Wednesday, May 13, 2026

सादगी की राजनीति या बड़ा संदेश? दिल्ली में CM रेखा गुप्ता ने घटाया अपना काफिला

प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में गाड़ियों की संख्या घटी, तेल बचत और फिजूलखर्ची रोकने पर जोर

New Delhi , Latest Updated On - May 13 2026 | 16:34:00 PM
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दिल्ली सरकार ने फिजूलखर्ची रोकने और ईंधन बचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत मंत्रियों के काफिलों में शामिल गाड़ियों की संख्या घटा दी गई है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सादगी और ईंधन बचत की अपील के बाद लिया गया है। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ प्रतीकात्मक कदम है या शासन व्यवस्था में नई सोच की शुरुआत?

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देश में बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं, ईंधन संकट और सरकारी खर्चों में कटौती की चर्चाओं के बीच अब दिल्ली सरकार ने भी बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत दिल्ली सरकार के मंत्रियों के काफिलों में शामिल गाड़ियों की संख्या में भारी कटौती कर दी गई है। सरकार इसे सादगी, जिम्मेदारी और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में अहम फैसला बता रही है।

जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, जिन्हें Z प्लस सुरक्षा प्राप्त है, उनके काफिले में पहले करीब 12 गाड़ियां शामिल रहती थीं। लेकिन अब इस संख्या को घटाकर सिर्फ 4 कर दिया गया है। दिल्ली सरकार के इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने देशवासियों और सरकारी विभागों से फिजूलखर्ची रोकने और ईंधन बचाने की बात कही थी।


मंत्रियों के काफिलों पर भी लगी कैंची

सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार के मंत्रियों के काफिलों पर भी असर पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, पहले कुछ मंत्रियों के काफिलों में 3 से 4 गाड़ियां चला करती थीं। अब यह संख्या घटाकर अधिकतम 2 कर दी गई है।

इन दो गाड़ियों में ही मंत्री, उनका निजी स्टाफ और सुरक्षा कर्मी यात्रा करेंगे। हालांकि, सरकार के कई मंत्री पहले से ही सीमित वाहनों का उपयोग करते रहे हैं और कुछ मंत्री केवल एक गाड़ी में ही सफर करते थे।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कदम केवल खर्च कम करने के लिए नहीं बल्कि जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से भी उठाया गया है।



पीएम मोदी की अपील का असर

दरअसल, 11 मई को हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी खर्चों में कटौती, ईंधन की बचत और सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि दुनिया में चल रहे तनाव और ऊर्जा संकट के बीच भारत को संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना होगा।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने, मेट्रो और कारपूलिंग को अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की बात कही थी।

इसके साथ ही उन्होंने वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा देने का सुझाव दिया था ताकि ईंधन और विदेशी मुद्रा दोनों की बचत हो सके।


PM के काफिले में भी दिखा बदलाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम करने का निर्देश दिया है। हाल ही में गुजरात और असम दौरों के दौरान उनके काफिले में पहले की तुलना में कम गाड़ियां दिखाई दीं।

सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने एसपीजी को काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने का भी निर्देश दिया है। यही वजह है कि अब बीजेपी शासित राज्यों में भी सादगी और संसाधन बचत को लेकर नए निर्देश सामने आने लगे हैं।


यूपी के बाद दिल्ली में बड़ा कदम

दिल्ली सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मंत्रियों और अधिकारियों के काफिलों में वाहनों की संख्या घटाने के निर्देश दे चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में अन्य राज्य सरकारें भी इसी तरह के कदम उठा सकती हैं।



क्या सिर्फ प्रतीकात्मक कदम या नई प्रशासनिक सोच?

सरकारी काफिलों में कटौती को लेकर जनता के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे दिखावटी कदम मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे एक सकारात्मक शुरुआत बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारें वास्तव में सार्वजनिक परिवहन, ईवी और ऊर्जा बचत के मॉडल को अपनाती हैं, तो इससे आम लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी।


सादगी का संदेश या राजनीतिक रणनीति?

दिल्ली की राजनीति में यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से वीआईपी कल्चर को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के छोटे काफिले जनता के बीच अलग संदेश देने की कोशिश के तौर पर भी देखे जा रहे हैं।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि आने वाले समय में सरकारें “कम खर्च, ज्यादा जिम्मेदारी” वाले मॉडल को राजनीतिक तौर पर भी आगे बढ़ा सकती हैं।


जनता क्या चाहती है?

आम लोगों का मानना है कि यदि नेता खुद सादगी अपनाते हैं तो उसका असर समाज पर भी पड़ता है। दिल्ली जैसे महानगर में जहां ट्रैफिक, प्रदूषण और ईंधन की लागत लगातार बढ़ रही है, वहां सरकारी स्तर पर ऐसे फैसले महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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