राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 'दीक्षारंभ समारोह' का आयोजन किया गया। नई दिल्ली और चार क्षेत्रीय केंद्रों के करीब 110 विद्यार्थियों का पारंपरिक स्वागत किया गया। समारोह में भारतीय संस्कृति, शास्त्रीय संगीत और रंगमंच की समृद्ध परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।
भारतीय रंगमंच की सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं में शुमार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) ने बुधवार को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपने पारंपरिक 'दीक्षारंभ समारोह' का भव्य आयोजन किया। नई दिल्ली स्थित अभिमंच सभागार में आयोजित इस समारोह ने केवल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत ही नहीं की, बल्कि भारतीय रंगमंच की समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी नए विद्यार्थियों के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
समारोह में नई दिल्ली केंद्र के साथ-साथ बेंगलुरु, गंगटोक (सिक्किम), वाराणसी और अगरतला (त्रिपुरा) स्थित चारों क्षेत्रीय केंद्रों में प्रवेश पाने वाले लगभग 110 नवप्रवेशित विद्यार्थियों का पारंपरिक भारतीय रीति-रिवाजों के अनुसार स्वागत किया गया। पूरे आयोजन में भारतीय संस्कृति, कला और आध्यात्मिक मूल्यों की सुंदर झलक देखने को मिली।

रंगमंच की नई यात्रा का प्रेरणादायी आरंभ
एनएसडी का यह दीक्षारंभ समारोह विद्यार्थियों के लिए केवल औपचारिक स्वागत कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन्हें रंगमंच की उस लंबी और अनुशासित यात्रा के लिए प्रेरित करने का अवसर भी था, जिसके लिए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय देश-विदेश में अपनी अलग पहचान रखता है।
समारोह की शुरुआत भारतीय परंपरा के अनुरूप मंगलाचरण और पारंपरिक विधि-विधानों के साथ हुई। इसके बाद प्रसिद्ध कलाकार श्री वेत्री भूपति और उनकी टीम ने शास्त्रीय संगीत की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसने पूरे सभागार को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण से सराबोर कर दिया। संगीत की प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि भारतीय रंगमंच केवल अभिनय का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और मूल्यों का संवाहक भी है।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय इस वर्ष विभिन्न केंद्रों पर अलग-अलग पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण देगा।
नई दिल्ली केंद्र में चयनित विद्यार्थियों को नाट्य कला में तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम कराया जाएगा।
इसके अलावा—
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गंगटोक (सिक्किम) केंद्र में नाट्य कला का एक वर्षीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम,
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बेंगलुरु केंद्र में अभिनय का एक वर्षीय विशेष प्रशिक्षण,
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वाराणसी केंद्र में भारतीय शास्त्रीय रंगमंच का प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम,
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तथा अगरतला (त्रिपुरा) स्थित थिएटर-इन-एजुकेशन केंद्र में शिक्षा-में-रंगमंच का एक वर्षीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा।
इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य केवल कलाकार तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे रंगकर्मी तैयार करना है जो भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और आधुनिक रंगमंच के बीच संतुलन स्थापित कर सकें।

दीक्षारंभ समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सोसायटी के उपाध्यक्ष प्रो. भरत गुप्त, एनएसडी के निदेशक श्री चित्तरंजन त्रिपाठी, कुलसचिव श्री प्रदीप कुमार मोहंती, प्रोफेसर एवं डीन (शैक्षणिक) प्रो. शंतनु बोस, मुख्य रंगमंडल प्रमुख श्री राजेश सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर श्री यशराज जाधव, सहायक प्रोफेसर श्री अरुण कुमार मलिक, सहायक प्रोफेसर श्री विवेक एम्मानेनी तथा पुस्तकालयाध्यक्ष एवं जनसंपर्क अधिकारी (प्रभारी) डॉ. ई. गजलक्ष्मी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
चारों क्षेत्रीय केंद्रों के निदेशकों ने भी समारोह में भाग लेते हुए विद्यार्थियों का स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कला केवल पेशा नहीं, समाज से संवाद का माध्यम
समारोह के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, विचारों को अभिव्यक्त करने और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने का सशक्त मंच भी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, समर्पण और निरंतर अभ्यास के साथ अपनी प्रतिभा को विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय केवल कलाकार नहीं बनाता, बल्कि ऐसे संवेदनशील नागरिक तैयार करता है जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं।
भारतीय संस्कृति और आधुनिक रंगमंच का अद्भुत संगम
पूरे कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और आधुनिक रंगमंच का सुंदर समन्वय दिखाई दिया। पारंपरिक स्वागत, शास्त्रीय संगीत, सांस्कृतिक गरिमा और शिक्षकों का मार्गदर्शन इस बात का संकेत था कि एनएसडी आने वाले वर्षों में भी भारतीय रंगमंच को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
करीब 110 विद्यार्थियों के लिए यह दिन जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, क्योंकि यहीं से उनके अभिनय, निर्देशन, रंगकर्म और सांस्कृतिक अध्ययन की नई यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हुई।

भविष्य के रंगकर्मियों से नई उम्मीदें
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से देश को कई ऐसे कलाकार मिले हैं जिन्होंने रंगमंच, सिनेमा और टेलीविजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसे में इस नए बैच से भी कला जगत को काफी उम्मीदें हैं। संस्थान का मानना है कि आने वाले वर्षों में यही विद्यार्थी भारतीय रंगमंच की नई पहचान बनेंगे और देश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच तक पहुंचाएंगे।
दीक्षारंभ समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय कला और संस्कृति की परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है और नई पीढ़ी उसे आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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