गोरखपुर में सोमवार देर रात यूपी एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक लाख रुपये का इनामी बदमाश मुस्तफिजुल रहमान उर्फ बाबू मुठभेड़ में मारा गया। आरोपी पिछले 11 वर्षों से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, पुलिस हिरासत से फरारी सहित 10 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज थे। मुठभेड़ में एक हेड कॉन्स्टेबल भी घायल हुए। मौके से पिस्टल, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुई।
उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सोमवार देर रात गोरखपुर में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय पुलिस को बड़ी सफलता मिली। संयुक्त कार्रवाई के दौरान एक लाख रुपये का इनामी और लंबे समय से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी मुस्तफिजुल रहमान उर्फ बाबू मुठभेड़ में मारा गया। मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ का एक हेड कॉन्स्टेबल भी घायल हो गया, जिसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस के अनुसार मुठभेड़ सोमवार रात लगभग 11 बजे रामनगर करजहा से कुशीनगर जाने वाले मार्ग पर हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि आजमगढ़ का कुख्यात अपराधी मुस्तफिजुल रहमान इस रास्ते से गुजरने वाला है। सूचना के आधार पर स्थानीय पुलिस और एसटीएफ की टीम ने संयुक्त रूप से इलाके की घेराबंदी कर निगरानी शुरू कर दी।
कुछ देर बाद संदिग्ध बाइक पर सवार एक व्यक्ति आता दिखाई दिया। पुलिस टीम ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन उसने रुकने के बजाय कथित रूप से पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें मुस्तफिजुल रहमान गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया।
मुठभेड़ के दौरान हेड कॉन्स्टेबल महेंद्र सिंह भी घायल हो गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। वहीं घायल बदमाश को भी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटनास्थल से पुलिस ने एक .32 बोर की पिस्टल, कारतूस, भारी मात्रा में खोखे और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। बरामद हथियारों को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
बसपा नेता हत्याकांड के बाद घोषित हुआ था एक लाख का इनाम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुस्तफिजुल रहमान मूल रूप से खुदनपुर, थाना मेहनगर, जनपद आजमगढ़ का रहने वाला था। वर्ष 2021 में बसपा नेता कमालू की हत्या के मामले में वह मुख्य आरोपियों में शामिल था और उसी मामले में वह फरार चल रहा था। इस केस की गंभीरता को देखते हुए एडीजी वाराणसी जोन ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
पुलिस का कहना है कि वर्ष 2011 से वह विभिन्न मामलों में फरार चल रहा था और लगातार अपनी लोकेशन बदलकर कानून से बचने की कोशिश कर रहा था।
गुजरात और महाराष्ट्र तक फैला था फरारी का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि आजमगढ़ से फरार होने के बाद मुस्तफिजुल रहमान ने कई राज्यों में ठिकाने बदले। वह कुछ समय तक गुजरात में छिपकर रहा। इसके बाद वर्ष 2024 में महाराष्ट्र के अमरावती ग्रामीण जिले में पुलिस के हत्थे चढ़ा, लेकिन वहां से भी 10 दिसंबर 2024 को पुलिस हिरासत से फरार होने में सफल रहा। इस फरारी को लेकर महाराष्ट्र में भी उसके खिलाफ अलग मुकदमा दर्ज किया गया था।
10 से अधिक गंभीर मुकदमों का आरोपी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुस्तफिजुल रहमान का आपराधिक इतिहास दो दशक से अधिक पुराना था। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, चोरी, आपराधिक साजिश, धमकी, पुलिस हिरासत से फरार होने और न्यायालय के आदेशों की अवहेलना जैसे गंभीर अपराधों में 10 से अधिक मुकदमे दर्ज थे।
उसके खिलाफ दर्ज प्रमुख मामलों में शामिल हैं—
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वर्ष 2003 में थाना मेहनगर, आजमगढ़ में चोरी का मुकदमा।
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वर्ष 2008 में हत्या के प्रयास, मारपीट और धमकी का मामला।
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वर्ष 2011 में हत्या के प्रयास और बलवा से जुड़ा मुकदमा, जिसके बाद वह फरार हो गया।
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वर्ष 2012 में हत्या और आपराधिक साजिश का मामला, जिसमें उसके खिलाफ धारा 82 और 83 सीआरपीसी के तहत उद्घोषणा और कुर्की की कार्रवाई हुई।
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वर्ष 2021 में बसपा नेता कमालू हत्याकांड में नामजद आरोपी बना और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ।
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न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और जान से मारने की धमकी से जुड़े अलग-अलग मुकदमे।
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भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज नए मामले।
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महाराष्ट्र में पुलिस हिरासत से फरार होने का मामला।
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वर्ष 2026 में हरदोई के बिलग्राम थाने में भी उसके खिलाफ नया मुकदमा दर्ज किया गया।
वर्षों तक पुलिस को देता रहा चुनौती
मुस्तफिजुल रहमान कई वर्षों से पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। उसके खिलाफ कई बार गैर-जमानती वारंट जारी हुए, उद्घोषणा की कार्रवाई हुई और संपत्ति कुर्क करने तक की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बावजूद वह गिरफ्तारी से बचता रहा। पुलिस का कहना है कि वह लगातार राज्यों के बीच अपनी आवाजाही बदलता रहता था, जिससे उसकी गिरफ्तारी मुश्किल हो रही थी।
पुलिस करेगी आगे की विधिक कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुठभेड़ की पूरी घटना की वैधानिक जांच कराई जा रही है। घटनास्थल से बरामद हथियारों की बैलिस्टिक जांच भी कराई जाएगी। घायल हेड कॉन्स्टेबल महेंद्र सिंह का इलाज जारी है और उनकी स्थिति पर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है।
अधिकारियों का कहना है कि मुस्तफिजुल रहमान के मारे जाने के बाद उसके आपराधिक नेटवर्क, सहयोगियों और अन्य लंबित मामलों की जांच भी आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि उससे जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके।
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