मैक्रों के भारत दौरे में 10 साल के डिफेंस फ्रेमवर्क, 114 मेक इन इंडिया राफेल, HAMMER बम और स्कैल्प मिसाइल डील से संकेत मिल रहे हैं कि भारत का रक्षा झुकाव रूस से फ्रांस की ओर बढ़ रहा है।
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग एक नए दौर में प्रवेश करता दिख रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच अगले 10 वर्षों के लिए एक व्यापक डिफेंस फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब भारत के रक्षा क्षेत्र में रूस की जगह फ्रांस प्रमुख साझेदार बनने जा रहा है?
मैक्रों के साथ फ्रांस की रक्षा मंत्री Catherine Vautrin भी भारत आई हैं और भारतीय रक्षा मंत्री Rajnath Singh के साथ उच्चस्तरीय रक्षा संवाद में भाग ले रही हैं।
एक-दूसरे की सेना में तैनात होंगे अधिकारी
नए डिफेंस फ्रेमवर्क के तहत भारत और फ्रांस की थलसेनाओं में एक-दूसरे के सैन्य अधिकारी तैनात किए जाएंगे। यह पहली बार होगा जब भारतीय सेना में किसी विदेशी सेना के अधिकारी तैनात होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में फ्रांस भारतीय सेना के अनुभव से सामरिक प्रशिक्षण लाभ प्राप्त कर सकता है।
114 मेक इन इंडिया राफेल को मंजूरी
मैक्रों के दौरे से ठीक पहले रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल फाइटर जेट भारत में बनाने की मंजूरी दी है। फ्रांस की Dassault Aviation भारत की एक स्वदेशी कंपनी के साथ मिलकर देश में उत्पादन प्लांट स्थापित करेगी। लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस परियोजना में भविष्य में राफेल के मरीन वर्जन के निर्माण और एशियाई देशों को निर्यात की संभावना भी जताई जा रही है।

एयरबस-टाटा हेलीकॉप्टर प्लांट
बेंगलुरु के निकट Airbus और Tata Group द्वारा स्थापित संयुक्त हेलीकॉप्टर प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन किया जाएगा। यहां एच-125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर बनाए जाएंगे, जो सेना और वायुसेना के पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों की जगह लेंगे।
भारत में बनेंगे HAMMER बम
फ्रांस की Safran और Bharat Electronics Limited (बीईएल) के बीच भारत में HAMMER बम निर्माण का करार प्रस्तावित है। लगभग 70 किमी रेंज वाला यह स्टैंड-ऑफ वेपन राफेल, मिराज-2000 और एलसीए तेजस से दागा जा सकता है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में इनका इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों को निशाना बनाने में किया गया था।
400 स्कैल्प मिसाइल की खरीद
भारत राफेल के लिए करीब 400 स्कैल्प मिसाइल खरीदने की तैयारी में है, जिनकी मारक क्षमता लगभग 300 किमी है। इनका उपयोग भी ऑपरेशन सिंदूर में किया गया था।

स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियां
भारत फ्रांस से तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन पर भी चर्चा कर रहा है। भारतीय नौसेना पहले से मझगांव डॉकयार्ड में फ्रांसीसी सहयोग से निर्मित छह कलवरी क्लास पनडुब्बियों का संचालन कर रही है।
रूस की घटती भागीदारी
ग्लोबल थिंक टैंक Stockholm International Peace Research Institute के अनुसार 2010-14 के बीच भारत के 72% हथियार रूस से आते थे, जो 2020-24 में घटकर 38% रह गए। इसी अवधि में फ्रांस से आयात 28% तक बढ़ा।
सुखोई फाइटर जेट का उत्पादन बंद हो चुका है और 2019 में हुए एस-400 सौदे की दो बैटरियों की सप्लाई में देरी जारी है। रूस ने SU-57 फाइटर जेट और संयुक्त निर्माण का प्रस्ताव दिया था, लेकिन भारत ने राफेल के मेक इन इंडिया विकल्प को प्राथमिकता दी।
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