उत्तर प्रदेश में कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा और कानून व्यवस्था को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान किया। कई नेताओं को नजरबंद किया गया, जबकि लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं में तीखी बहस व हल्का बल प्रयोग हुआ।
उत्तर प्रदेश में मनरेगा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर बुधवार को सियासी माहौल गरमा गया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन से पहले ही प्रशासन ने कई बड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया था, ताकि हालात काबू में रहें।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में सुबह 11 बजे विधानसभा मार्च का आह्वान किया गया था। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता राजधानी लखनऊ में विधानसभा घेराव के लिए पहुंचे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और तू-तू मैं-मैं की स्थिति बन गई।

प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया था। हालात तनावपूर्ण होते देख पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया, जिससे कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम को समाप्त करने जैसी घटनाएं सरकार की मंशा को दर्शाती हैं। वहीं अजय राय ने कहा कि बैरिकेडिंग और पुलिस घेरा लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, परीक्षाएं सही ढंग से नहीं हो रहीं और डर का माहौल बनाया जा रहा है।
अजय राय ने कहा कि लोकतंत्र डंडे और खौफ से नहीं, बल्कि विश्वास और संवाद से चलता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस हक की इस लड़ाई को जारी रखेगी और पीछे नहीं हटेगी।
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