गौतमबुद्धनगर पुलिस ने ऑपरेशन 'Cy-Vajra' के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया है। 49 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई, 67 मोबाइल, 19 लैपटॉप, 76 सिम कार्ड और ₹5 लाख से अधिक नकदी बरामद की गई है। जांच में ₹60 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिले हैं।
डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से नई चुनौती बनकर उभरा है। ऑनलाइन निवेश, बैंकिंग, नौकरी, लोन और केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह लगातार नए तरीके अपनाते रहे हैं। ऐसे अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष अभियान 'ऑपरेशन Cy-Vajra' के तहत गौतमबुद्धनगर पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है।
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान के दौरान 8 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़, 49 आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, एक नाइजीरियाई नागरिक की गिरफ्तारी और ₹60 करोड़ से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े नेटवर्क के अहम सुराग सामने आए हैं। इस कार्रवाई ने यह भी उजागर किया है कि साइबर अपराध अब केवल स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का रूप ले चुका है।
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर पूरे प्रदेश में एक सप्ताह का विशेष अभियान 'ऑपरेशन Cy-Vajra' चलाया गया। अभियान का उद्देश्य साइबर ठगी, फर्जी कॉल सेंटर, म्यूल बैंक खातों और ऑनलाइन वित्तीय अपराधों में शामिल गिरोहों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करना था।

गौतमबुद्धनगर पुलिस ने डिजिटल इंटेलिजेंस, तकनीकी निगरानी और मानव स्रोतों से मिली सूचनाओं के आधार पर कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में संचालित 8 अवैध कॉल सेंटरों का खुलासा हुआ, जहां से कथित रूप से लोगों को विभिन्न बहानों से ठगी का शिकार बनाया जा रहा था।
700 से अधिक लोगों का सत्यापन, 49 पर कार्रवाई
अभियान के दौरान पुलिस ने 700 से अधिक लोगों से पूछताछ और सत्यापन किया। जांच के आधार पर 49 व्यक्तियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की गई।
पुलिस के अनुसार, कई आरोपी सीधे साइबर ठगी में शामिल थे, जबकि कुछ लोग साइबर अपराधियों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने और बैंक खातों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह से जुड़े पाए गए। ऐसे खाते अक्सर ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और जांच एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और नकदी बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण उपकरण और दस्तावेज भी बरामद किए। इनमें शामिल हैं—
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67 मोबाइल फोन
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19 लैपटॉप
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76 सिम कार्ड
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81 डेबिट और क्रेडिट कार्ड
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₹5 लाख से अधिक नकद धनराशि
पुलिस का कहना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से साइबर ठगी के कई और मामलों का खुलासा हो सकता है।
जांच में सामने आया ₹60 करोड़ से अधिक का नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में गिरफ्तार और चिन्हित व्यक्तियों का ₹60 करोड़ से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध सामने आया है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के तार देश के किन-किन राज्यों और किन विदेशी संगठनों से जुड़े हैं। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपी केवल इस बड़े साइबर नेटवर्क की कुछ कड़ियां हैं और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

नाइजीरियाई नागरिक की गिरफ्तारी ने बढ़ाई जांच की दिशा
ऑपरेशन के दौरान विकसित बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर पुलिस ने एक नाइजीरियाई नागरिक को भी गिरफ्तार किया।
प्रारंभिक जांच में उसके संबंध बड़े पैमाने पर साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े पाए गए हैं। उसके कब्जे से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं, जिनका संबंध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज विभिन्न शिकायतों से सामने आया है।
फिलहाल बरामद डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और उसके अन्य सहयोगियों की पहचान की जा सके।
क्या होता है म्यूल बैंक अकाउंट?
साइबर अपराधों में म्यूल बैंक अकाउंट एक महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। इसमें अपराधी किसी व्यक्ति के बैंक खाते का उपयोग ठगी की रकम जमा करने और उसे आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए करते हैं। कई मामलों में खाताधारकों को इसकी पूरी जानकारी भी नहीं होती, जबकि कुछ लोग लालच में अपने खाते अपराधियों को उपलब्ध करा देते हैं।
पुलिस ने ऐसे खातों की खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी है।
जनता से पुलिस की अपील
गौतमबुद्धनगर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का सामना हो, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराएं।

इसके अलावा किसी भी संदिग्ध कॉल सेंटर, बैंक खाते या ऑनलाइन वित्तीय गतिविधि की जानकारी तुरंत निकटतम पुलिस इकाई को देने की भी अपील की गई है।
साइबर अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति
पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। डिजिटल तकनीक, मानव स्रोतों और आधुनिक जांच प्रणाली की मदद से ऐसे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन 'Cy-Vajra' केवल एक छापेमारी अभियान नहीं, बल्कि साइबर अपराध के पूरे इकोसिस्टम को कमजोर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसी तरह तकनीकी और वित्तीय नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई जारी रही, तो ऑनलाइन ठगी के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
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