के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। वायरल वीडियो में युवकों का एक समूह दोनों किशोरों को घेरता दिखाई देता है। पुलिस ने वीडियो के आधार पर पीड़ितों की पहचान की और उनके बयान दर्ज किए। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।
पुलिस के मुताबिक घटना स्थल जमुई थाना क्षेत्र में है और मुख्य सड़क से करीब तीन किलोमीटर दूर बताया गया है। शुरुआती जांच में तीन नाबालिगों को पकड़ा गया था। बाद में अन्य आरोपियों की पहचान की गई। मामले में POCSO एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की गई है।

वीडियो सामने आने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने विशेष जांच टीम यानी SIT गठित की थी। जांच में वायरल वीडियो के फ्रेम और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही थी।
मुंगेर रेंज के डीआईजी राकेश कुमार के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और पूछताछ के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर आगे गिरफ्तारी हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि वायरल वीडियो से घटना में शामिल लोगों की पूरी संख्या स्पष्ट नहीं थी। पुलिस ने अब तक मुख्य आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई की है।
पुलिस के मुताबिक हरेराम यादव उस समूह का नेतृत्व कर रहा था, जबकि वायरल वीडियो में उसका चेहरा गमछे से ढका हुआ दिखाई दिया था। नंदन यादव की पहचान भी वीडियो में मौजूद व्यक्ति के तौर पर की गई है।
वीडियो वायरल करने वालों पर भी पुलिस की नजर
मामले में पुलिस ने सिर्फ मूल घटना की जांच तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। नाबालिग से संबंधित वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने को लेकर भी पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है।
बिहार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि पीड़िता से संबंधित वीडियो, फोटो या कोई ऐसी पोस्ट साझा अथवा फॉरवर्ड न करें जिससे उसकी पहचान उजागर हो। पुलिस ने चेताया है कि नाबालिग की पहचान उजागर करने वाली सामग्री को प्रसारित करना कानून के तहत अपराध हो सकता है।
पुलिस के अनुसार वायरल सामग्री से जुड़े 13 फेसबुक, 12 इंस्टाग्राम और 7 एक्स अकाउंट के खिलाफ टेकडाउन कार्रवाई की गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर वीडियो फैलाने वालों की भूमिका की जांच जारी है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अश्वमेध देवी ने भी मामले में कार्रवाई की जानकारी दी है। उनके अनुसार वीडियो जारी करने वाले व्यक्ति समेत करीब 120 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
सुनसान इलाके को लेकर भी उठे सवाल
घटना जिस इलाके में हुई, उसे लेकर स्थानीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार मड़वा पहाड़ी की ओर जाने वाली सड़क शाम के बाद अपेक्षाकृत सुनसान हो जाती है। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि पहले भी वहां ऐसी घटनाएं हुई हैं, हालांकि कई मामले सामाजिक दबाव या लोकलाज के कारण पुलिस तक नहीं पहुंच सके।
ऐसे में इस घटना ने उस क्षेत्र में पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इन स्थानीय दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
जमुई मामले के बाद बिहार की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हुई है। विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पटना के कारगिल चौक पर प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की।
वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती और जो अपराधी पुलिस को चुनौती देंगे, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। उनके इस बयान को जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई से जोड़कर भी देखा गया है।
जदयू विधायक अनंत सिंह ने भी घटना पर बेहद कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात कही। दूसरी ओर विपक्षी नेताओं ने सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
इस पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोगों की पहचान कब तक होती है और जांच में उनकी भूमिका क्या सामने आती है। फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपियों तक पहुंचने और वीडियो प्रसार से जुड़े मामलों पर कार्रवाई का सिलसिला तेज कर दिया है।
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