उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बहराइच जिले में लगभग ₹42.93 करोड़ की लागत से पूर्ण हुई 14 सिंचाई परियोजनाओं का वर्चुअल लोकार्पण किया। चौधरी चरण सिंह सरयू पंप नहर के आधुनिकीकरण, नए राजकीय नलकूपों, केंद्रीय कार्यशाला के सुदृढ़ीकरण और जल वितरण प्रणाली के पुनर्स्थापन से हजारों किसान परिवारों को बेहतर सिंचाई सुविधा और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को आधुनिक सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में सोमवार को जलशक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग मुख्यालय, लखनऊ से वर्चुअल माध्यम से जनपद बहराइच में लगभग ₹42.93 करोड़ (4293.37 लाख रुपये) की लागत से पूर्ण हुई 14 सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाना, जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना तथा किसानों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।
लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान जलशक्ति मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक किसान तक बेहतर सिंचाई सुविधाएं पहुंचाना है। आधुनिक तकनीक, मजबूत सिंचाई अवसंरचना और जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से कृषि क्षेत्र को नई गति मिलेगी, जिससे किसानों की आय और आर्थिक स्थिति दोनों में सुधार होगा।

चौधरी चरण सिंह सरयू पंप नहर का हुआ व्यापक आधुनिकीकरण
लोकार्पित परियोजनाओं में सबसे प्रमुख चौधरी चरण सिंह सरयू पंप नहर (द्वितीय एवं तृतीय चरण), नानपारा का आधुनिकीकरण रहा। वर्ष 1984-85 में निर्मित इस पंप नहर में लंबे समय से उपयोग के कारण विद्युत एवं यांत्रिक उपकरण जर्जर हो चुके थे, जिससे सिंचाई क्षमता प्रभावित हो रही थी।
अब लगभग ₹35.76 करोड़ (3576.28 लाख रुपये) की लागत से इस परियोजना का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। इसके अंतर्गत पुराने उपकरणों को हटाकर नए पंप सेट, नई पाइपलाइन, आधुनिक विद्युत उपकरण तथा SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) प्रणाली स्थापित की गई है।

इस आधुनिकीकरण के बाद पंप नहर की 240 क्यूसेक क्षमता पूरी तरह पुनर्स्थापित हो गई है। इससे लगभग 21,387 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता दोबारा विकसित हुई है और करीब 28,976 किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल खेतों तक समय पर पानी पहुंचेगा बल्कि फसल उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
केंद्रीय कार्यशाला का भी हुआ आधुनिकीकरण
सिंचाई व्यवस्था को तकनीकी रूप से और मजबूत बनाने के उद्देश्य से जनपद बहराइच की केंद्रीय कार्यशाला का भी आधुनिकीकरण किया गया है। लगभग ₹22.44 लाख की लागत से पूरी हुई इस परियोजना के तहत आधुनिक टी एंड पी मशीनों की स्थापना की गई है।
इन मशीनों की सहायता से राजकीय नलकूपों में उपयोग होने वाले पंप सेटों और विद्युत उपकरणों की मरम्मत पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। इससे सरकारी नलकूपों के संचालन में सुधार होगा और किसानों को समय पर निःशुल्क सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

9 नए राजकीय नलकूपों से बढ़ेगी सिंचाई क्षमता
कृषि क्षेत्र में भूजल आधारित सिंचाई को मजबूत करने के लिए नलकूप मंडल गोंडा के अंतर्गत बहराइच और श्रावस्ती जनपदों में 1.0 क्यूसेक क्षमता के 9 नए राजकीय नलकूपों का निर्माण कराया गया है।
इन नलकूपों के निर्माण पर लगभग ₹328.88 लाख खर्च किए गए हैं। इनके माध्यम से 450 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित हुई है, जिससे लगभग 495 किसान परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे उन क्षेत्रों के किसानों को भी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी जहां पहले पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हो पाता था।
97 गांवों में मजबूत हुई जल वितरण व्यवस्था
सरकार ने केवल नई परियोजनाएं ही शुरू नहीं कीं, बल्कि पुरानी सिंचाई व्यवस्थाओं को भी पुनर्जीवित करने पर जोर दिया है। इसी उद्देश्य से राजकीय नलकूपों से संबंधित दो जीर्णोद्धार परियोजनाएं भी पूरी की गई हैं।
लगभग ₹365.77 लाख की लागत से पूर्ण हुई इन परियोजनाओं के तहत 97 गांवों में जल वितरण प्रणाली, विद्युत एवं यांत्रिक उपकरणों का पुनर्स्थापन किया गया है।

इन सुधारों से 685 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता पुनर्स्थापित हुई है तथा लगभग 939 किसान परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इससे लंबे समय से प्रभावित सिंचाई व्यवस्था दोबारा सुचारु हो सकेगी।
आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा जल प्रबंधन
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि राज्य सरकार सिंचाई क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर बल दे रही है। SCADA जैसी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पंप नहरों की निगरानी, संचालन और जल प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा। इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा और अनावश्यक जल बर्बादी को भी रोका जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि सिंचाई अवसंरचना मजबूत होने से किसानों को समय पर पानी मिलेगा, जिससे फसल की गुणवत्ता, उत्पादकता और कृषि आय में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सिंचाई व्यवस्था कृषि उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। समय पर पानी मिलने से किसान अधिक उत्पादक फसलें उगा सकेंगे, बहुफसली खेती को बढ़ावा मिलेगा और वर्षा पर निर्भरता भी कम होगी।

सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से न केवल कृषि क्षेत्र को नई गति मिलेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। आधुनिक सिंचाई सुविधाएं किसानों की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी
लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष संदीप कुमार सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की योजनाओं की भी जानकारी दी।
प्रदेश सरकार का कहना है कि भविष्य में भी सिंचाई अवसंरचना को आधुनिक बनाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और किसानों तक गुणवत्तापूर्ण सिंचाई सुविधा पहुंचाने के लिए इसी प्रकार की परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
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