गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बिना मान्यता संचालित दो मदरसों को सील कर दिया। सुरक्षा मानकों और वैध दस्तावेजों के अभाव में की गई इस कार्रवाई के दौरान फ्लैग मार्च, हिस्ट्रीशीटर सत्यापन और जनसुरक्षा संबंधी अभियान भी चलाया गया। जिलाधिकारी ने स्वर्गीय सूर्या चौहान के परिवार को नौकरी का नियुक्ति पत्र भी सौंपा।
खोड़ा में प्रशासन का एक्शन मोड: दो अवैध मदरसे सील, हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन और सूर्या चौहान परिवार को मिली सरकारी मदद
गाजियाबाद में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मंगलवार को खोड़ा क्षेत्र में एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई देखने को मिली, जब पुलिस कमिश्नर जे. रविन्द्र गौड़ और जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ के निर्देशन में अवैध रूप से संचालित दो मदरसों को सील कर दिया गया।
यह कार्रवाई केवल संस्थानों को सील करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके साथ पूरे क्षेत्र में फ्लैग मार्च, हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन और आमजन को सुरक्षा का भरोसा दिलाने की कवायद भी देखने को मिली। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान जनहित, जनसुरक्षा और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के अनुसार लोकप्रिय विहार स्थित "मदरसा रहमानिया अरेबिया कासिम-उल-उलूम" तथा मोहल्ला बीरबल, ग्राम खोड़ा स्थित "सुल्तान अलारफीन मदरसा" बिना आवश्यक मान्यता और सरकारी अनुमति के संचालित पाए गए।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दोनों संस्थान जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पंजीकृत नहीं हैं। इनके संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियां भी उपलब्ध नहीं थीं। इतना ही नहीं, संबंधित संस्थाओं द्वारा अपने संचालन से जुड़ा वैध और जीवित सोसायटी पंजीकरण प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा के लिहाज से भी स्थिति चिंताजनक पाई गई। दोनों परिसरों में अग्निशमन विभाग और विद्युत सुरक्षा विभाग की अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में विद्यार्थियों और आसपास के लोगों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता था।

प्रशासन ने दिया एक सप्ताह का समय
जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, उपजिलाधिकारी सदर और अन्य विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों मदरसों को सील कर दिया गया। संबंधित प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया तो नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में मुनादी भी कराई गई ताकि स्थानीय लोगों को प्रशासनिक निर्णय की जानकारी मिल सके।
फ्लैग मार्च और हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन
संयुक्त कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में फ्लैग मार्च भी किया। इसका उद्देश्य स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करना और कानून व्यवस्था को लेकर विश्वास पैदा करना था।
पुलिस विभाग ने इसी दौरान खोड़ा क्षेत्र से संबंधित 14 हिस्ट्रीशीटरों के घर-घर जाकर सत्यापन की कार्रवाई भी की। अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर
पुलिस कमिश्नर जे. रविन्द्र गौड़ ने कहा कि गाजियाबाद में अपराध और अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जनपद में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित नहीं होगी
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने कहा कि अवैध कारोबार, अवैध कब्जों, बिना अनुमति संस्थानों के संचालन और कमजोर वर्गों के उत्पीड़न को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सील किए गए संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर प्रशासन संवेदनशील है। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा वैकल्पिक विद्यालयों में उनके प्रवेश की व्यवस्था कराई जाएगी।

सूर्या चौहान के परिवार को मिला सहारा
कार्रवाई के बाद जिलाधिकारी ने स्वर्गीय सूर्या चौहान के परिवार से भी मुलाकात की। उन्होंने पूर्व में दिए गए आश्वासन को पूरा करते हुए नगर पालिका परिषद खोड़ा में परिवार के एक सदस्य को नियुक्ति पत्र प्रदान किया।
जिलाधिकारी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि शासन और प्रशासन इस कठिन समय में उनके साथ खड़ा है तथा भविष्य में भी किसी प्रकार की आवश्यकता होने पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
खोड़ा में हुई यह कार्रवाई केवल अवैध संस्थानों के खिलाफ अभियान नहीं बल्कि प्रशासन द्वारा कानून व्यवस्था, जनसुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को साथ लेकर चलने का एक व्यापक प्रयास माना जा रहा है। आने वाले दिनों में ऐसे और अभियान देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि प्रशासन ने साफ संकेत दे दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई तय है।
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