नोएडा के सेक्टर-2 में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का थाना फेस-1 पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। आरोपी SpiceJet कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ठगी करते थे। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर मोबाइल फोन, लैपटॉप, डेबिट कार्ड, सिम कार्ड, बैंक पासबुक और UPI साउंड बॉक्स बरामद किए हैं।
नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के सपनों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का थाना फेस-1 पुलिस ने पर्दाफाश किया है। “ऑपरेशन साइबर वज्र” के तहत की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने सेक्टर-2 नोएडा से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को SpiceJet कंपनी से जुड़ा बताकर लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देते थे और रजिस्ट्रेशन फीस तथा प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे वसूल लेते थे।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुदेश सिंह, बृजेश भदौरिया, अर्जुन और संदीप कुमार तिवारी के रूप में हुई है। इनके कब्जे से ठगी में प्रयुक्त 8 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 9 डेबिट कार्ड, 13 सिम कार्ड, 3 बैंक पासबुक (म्यूल खाते) और 4 UPI साउंड बॉक्स बरामद किए गए हैं।
ऑपरेशन साइबर वज्र के तहत हुई कार्रवाई
थाना फेस-1 पुलिस ने मैनुअल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर यह कार्रवाई की। पुलिस “ऑपरेशन साइबर वज्र” के तहत संदिग्ध बैंक खातों और साइबर ठगी से जुड़े मोबाइल नंबरों की जांच कर रही थी। जांच के दौरान थाना स्तर पर प्राप्त करीब 159 संदिग्ध खातों को विभिन्न बैंकों में हॉटस्पॉट और रेड जोन के रूप में चिन्हित किया गया था।

इन 19 रेड जोन क्षेत्रों में करीब 2500 मोबाइल फोन और NCRP (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर प्राप्त शिकायतों का विश्लेषण किया गया। इसी जांच के दौरान सेक्टर-2 में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर का पता चला, जहां से नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा था।
कैसे करते थे ठगी?
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे Quicker.com और अन्य जॉब वेबसाइटों से नौकरी तलाश रहे व्यक्तियों का डाटा हासिल करते थे। इसके बाद वे उन लोगों को कॉल कर खुद को SpiceJet कंपनी से जुड़ा बताते थे और एयरलाइन में नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाते थे।
जब कोई व्यक्ति उनके झांसे में आ जाता था, तो आरोपी उसके नाम से फर्जी जॉब ऑफर लेटर तैयार कर भेज देते थे। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन फीस या ट्रेनिंग फीस के नाम पर हजारों रुपये जमा कराने को कहते थे।
पैसे सीधे आरोपियों के खातों में नहीं जाते थे। इसके लिए वे फर्जी बैंक खातों, जिन्हें साइबर अपराध की भाषा में “म्यूल खाते” कहा जाता है, का इस्तेमाल करते थे। रकम जमा होने के बाद आरोपी उसे अलग-अलग खातों और UPI माध्यमों से निकाल लेते थे।
सिम कार्ड नष्ट कर देते थे आरोपी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि ठगी के बाद आरोपी इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड को नष्ट कर फेंक देते थे ताकि पुलिस तक उनकी पहचान न पहुंच सके। जरूरत पड़ने पर वे गरीब और अनजान लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से नए सिम कार्ड प्राप्त कर लेते थे।

यही कारण था कि शिकायतकर्ताओं के लिए असली आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। पुलिस का कहना है कि गिरोह ने इसी तरीके से विभिन्न राज्यों में लोगों को निशाना बनाया।
NCRP पोर्टल पर 20 से अधिक शिकायतें
पुलिस के अनुसार इस तरह की ठगी से संबंधित 20 से अधिक शिकायतें NCRP पोर्टल पर दर्ज हैं। शिकायतें अलग-अलग राज्यों से प्राप्त हुई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि गिरोह का नेटवर्क केवल नोएडा तक सीमित नहीं था।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से बड़ी रकम वसूलते थे और इस तरीके से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया। पुलिस अब गिरोह के बैंक लेनदेन और अन्य सहयोगियों की भी जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
सुदेश सिंह (36 वर्ष): निवासी ग्राम कुरसारा, थाना कुर्रा, जिला मैनपुरी; वर्तमान पता सेक्टर-37, थाना सेक्टर-39, गौतमबुद्धनगर।
बृजेश भदौरिया (38 वर्ष): निवासी ग्राम कुरसारा, थाना खुर्रा, जिला मैनपुरी; वर्तमान पता बी-173, न्यू अशोक नगर, दिल्ली।
अर्जुन (23 वर्ष): निवासी त्रिलोकपुरी, दिल्ली; वर्तमान पता गली नंबर 8, न्यू अशोक नगर, दिल्ली।
संदीप कुमार तिवारी (32 वर्ष): निवासी ग्राम सखनी धवैया, रघुनाथगंज, थाना मनगवां, जिला रीवा (मध्य प्रदेश); वर्तमान पता गली नंबर 8, न्यू अशोक नगर, दिल्ली।
बरामदगी में क्या-क्या मिला?
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद किया है:
ठगी में प्रयुक्त 08 मोबाइल फोन
03 बैंक पासबुक (म्यूल खाते)
04 UPI साउंड बॉक्स

पुलिस का मानना है कि ये सामान गिरोह के साइबर ठगी नेटवर्क के संचालन में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
चारों आरोपियों के खिलाफ थाना फेस-1 में मुकदमा संख्या 343/2026 दर्ज किया गया है। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 340(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस आगे क्या जांच कर रही है?
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं। साथ ही संदिग्ध बैंक खातों, डेबिट कार्डों और मोबाइल नंबरों के माध्यम से हुए लेनदेन की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपियों ने किन-किन राज्यों के लोगों से ठगी की और कुल कितनी रकम उनके खातों में पहुंची। पुलिस के अनुसार गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
युवाओं को पुलिस की सलाह
पुलिस ने नौकरी तलाश रहे युवाओं से अपील की है कि किसी भी कंपनी में नौकरी के नाम पर फोन, व्हाट्सऐप या ईमेल के जरिए मांगी गई रजिस्ट्रेशन फीस या प्रोसेसिंग फीस जमा करने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और भर्ती प्रक्रिया की पुष्टि अवश्य करें।
यदि किसी को ऐसी कॉल प्राप्त होती है, तो तुरंत NCRP पोर्टल या स्थानीय साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराएं।
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