ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र ईकोटेक-3 में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए करीब 2 किलोमीटर लंबी सड़क को 4 लेन से बढ़ाकर 6 लेन करने की तैयारी शुरू हो गई है। नोएडा-सूरजपुर-दादरी मार्ग से न्यू हॉलैंड गोलचक्कर तक प्रस्तावित इस परियोजना पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण करीब 7.37 करोड़ रुपये खर्च करेगा। सड़क चौड़ीकरण के साथ अधूरी नाली को पूरा करने, जल निकासी सुधारने और सड़क किनारे ग्रास पेवर ब्लॉक लगाने का काम भी किया जाएगा।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दादरी के बीच रोजाना सफर करने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। औद्योगिक क्षेत्र ईकोटेक-3 में लंबे समय से यातायात के दबाव को देखते हुए सड़क की क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है।
नोएडा-सूरजपुर-दादरी मार्ग से न्यू हॉलैंड गोलचक्कर तक जाने वाली करीब 2 किलोमीटर लंबी सड़क को अब 4 लेन से बढ़ाकर 6 लेन किया जाएगा। इस सड़क से रोजाना निजी वाहनों के अलावा बड़ी संख्या में मालवाहक और भारी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में मौजूदा सड़क की क्षमता पर लगातार दबाव बना रहता है।
अब सवाल यह है कि क्या सड़क चौड़ी होने के बाद केवल जाम से राहत मिलेगी या ईकोटेक-3 की दूसरी बड़ी समस्याओं—जलभराव और धूल—पर भी असर पड़ेगा? प्रस्तावित परियोजना में इन दोनों पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
4 लेन से 6 लेन होगी सड़क
परियोजना के तहत करीब दो किलोमीटर लंबे सड़क हिस्से को 4 लेन से बढ़ाकर 6 लेन किया जाएगा। सड़क की क्षमता बढ़ने से एक समय में अधिक वाहनों को गुजरने के लिए जगह मिलेगी।
ईकोटेक-3 में औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक गतिविधियों की बड़ी मौजूदगी है। इसके कारण कर्मचारियों के निजी वाहनों के साथ-साथ सामान ढोने वाले ट्रकों और अन्य भारी वाहनों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है।
मौजूदा सड़क की चौड़ाई और यातायात के दबाव के बीच कई बार वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है और जाम की स्थिति बन जाती है। सड़क चौड़ी होने के बाद वाहनों को अतिरिक्त लेन मिलने से यातायात के अधिक सुचारु होने की उम्मीद है।
इसका सीधा फायदा ग्रेटर नोएडा वेस्ट से सूरजपुर-दादरी मार्ग की ओर जाने वाले लोगों के साथ ईकोटेक-3 में रोजाना आने-जाने वाले कर्मचारियों और औद्योगिक वाहनों को मिल सकता है।
सिर्फ सड़क नहीं, नाली भी होगी तैयार
परियोजना की खास बात यह है कि इसमें केवल सड़क चौड़ीकरण तक काम सीमित नहीं रखा गया है। ईकोटेक-3 में बारिश के दौरान होने वाले जलभराव को कम करने के लिए जल निकासी व्यवस्था को भी बेहतर किया जाएगा।
सड़क के साथ मौजूद अधूरी नाली का निर्माण पूरा कराया जाएगा। इसका उद्देश्य बारिश के पानी की निकासी को व्यवस्थित करना है, ताकि पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा न रहे।
औद्योगिक क्षेत्र में जलभराव की समस्या सिर्फ वाहन चालकों के लिए परेशानी नहीं बनती, बल्कि इससे सड़क की स्थिति और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है। ऐसे में सड़क और ड्रेनेज का काम एक साथ होने से परियोजना का असर व्यापक हो सकता है।
सड़क किनारे लगेंगे ग्रास पेवर ब्लॉक
परियोजना में पर्यावरण और धूल नियंत्रण का पहलू भी शामिल किया गया है। सड़क के किनारों पर छिद्रयुक्त टाइल्स और ग्रास पेवर ब्लॉक लगाए जाएंगे।
इनका एक फायदा यह होगा कि सड़क के किनारे मौजूद खुले हिस्सों को व्यवस्थित किया जा सकेगा। साथ ही छिद्रयुक्त सतह बारिश के पानी को जमीन के भीतर जाने में मदद कर सकती है।
इस व्यवस्था से बारिश के पानी के संरक्षण में मदद मिलने के साथ सड़क किनारे उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने में भी फायदा होने की उम्मीद है।
यानी परियोजना में सड़क चौड़ीकरण के साथ तीन महत्वपूर्ण समस्याओं—जाम, जलभराव और धूल—को एक साथ संबोधित करने का प्रयास किया जा रहा है।
औद्योगिक वाहनों के दबाव से बढ़ती रही परेशानी
ईकोटेक-3 की पहचान एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र के रूप में है। यहां बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं। इन इकाइयों के कारण माल की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
भारी वाहनों की आवाजाही के चलते सड़क पर सामान्य यातायात के साथ औद्योगिक वाहनों का दबाव भी रहता है। जब वाहनों की संख्या सड़क की मौजूदा क्षमता से अधिक हो जाती है तो जाम की स्थिति बनने लगती है।
करीब दो किलोमीटर के हिस्से को 6 लेन करने से सड़क की क्षमता बढ़ेगी। इससे वाहनों के आवागमन को अधिक जगह मिलेगी और ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
7.37 करोड़ रुपये की परियोजना
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस पूरी परियोजना पर करीब 7.37 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसमें सड़क को 4 से 6 लेन करने के अलावा नाली निर्माण, सड़क किनारे पेवर ब्लॉक और अन्य आवश्यक कार्य भी शामिल हैं।
परियोजना पूरी होने के बाद उम्मीद है कि ईकोटेक-3 के इस हिस्से में यातायात व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर होगी। खासकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट, सूरजपुर और दादरी के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए सफर अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
अब निगाह काम पूरा होने की रफ्तार पर
सड़क चौड़ीकरण की तैयारी से ईकोटेक-3 के लोगों और रोजाना यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को राहत की उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन परियोजना का वास्तविक असर काम पूरा होने के बाद ही सामने आएगा।
अगर सड़क चौड़ीकरण के साथ नाली और जल निकासी व्यवस्था भी प्रभावी ढंग से तैयार होती है, तो जाम के साथ जलभराव की समस्या पर भी एक साथ असर पड़ सकता है। वहीं ग्रास पेवर ब्लॉक और छिद्रयुक्त टाइल्स का इस्तेमाल सड़क किनारे धूल और बारिश के पानी की समस्या को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है।
फिलहाल करीब 7.37 करोड़ रुपये की इस परियोजना से ईकोटेक-3 के करीब दो किलोमीटर हिस्से की तस्वीर बदलने की तैयारी है। अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित 6 लेन सड़क जमीन पर कितनी जल्दी उतरती है और क्या इससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट-दादरी के रोजमर्रा के सफर में वाकई जाम से राहत मिलती है।
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