बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे के बाद हालात बेकाबू हो गए। अगमकुआं थाना क्षेत्र के बड़ी पहाड़ी इलाके में एक तेज रफ्तार बस की चपेट में आने से 26 वर्षीय युवक की मौत हो गई। इसके बाद आक्रोशित भीड़ ने बस में आग लगा दी और पुलिस की कई गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है।
बिहार की राजधानी पटना शुक्रवार सुबह उस समय हिंसा की आग में झुलस उठी, जब एक सड़क हादसे में युवक की मौत के बाद लोगों का गुस्सा बेकाबू हो गया। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। सड़क पर आग की लपटें उठने लगीं, पुलिसकर्मियों को पीछे हटना पड़ा और कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
यह पूरी घटना अगमकुआं थाना क्षेत्र के बड़ी पहाड़ी इलाके की है, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-30 पर एक तेज रफ्तार यात्री बस ने स्थानीय युवक को कुचल दिया। हादसा इतना भीषण था कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई।
मृतक की पहचान 26 वर्षीय मनीष कुमार के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते लोगों का गुस्सा उग्र हो गया और हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गए।
बस में लगाई आग, पुलिस चौकी को भी नहीं छोड़ा
स्थानीय लोगों के अनुसार, दुर्घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने सबसे पहले उस बस को आग के हवाले कर दिया, जिसने युवक को टक्कर मारी थी। बस में सवार यात्री किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकले।
इसके बाद भीड़ ने पुलिस चेक पोस्ट को निशाना बनाया और वहां भी आगजनी की। कुछ देर बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम की गाड़ियों पर भी हमला किया गया। जानकारी के मुताबिक, पुलिस की तीन गाड़ियों समेत कई अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।
इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजर रहे कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई। कुछ बसों के शीशे तोड़ दिए गए, जबकि कई मोटरसाइकिलों को भी नुकसान पहुंचाया गया।
पत्रकारों और दमकल कर्मियों पर भी हमला
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब घटनास्थल की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर रहे पत्रकारों को भी भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोगों ने पत्रकारों के साथ मारपीट की और उनकी गाड़ी में भी आग लगा दी।
आग बुझाने के लिए पहुंचे दमकल विभाग के कर्मचारियों को भी उग्र भीड़ के विरोध का सामना करना पड़ा। हालात इतने खराब हो गए कि फायर ब्रिगेड की टीम को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा।
पुलिस को खदेड़ने तक पहुंचा मामला
घटना की सूचना मिलने के बाद आसपास के कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। हालांकि, बड़ी संख्या में मौजूद लोगों के सामने पुलिस बल कमजोर पड़ता दिखाई दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ लगातार उग्र होती चली गई।
बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव भी किया, जिसके कारण कई पुलिसकर्मियों को पीछे हटना पड़ा। कुछ समय के लिए पुलिस को घटनास्थल से दूर रहना पड़ा।
एनएच-30 पर लगा लंबा जाम
हिंसा और आगजनी की इस घटना का असर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-30 पर भी दिखाई दिया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। भीषण गर्मी और उमस के बीच लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे।
कई यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग तलाशते नजर आए। प्रशासन की ओर से लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।
प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था की चुनौती
यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों के पालन और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में तेज रफ्तार वाहनों के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं।
फिलहाल पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
एक युवक की मौत से शुरू हुआ यह विवाद कुछ ही घंटों में बड़े हिंसक प्रदर्शन में बदल गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सड़क हादसों के बाद इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा।
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