दिल्ली से करनाल के बीच रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा शुरू हो गई है। DTC ने 133 किलोमीटर लंबे अंतरराज्यीय रूट पर वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने नई इलेक्ट्रिक बसों और EV सेवाओं को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में 200 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हुई हैं।
दिल्ली से करनाल के बीच रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बुधवार का दिन एक नई सुविधा लेकर आया। अब इस करीब 133 किलोमीटर लंबे रूट पर यात्रियों को वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों में सफर करने का विकल्प मिलेगा। दिल्ली परिवहन निगम यानी DTC ने दिल्ली-करनाल के बीच इलेक्ट्रिक AC बस सेवा की शुरुआत कर दी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को नई इलेक्ट्रिक बसों और EV सेवाओं को हरी झंडी दिखाई। इस नई सेवा को सिर्फ सार्वजनिक परिवहन के विस्तार के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि दिल्ली और आसपास के राज्यों के बीच स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब तक दिल्ली-करनाल रूट पर सफर करने वाले यात्रियों के सामने सार्वजनिक परिवहन के कई विकल्प रहे हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक AC बस सेवा शुरू होने से यात्रा को ज्यादा आरामदायक और आधुनिक विकल्प मिलने की उम्मीद है।

नई DTC इलेक्ट्रिक बस सेवा करीब 133 किलोमीटर लंबे वन-वे कॉरिडोर पर संचालित होगी। शुरुआती चरण में इस रूट पर 5 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें लगाई गई हैं।
ये बसें दोनों दिशाओं में रोजाना कुल 10 ट्रिप लगाएंगी।
सेवा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि यह महाराणा प्रताप आईएसबीटी, कश्मीरी गेट को सीधे करनाल से जोड़ेगी। यानी दिल्ली के प्रमुख अंतरराज्यीय बस टर्मिनल से यात्रियों को करनाल तक इलेक्ट्रिक AC बस के जरिए सफर करने का विकल्प मिलेगा।
रास्ते में कई महत्वपूर्ण शहर और कस्बे भी इस सेवा से जुड़ेंगे। इनमें—
सिंघू बॉर्डर, राय, भालगढ़, मुरथल, गन्नौर, समालखा, पानीपत, घरौंदा और मधुबन शामिल हैं।
इस रूट पर रोजाना नौकरी, कारोबार, शिक्षा और दूसरे कामों के लिए सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह सेवा खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है।

दिल्ली सरकार की योजना केवल एक अंतरराज्यीय रूट पर इलेक्ट्रिक बस चलाने तक सीमित नहीं है। राजधानी के सार्वजनिक परिवहन को धीरे-धीरे ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक आधारित बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
इसी क्रम में दिल्ली के बस बेड़े में 200 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं।
इनमें—
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12 मीटर लंबी 88 इलेक्ट्रिक बसें
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9 मीटर लंबी 112 इलेक्ट्रिक बसें
शामिल हैं।
इन बसों के शामिल होने के बाद दिल्ली के कुल बस बेड़े की संख्या करीब 6,800 हो जाएगी।
बताए गए आंकड़ों के मुताबिक इस बेड़े में लगभग 4,938 इलेक्ट्रिक बसें और 1,750 CNG बसें शामिल होंगी।
यानी दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।

सार्वजनिक परिवहन को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में भी सरकार ने योजना तैयार की है।
राजधानी में 56 लेडीज स्पेशल इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाना है।
इन बसों का उद्देश्य खास तौर पर महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षित, आरामदायक और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
इससे स्कूल, कॉलेज और नौकरी के लिए रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं और छात्राओं को अतिरिक्त विकल्प मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली को स्वच्छ और हरित बनाने के लिए सरकार उत्सर्जन-मुक्त परिवहन को बढ़ावा दे रही है। नए इलेक्ट्रिक बस रूट और सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों की बढ़ती संख्या को इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
EV बसों के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत
इलेक्ट्रिक बसें बढ़ाने के साथ-साथ उनके लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना भी जरूरी है। इसी दिशा में दिल्ली में EV चार्जिंग सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है।
इसी क्रम में राजघाट डिपो-1 में पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन भी जनता को समर्पित किया जाएगा।
इस तरह सरकार की योजना सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके संचालन के लिए जरूरी चार्जिंग नेटवर्क को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाना प्रदूषण और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
दिल्ली-करनाल जैसे लंबे अंतरराज्यीय रूट पर इलेक्ट्रिक AC बस की शुरुआत से उन यात्रियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है, जो रोजाना इन दोनों क्षेत्रों के बीच आवाजाही करते हैं।
खासकर दिल्ली, सोनीपत, पानीपत और करनाल के बीच आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह सेवा सार्वजनिक परिवहन का एक नया विकल्प उपलब्ध कराएगी।
हालांकि इस सेवा की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले समय में यात्रियों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है, ट्रिप की संख्या कितनी पर्याप्त साबित होती है और इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कितनी नियमितता से होता है।
अब सफर सिर्फ लंबा नहीं, बदलता हुआ भी होगा
दिल्ली-करनाल के बीच शुरू हुई यह सेवा ऐसे समय में आई है, जब देशभर में सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
एक तरफ AC बसों से यात्रियों को आरामदायक सफर देने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक बसों के जरिए परिवहन क्षेत्र को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने का लक्ष्य है।
फिलहाल 5 बसों के साथ शुरू हुई यह सेवा आने वाले समय में किस तरह विस्तार लेती है, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन इतना जरूर है कि दिल्ली से करनाल तक रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए अब सड़क पर एक नया विकल्प उतर चुका है।
133 किलोमीटर का सफर, AC बस की सुविधा और इलेक्ट्रिक तकनीक—दिल्ली-करनाल रूट पर सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर बदलने की यह शुरुआत कितनी बड़ी साबित होती है, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।
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