प्रयागराज सर्किट हाउस में नीट पेपर लीक मुद्दे पर छात्रों के साथ चर्चा कर रहे आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तीखी बहस हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने सरकार और प्रशासन से कई सवाल पूछे हैं।
पेपर लीक पर चर्चा बनी सियासी संग्राम का कारण, संजय सिंह और प्रशासन आमने-सामने
देशभर में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर लगातार बहस जारी है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुई एक घटना ने इस बहस को नया राजनीतिक रंग दे दिया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह जब प्रतियोगी छात्रों के साथ नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा कर रहे थे, तभी प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने से विवाद खड़ा हो गया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि सांसद और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर अब विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद सुधाकर सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं।
सर्किट हाउस में छात्रों के साथ संवाद कर रहे थे संजय सिंह
जानकारी के अनुसार, 1 जून 2026 को संजय सिंह प्रयागराज स्थित सर्किट हाउस पहुंचे थे। यहां उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया था। चर्चा का मुख्य विषय नीट पेपर लीक और उससे छात्रों के भविष्य पर पड़ने वाला प्रभाव था।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम बंद कमरे में आयोजित किया गया था, जहां छात्र अपनी समस्याएं और चिंताएं सांसद के सामने रख रहे थे। इसी दौरान कुछ प्रशासनिक अधिकारी वहां पहुंचे और कार्यक्रम को रोकने की बात कही।

अधिकारियों के पहुंचते ही शुरू हुआ विवाद
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिकारियों ने कार्यक्रम को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए। इस पर संजय सिंह ने आपत्ति जताई और कहा कि बंद कमरे में आयोजित किसी चर्चा या संवाद कार्यक्रम के लिए अलग से अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि सांसद अधिकारियों से तीखे सवाल पूछते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा की जा रही है, उसी व्यवस्था के माध्यम से अधिकारी भी अपने पदों तक पहुंचे हैं। ऐसे में छात्रों के भविष्य से जुड़े विषय पर संवाद को रोकना उचित नहीं है।
इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कुछ समय तक बहस जारी रही, जिसके बाद मामला और अधिक चर्चा का विषय बन गया।
वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
घटना का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस शुरू हो गई। विपक्षी दलों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और छात्रों के मुद्दों पर संवाद को सीमित करने की कोशिश बताया।
आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा करते हुए उत्तर प्रदेश प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए।
RJD सांसद सुधाकर सिंह ने उठाए सवाल
सुधाकर सिंह ने अपनी पोस्ट में कहा कि राज्यसभा सांसद संजय सिंह प्रयागराज के सर्किट हाउस में नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन प्रशासन और पुलिस के अधिकारी उन्हें रोकने पहुंच गए।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार को इस तरह की चर्चा से परेशानी क्यों है? जब देश के लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हो, तब संवाद और जवाबदेही से बचने की कोशिश क्यों की जा रही है?
आरजेडी सांसद ने आगे कहा कि नीट पेपर लीक जैसे मामलों ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है। ऐसे समय में यदि जनप्रतिनिधि छात्रों से बातचीत कर रहे हैं और मामले की सच्चाई सामने लाने की मांग कर रहे हैं, तो उसे रोकने का प्रयास कई सवाल खड़े करता है।

पेपर लीक का मुद्दा लगातार बना हुआ है चर्चा का विषय
देश में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों ने लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य को प्रभावित किया है। यही वजह है कि यह मुद्दा केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा बन चुका है।
प्रयागराज की यह घटना भी उसी बहस को और तेज करने वाली साबित हो रही है। एक तरफ विपक्ष इसे छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास बता रहा है, तो दूसरी ओर प्रशासनिक पक्ष की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे लोकतांत्रिक संवाद में बाधा मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि प्रशासन ने नियमों के पालन के तहत कार्रवाई की होगी।
हालांकि, इस पूरे विवाद ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या इस विवाद का राजनीतिक असर आने वाले दिनों में और बढ़ेगा।
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