ग्रेटर नोएडा स्थित जिलाधिकारी कार्यालय को सोमवार को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर की गहन तलाशी ली, लेकिन कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर टीम धमकी भरे ई-मेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
सोमवार सुबह ग्रेटर नोएडा के जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय को ई-मेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं। बिना किसी देरी के थाना सूरजपुर पुलिस ने पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में लेते हुए बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड, एंटी-सैबोटाज (A.S.) चेक टीम और फायर ब्रिगेड की मदद से व्यापक तलाशी अभियान शुरू कराया।
कई घंटे तक चली इस जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने कार्यालय परिसर के हर हिस्से की बारीकी से जांच की। हालांकि राहत की बात यह रही कि तलाशी के दौरान किसी भी प्रकार की संदिग्ध या विस्फोटक वस्तु बरामद नहीं हुई। इसके बावजूद प्रशासन पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सतर्कता बनाए हुए है।
ई-मेल मिलते ही सक्रिय हुआ प्रशासन
पुलिस के अनुसार, 13 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी कार्यालय को एक ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। जैसे ही यह सूचना प्रशासन तक पहुंची, तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया।
थाना सूरजपुर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पूरे डीएम कार्यालय परिसर को सुरक्षा घेरे में लिया और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए।

बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड ने खंगाला परिसर
धमकी की सूचना को गंभीर मानते हुए पुलिस ने बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वॉड (BDS), डॉग स्क्वॉड, एंटी-सैबोटाज चेक टीम तथा फायर ब्रिगेड को मौके पर बुलाया।
सुरक्षा टीमों ने कार्यालय भवन, प्रवेश द्वार, पार्किंग, रिकॉर्ड रूम, सार्वजनिक क्षेत्र, सीढ़ियों, गलियारों और अन्य संवेदनशील स्थानों की गहन जांच की। डॉग स्क्वॉड की मदद से संदिग्ध वस्तुओं की तलाश की गई, जबकि एंटी-सैबोटाज टीम ने तकनीकी उपकरणों के जरिए पूरे परिसर की स्कैनिंग की।
जांच पूरी होने के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी प्रकार की विस्फोटक सामग्री या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है।
साइबर टीम कर रही तकनीकी जांच
प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सबसे अहम पहलू धमकी भरे ई-मेल की तकनीकी जांच है। इसके लिए साइबर विशेषज्ञों की टीम को लगाया गया है, जो यह पता लगाने में जुटी है कि ई-मेल किस आईपी एड्रेस, सर्वर या डिवाइस से भेजा गया।
जांच एजेंसियां ई-मेल के डिजिटल ट्रेल, तकनीकी लॉग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि धमकी किसी शरारती तत्व ने दी है या इसके पीछे कोई संगठित साजिश है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ई-मेल भेजने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान होते ही उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पूरे मामले पर रखी जा रही है लगातार निगरानी
हालांकि तलाशी अभियान में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी है। डीएम कार्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है तथा आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं और यदि जांच के दौरान कोई नई जानकारी सामने आती है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्थिति सामान्य, अफवाहों से बचने की अपील
पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया है कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह सामान्य है। कार्यालय परिसर में शांति व्यवस्था बनी हुई है और किसी भी प्रकार का खतरा सामने नहीं आया है।
अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर फैलने वाली अपुष्ट खबरों और अफवाहों पर विश्वास न करें। केवल पुलिस और प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी को ही सही माना जाए।
प्रशासन ने कहा कि सुरक्षा से जुड़े हर इनपुट को गंभीरता से लिया जाता है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
डीएम कार्यालय जैसे संवेदनशील सरकारी परिसर को धमकी मिलने की घटना ने एक बार फिर सरकारी संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों से मिलने वाली ऐसी धमकियों की जांच पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है, क्योंकि कई बार अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।
ऐसे मामलों में साइबर फॉरेंसिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान ई-मेल भेजने वाले की पहचान करने और उसके उद्देश्य का पता लगाने पर केंद्रित है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह महज अफवाह फैलाने की कोशिश थी या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा।
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