बारापुला फेज-3 कॉरिडोर का उद्घाटन हो गया है। मयूर विहार से सराय काले खां होते हुए AIIMS तक सिग्नल फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी। जानें लंबाई, लागत, 11 साल की देरी और ACB जांच की पूरी कहानी।
दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए मंगलवार का दिन सड़क कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम रहा। लंबे इंतजार के बाद बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर फेज-3 जनता के लिए शुरू हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कॉरिडोर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार से सराय काले खां होते हुए दक्षिण दिल्ली और AIIMS की तरफ जाने वाले यात्रियों के लिए सिग्नल फ्री कनेक्टिविटी का रास्ता खुल गया है।
इस परियोजना को खास तौर पर नोएडा और पूर्वी दिल्ली से दक्षिण दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में जिस सफर में करीब 35 से 40 मिनट लगते हैं, वह सिग्नल फ्री मार्ग के जरिए करीब 15 मिनट तक आ सकता है। हालांकि वास्तविक समय ट्रैफिक, प्रवेश बिंदु और गंतव्य के अनुसार अलग हो सकता है।

मयूर विहार से सराय काले खां, आगे AIIMS तक कनेक्टिविटी
बारापुला फेज-3 का प्रमुख हिस्सा मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां को जोड़ता है और मौजूदा बारापुला नेटवर्क से जुड़कर दक्षिण दिल्ली तथा AIIMS की दिशा में आवागमन आसान करता है। परियोजना की एलिवेटेड स्ट्रेच करीब 3.5 किलोमीटर बताई गई है, जबकि नए कॉरिडोर की कुल लंबाई अलग-अलग संरचनाओं और कनेक्टिंग हिस्सों को शामिल करने पर करीब 5 किलोमीटर बताई गई है। मौजूदा बारापुला कॉरिडोर के साथ मिलकर यह नेटवर्क करीब 9 किलोमीटर तक पहुंचता है।
इस कॉरिडोर से सराय काले खां, रिंग रोड, DND फ्लाईवे और NH-24 के आसपास यातायात दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सराय काले खां पहले से ही रेलवे स्टेशन, ISBT, मेट्रो और अन्य परिवहन सुविधाओं का बड़ा इंटरचेंज है। ऐसे में नई कनेक्टिविटी से इस पूरे इलाके तक पहुंच को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।
कॉरिडोर में वाहनों के साथ पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए भी सुविधाएं रखी गई हैं। परियोजना में साइकिल ट्रैक और पैदल यात्री अवसंरचना शामिल है।

2014 में मंजूरी, 2015 में शुरू हुआ काम… फिर क्यों लगी 11 साल की देरी?
बारापुला फेज-3 की कहानी सिर्फ एक फ्लाईओवर के निर्माण की नहीं, बल्कि लंबे समय तक खिंचती रही सरकारी परियोजना की कहानी भी है।
परियोजना को दिसंबर 2014 में मंजूरी मिली थी और निर्माण कार्य 2015 में शुरू हुआ। इसे मूल रूप से 2017 तक पूरा किया जाना था। लेकिन जमीन अधिग्रहण, पेड़ों से जुड़ी अनुमति, पर्यावरणीय मंजूरियों, यूटिलिटी शिफ्टिंग, यमुना फ्लडप्लेन में निर्माण से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों, कोविड और मध्यस्थता से जुड़े विवादों समेत कई कारणों से समयसीमा बार-बार आगे बढ़ती गई।
जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार परियोजना की मूल स्वीकृत लागत 1,260.63 करोड़ रुपये थी, जिसे संशोधित कर 1,635.03 करोड़ रुपये किया गया। यानी लागत में करीब 374.40 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।
यानी जिस परियोजना को करीब ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य था, उसे धरातल पर आने में एक दशक से ज्यादा समय लग गया।

देरी और लागत बढ़ने पर ACB की FIR भी हुई
परियोजना की देरी और बढ़ती लागत को लेकर सवाल भी उठते रहे। जनवरी 2026 में दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने बारापुला फेज-3 में कथित देरी, लागत बढ़ने और मध्यस्थता से जुड़े भुगतान के मामले में FIR दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, FIR अज्ञात अधिकारियों और एक ठेकेदार के खिलाफ दर्ज की गई और जांच शुरू की गई।
इससे पहले दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से भी परियोजना में देरी और लागत बढ़ने को लेकर जांच के निर्देश दिए गए थे। हालांकि जांच में सामने आने वाले निष्कर्ष और किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी अलग विषय हैं; FIR या जांच अपने आप किसी की दोषसिद्धि साबित नहीं करती।
रोजाना करीब 2 टन CO₂ उत्सर्जन घटने का अनुमान
परियोजना के शुरू होने के बाद ट्रैफिक के अधिक सुचारू होने से वाहनों के रुकने और बार-बार गति बदलने की स्थिति कम होने की उम्मीद है। उपलब्ध परियोजना संबंधी दावों के अनुसार, इससे प्रतिदिन करीब 2 टन कार्बन डाइऑक्साइड यानी CO₂ उत्सर्जन कम हो सकता है।

इसके अलावा साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए बनाई गई सुविधाओं को भी परियोजना का हिस्सा बनाया गया है। ऐसे में कॉरिडोर को केवल कारों के लिए सड़क परियोजना के बजाय बहु-आयामी शहरी कनेक्टिविटी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
प्रवेश वर्मा बोले- 11 साल का इंतजार खत्म
दिल्ली के PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने परियोजना के उद्घाटन को दिल्लीवासियों के लंबे इंतजार के खत्म होने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि परियोजना में कई तरह की मंजूरियों और दूसरी अड़चनों के कारण देरी हुई और सरकार ने इन्हें दूर कर काम को आगे बढ़ाया।
वहीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उद्घाटन कार्यक्रम में कहा कि दिल्ली में कुल 1,941 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हो रहा है। उनके बयान में इस काम को दिल्ली में बुनियादी ढांचे के विस्तार से जोड़ा गया।

यह बयान राजनीतिक संदर्भ भी रखता है, क्योंकि मौजूदा दिल्ली सरकार ने बारापुला परियोजना की देरी को लेकर पिछली सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, परियोजना की देरी के कारणों को लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड में जमीन, मंजूरी, यूटिलिटी और मध्यस्थता जैसे कई कारकों का उल्लेख मिलता रहा है।
अब असली परीक्षा ट्रैफिक पर असर की
बारापुला फेज-3 शुरू होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या कागज पर बताई गई 15 मिनट की कनेक्टिविटी वास्तविक ट्रैफिक में भी दिखाई देती है।
नोएडा, मयूर विहार और पूर्वी दिल्ली से AIIMS तथा दक्षिण दिल्ली जाने वाले यात्रियों को अब कई सिग्नलों से बचते हुए नया रास्ता मिलेगा। लेकिन साथ ही यह भी देखना होगा कि इसका असर रिंग रोड, DND फ्लाईवे, NH-24 और सराय काले खां के आसपास के ट्रैफिक पर कितना पड़ता है।
करीब 11 साल की देरी और संशोधित लागत के बाद आखिरकार बारापुला फेज-3 खुल चुका है। अब इस लंबे इंतजार का असली परिणाम सड़क पर दिखेगा—सफर कितना तेज होता है और दिल्ली का ट्रैफिक कितना आसान।
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